भोपाल। नीति आयोग की रिपोर्ट में मध्य प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर स्थिति सामने आई है...
प्राइमरी में ड्रॉप आउट सबसे अधिक, 12वी तक आते-आते 55 फीसदी बच्चे स्कूल छोड़ देते
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भोपाल। नीति आयोग की रिपोर्ट में मध्य प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर स्थिति सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में प्राइमरी स्तर पर ड्रॉपआउट दर सबसे अधिक है और 12वीं तक पहुंचते-पहुंचते 55% बच्चे स्कूल छोड़ देते हैं।
छात्रों की संख्या लगातार हो रही कम
रिपोर्ट में बताया गया है कि 10वीं के बाद 11वीं में प्रवेश लेने वाले छात्रों की संख्या लगातार घट रही है। मध्य प्रदेश में यह प्रतिशत केवल 47.8% दर्ज किया गया, जो देश में सबसे खराब स्थिति में शामिल है। इसके बाद बंगाल, मिजोरम, अरुणाचल और असम जैसे राज्य हैं। वहीं राष्ट्रीय औसत 75.1% बताया गया है।
यह दुखद, शिक्षकों के 52 हजार पद है खाली
प्रदेश में शिक्षकों की भारी कमी भी सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक करीब 52 हजार शिक्षकों के पद खाली हैं और लगभग 7 हजार स्कूल केवल “गेस्ट” शिक्षकों के भरोसे चल रहे हैं। कई स्कूलों में एक भी नियमित शिक्षक नहीं है।
आश्चर्य, अपने ही विषय में फेल हो रहे शिक्षक
रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ कि कई शिक्षक अपने ही विषय की परीक्षा में 70% अंक तक हासिल नहीं कर सके। इससे शिक्षा की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
शिक्षा का मंदिर जर्जर, स्कूलों की हालत खराब
प्रदेश के हजारों स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक नहीं हैं। कई स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी है। बच्चों के बीच पढ़ाई छोड़ने की दर लगातार बढ़ रही है। उच्च माध्यमिक स्तर तक पहुंचते-पहुंचते केवल 45% छात्र ही स्कूल में नामांकित रह जाते हैं।
सरकार पर भी उठ रहे हैं सवाल
रिपोर्ट के बाद प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार पर सवाल उठने लगे हैं। विपक्ष ने इसे शिक्षा तंत्र की विफलता बताया है, जबकि विशेषज्ञों का कहना है कि स्कूलों में शिक्षक भर्ती और बुनियादी सुविधाओं में सुधार बेहद जरूरी है।
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