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दिल्ली पुलिस का बड़ा एक्शन

पूर्वी दिल्ली में 45 किलो गांजे के साथ ड्रग सिंडिकेट का भंडाफोड़, दो गिरफ्तार

पूर्वी जिले के दिल्ली पुलिस की एंटी-नारकोटिक्स स्क्वॉड (ANS) ने गुरुवार को गांजे के भंडारण और वितरण में शामिल दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

पूर्वी दिल्ली में 45 किलो गांजे के साथ ड्रग सिंडिकेट का भंडाफोड़ दो गिरफ्तार

Delhi Police Bust Major Drug Racket, 45kg Marijuana Seized |

नई दिल्ली। पूर्वी जिले के दिल्ली पुलिस की एंटी-नारकोटिक्स स्क्वॉड (ANS) ने गुरुवार को गांजे के भंडारण और वितरण में शामिल एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ किया है। सटीक सूचना पर कार्रवाई करते हुए ANS की टीम ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। उनके कब्जे से भारी मात्रा में गांजा, नकदी और पैकेजिंग का सामान बरामद किया।

शशि गार्डन के रिहायशी इलाके में छापेमारी

पुलिस के मुताबिक 2 अप्रैल को सूचना मिली थी कि नदीम और मोनू उर्फ अभिषेक नाम के दो लोगों ने शशि गार्डन के जवाहर मोहल्ला स्थित एक घर में भारी मात्रा में गांजा जमा कर रखा है। वे इसे आगे सप्लाई करने की तैयारी कर रहे हैं। इसके बाद टीम ने उस स्थान पर छापेमारी की। यहां दोनों आरोपियों को गांजे के छोटे-छोटे पैकेट बनाते हुए पकड़ा गया। तलाशी के दौरान संदिग्ध नशीले पदार्थ से भरे चार प्लास्टिक बैग बरामद हुए। कानूनी प्रक्रिया पूरी करने और वजन करने के बाद, बरामद पदार्थ 45 किलो 760 ग्राम गांजा पाया गया, जो 'व्यावसायिक मात्रा' की श्रेणी में आता है।

पांडव नगर थाने में मामला दर्ज

इस संबंध में पांडव नगर थाने में एनडीपीएस अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। दोनों आरोपियों को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया। अब पुलिस इस नेटवर्क के मुख्य स्रोत और वितरण के पूरे जाल का पता लगाने के लिए आगे की जांच कर रही है। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने खुलासा किया कि वे दिल्ली-एनसीआर में सक्रिय एक संगठित ड्रग सप्लाई नेटवर्क का हिस्सा थे। वे अन्य राज्यों से थोक में गांजा मंगवाते थे।

घनी आबादी वाले इलाकों को बनाया था अड्डा

शक से बचने के लिए इसे किराए के घरों या आवासीय परिसरों में छिपाकर रखते थे। इसके बाद इसे छोटी पुड़ियों में पैक कर स्थानीय नेटवर्क के जरिए बेचा जाता था। आरोपियों ने अपनी गतिविधियों को छिपाने के लिए जानबूझकर घनी आबादी वाले इलाकों को अपना ठिकाना बनाया था। उनका मुख्य मकसद पैसा कमाना था, क्योंकि नशीले पदार्थों की तस्करी उन्हें जल्दी और ज्यादा कमाई का जरिया लगती थी।

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