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डिंडौरी में सरकारी धान की बर्बादी

डिंडौरी में सरकारी धान की बर्बादी, बारिश में भींगने से हजारो बोरियों में उगने लगे पौधे

डिंडौरी के निगवानी वेयर हाउस में खुले स्टेक में रखा सरकारी धान बारिश में भीगकर खराब हो गया। करीब 15 हजार बोरियों के नुकसान की बात सामने आई है।

डिंडौरी में सरकारी धान की बर्बादी बारिश में भींगने से हजारो बोरियों में उगने लगे पौधे

Dindori: Thousands of Paddy Bags Damaged Due to Rain |

डिंडौरी (मध्य प्रदेश)। जिले में सरकारी धान के रखरखाव को लेकर एक गंभीर लापरवाही सामने आई है। निगवानी स्थित वेयर हाउस में खुले स्टेक में रखी हजारों क्विंटल धान बारिश के पानी में भीगकर खराब हो गई। हालात यह हैं कि कई बोरियां सड़ चुकी हैं, जबकि कुछ बोरियों में धान अंकुरित होकर पौधे का रूप लेने लगा है। सरकारी अनाज की इस बर्बादी ने भंडारण व्यवस्था और जिम्मेदार विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

15 हजार बोरियां बारिश की चपेट में आने से खराब होने का दावा

जानकारी के मुताबिक निगवानी वेयर हाउस में करीब 75 ओपन स्टेक बनाए गए हैं। प्रत्येक स्टेक में लगभग 300 बोरियां धान रखी गई हैं। मजदूरों के अनुसार बड़ी संख्या में बोरियां बारिश की चपेट में आकर खराब हो चुकी हैं। बताया जा रहा है कि करीब 15 हजार बोरियां खराब होकर बर्बादी की स्थिति में पहुंच गई हैं।

खराब और सही धान की छंटाई में जुटे मजदूर

वेयर हाउस परिसर में अब मजदूर खराब और सही धान की छंटाई करते नजर आ रहे हैं। जो धान कुछ हद तक उपयोग योग्य बचा है, उसे अलग कर मिलों में भेजने की प्रक्रिया चल रही है। वहीं दूसरी ओर सड़ी हुई बोरियों और उनमें उगी धान की तस्वीरें सरकारी अनाज के रखरखाव की हकीकत बयां कर रही हैं।

बारिश से पहले खुले में धान रखने पर उठे गंभीर सवाल

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब बारिश का मौसम पहले से तय था, तो आखिर सरकारी धान को खुले में रखने की व्यवस्था क्यों की गई? क्या धान को सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं थे? यदि समय रहते तिरपाल, शेड या अन्य सुरक्षा व्यवस्था की जाती, तो क्या इतनी बड़ी मात्रा में अनाज खराब होने से बचाया नहीं जा सकता था?

सरकारी धान की बर्बादी से लाखों के नुकसान की आशंका

हजारों बोरियों में रखी सरकारी धान के खराब होने से सरकार को लाखों रुपये के नुकसान की आशंका जताई जा रही है। हालांकि वास्तविक नुकसान कितना हुआ, इसका आकलन संबंधित विभाग की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस पूरे मामले की जांच कराकर जिम्मेदारी तय करता है या फिर सरकारी अनाज की बर्बादी का यह मामला भी जिम्मेदारों की लापरवाही के बीच दबकर रह जाता है।

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