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चौथी कक्षा की छात्रा 25 मिनट के लिए बनी सीधी..

चौथी कक्षा की छात्रा 25 मिनट के लिए बनी सीधी की कलेक्टर

सीधी। जिले से प्रशासनिक संवेदनशीलता और एक बच्ची के हौसले के उड़ान की खूबसूरत तस्वीर सामने आई है...

चौथी कक्षा की छात्रा 25 मिनट के लिए बनी सीधी की कलेक्टर

चौथी कक्षा की छात्रा 25 मिनट के लिए बनी सीधी की कलेक्टर |

सीधी। जिले से प्रशासनिक संवेदनशीलता और एक बच्ची के हौसले के उड़ान की खूबसूरत तस्वीर सामने आई है। जनपद पंचायत कुसमी के अंतर्गत आने वाले आदिवासी बहुल गांव छड़हुला टोला को आखिरकार आजादी के इतने सालों बाद बिजली मिल गई। खास बात यह है कि यह मुकाम किसी बड़े राजनेता या मंत्री के वादे से नहीं, बल्कि इसी गांव की चौथी कक्षा में पढ़ने वाली एक नन्ही छात्रा सरस्वती सिंह के 'आदेश' से मिला।

चौथी कक्षा की छात्रा को प्रतीकात्मक 'कलेक्टर' बनाया

मामला 28 अप्रैल का है, जब छड़हुला टोला गांव में सरकारी योजनाओं की समीक्षा के लिए एक 'जन चौपाल' का आयोजन किया गया था। इस चौपाल में सीधी जिले के कलेक्टर विकास मिश्रा खुद पहुंचे थे। ​कार्यक्रम के दौरान प्राथमिक शाला छड़हुला की चौथी कक्षा की छात्रा सरस्वती सिंह ने कलेक्टर के सामने बेहद आत्मविश्वास के साथ 20 का पहाड़ा सुनाया। बच्ची की बुद्धिमानी और बेबाकी से कलेक्टर विकास मिश्रा बेहद प्रभावित हुए। उन्होंने मुस्कुराते हुए सरस्वती से पूछा कि "बड़ी होकर तुम क्या बनना चाहती हो?" 

सरस्वती ने बिना झिझक जवाब दिया। "मैं डॉक्टर बनना चाहती हूँ, लेकिन साथ ही उसने मासूमियत से अपनी समस्या भी बयां की। कहा कि "साहब, हमारे गांव में बिजली नहीं है, जिसकी वजह से रात में पढ़ाई करने में बहुत दिक्कत होती है।"

​15 दिन की समय सीमा, पर 13 दिन में पूरा हुआ काम

​बच्ची की बात कलेक्टर के दिल को छू गई। उन्होंने अनूठी पहल करते हुए सरस्वती सिंह को 25 मिनट के लिए प्रतीकात्मक रूप से 'कलेक्टर' बना दिया और उसे अपनी कुर्सी पर बैठा दिया। ​कलेक्टर की कुर्सी संभालते ही नन्ही सरस्वती ने 'कलेक्टर फॉर ए डे' के रूप में अपना पहला आधिकारिक आदेश जारी किया। उसने अधिकारियों को निर्देश दिया, 15 दिन में मेरे गाँव में बिजली पहुंचाएं।

प्रशासनिक अमला एक्शन मोड में 15 दिन का काम 13 दिन में पूरा किया

प्रशासनिक अमला इस नन्ही कलेक्टर के आदेश के बाद तुरंत एक्शन मोड में आ गया। सरकारी तंत्र ने इतनी तेजी से काम किया कि 15 दिन की समय सीमा से पहले, यानी 13 दिन में ही गांव के सभी 40 घरों में बिजली के खंभे और तार खींचकर बिजली चालू कर दी गई।

​गांव हुआ रौशन तो लोगों ने बल्ब के पास स्वास्तिक का चिह्न लगाया

छड़हुला टोला गांव की कुल आबादी करीब 207 है। इससे पहले यहां के लोग रात के अंधेरे को दूर करने के लिए लालटेन, मिट्टी के तेल का दीया या लकड़ी जलाकर गुजारा करते थे। जब गांव में पहली बार बिजली की सप्लाई शुरू हुई, तो ग्रामीणों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। लोगों ने अपने घरों में बल्ब के पास स्वस्तिक का चिह्न बनाया, फूल-अक्षत चढ़ाकर बिजली का स्वागत किया। खुद सरस्वती ने अपने हाथों से बटन दबाकर अपने घर को रोशन किया।

​सड़क निर्माण का दिया आदेश, जल्द होगा पूरा

बतौर 'कलेक्टर' सरस्वती ने सिर्फ बिजली ही नहीं, बल्कि गांव तक पक्की सड़क बनाने का आदेश भी दिया था। कुसमी जनपद पंचायत के सीईओ ज्ञानेंद्र मिश्रा के अनुसार, सड़क निर्माण के लिए सर्वे का काम पूरा कर लिया गया है और जून महीने तक सड़क निर्माण का कार्य भी पूरा कर लिया जाएगा। गांव की अन्य छात्राओं का कहना है कि अब बिजली आने से उन्हें रात में पढ़ाई करने में आसानी होगी और वे स्कूल में कंप्यूटर का उपयोग भी सीख सकेंगी।

25 मिनट की कलेक्टर ने बदली तस्वीर

कलेक्टर विकास मिश्रा की इस संवेदनशील पहल और नन्ही सरस्वती के हौसले ने सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली की एक बेहतरीन मिसाल पेश की है। 25 मिनट की इस 'कलेक्टरी' ने एक पूरे आदिवासी गांव की तकदीर बदलकर रख दी। 

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