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डीडवाना में चार अभियुक्तों को उम्रकैद

डीडवाना में 2019 के जानलेवा हमले का फैसला, चार अभियुक्तों को उम्रकैद

डीडवाना कोर्ट ने मौलासर थाने के 2019 के चर्चित मामले में चार अभियुक्तों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है। अदालत ने हत्या की साजिश के मामले में 10 साल का कठोर कारावास दिया।

डीडवाना में 2019 के जानलेवा हमले का फैसला चार अभियुक्तों को उम्रकैद

डीडवाना में चार अभियुक्तों को उम्रकैद |

डीडवाना: थाना मौलासर के साल 2019 के चर्चित जानलेवा हमले के मामले में जिला एवं सेशन न्यायालय, डीडवाना ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए चार अभियुक्तों को दोषी करार दिया है। जिला एवं सेशन न्यायाधीश नाहर सिंह मीणा की अदालत ने अभियुक्तों को धारा 302/120बी के तहत आजीवन कारावास तथा धारा 307/120बी के तहत 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।

मामले में चार आरोपी दोषी ठहराए गए

मामला थाना मौलासर के एफआईआर संख्या 97/2019 से संबंधित है। प्रकरण में अभियोजन पक्ष की ओर से न्यायालय के समक्ष 29 गवाहों के बयान तथा 47 दस्तावेज/प्रदर्श प्रस्तुत किए गए। न्यायालय ने रामूराम पुत्र दूलाराम निवासी ढिगारिया, रेखाराम पुत्र मोहनराम निवासी प्यावा, सुनील पुत्र जगजीवनराम निवासी प्यावा और रामी देवी पत्नी रामनिवास निवासी अलखपुरा को दोषी ठहराया।

धारा 307/120बी में 10 साल

अदालत ने धारा 307/120बी आईपीसी के तहत 10 साल का कठोर कारावास एवं 25 हजार रुपये जुर्माना लगाया। जुर्माना अदा नहीं करने पर 5 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। वहीं, धारा 302/120बी आईपीसी के तहत आजीवन कारावास, जो 20 वर्ष से कम नहीं होगा और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई। जुर्माना अदा नहीं करने पर 5 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

अभियोजन और बचाव पक्ष के वकीलों ने कोर्ट में रखा पक्ष

सरकार की ओर से मामले में लोक अभियोजक वीरेन्द्र सिंह राठौड़ ने पैरवी की। अभियुक्त रेखाराम की ओर से एडवोकेट शिवभगवान चौधरी, रामी देवी की ओर से एडवोकेट जयवीर सिंह राठौड़, सुनील डोडवाड़िया की ओर से एडवोकेट केशव ओझा और रामूराम की ओर से एडवोकेट महेन्द्र सिंह खिलरी ने पैरवी की।

29 गवाहों और 47 दस्तावेजों के आधार पर चारों दोषी करार

लोक अभियोजक वीरेन्द्र सिंह राठौड़ ने बताया कि मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से ठोस साक्ष्य और गवाह न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए गए। 29 गवाहों और 47 दस्तावेजों/प्रदर्शों के आधार पर अभियोजन पक्ष ने अपना मामला प्रभावी ढंग से रखा। न्यायालय ने साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर चारों अभियुक्तों को दोषी मानते हुए धारा 302/120बी में आजीवन कारावास तथा धारा 307/120बी में 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। 

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