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घाघरा कटान से 1100 साल पुराने मंदिर पर खतरा

घाघरा की तेज कटान से 1100 साल पुराने बाबा नारायण दास मंदिर पर खतरा, प्रशासन ने शुरू किया बचाव कार्य

तहसील रामनगर क्षेत्र के हेतमापुर में सरयू (घाघरा) नदी की तेज कटान से करीब 1100 साल पुराने बाबा नारायण दास मंदिर पर खतरा मंडरा रहा है।

 घाघरा की तेज कटान से 1100 साल पुराने बाबा नारायण दास मंदिर पर खतरा प्रशासन ने शुरू किया बचाव कार्य

Ghaghra Erosion Threatens 1,100-Year-Old Temple |

बाराबंकी {उत्तरप्रदेश}: तहसील रामनगर क्षेत्र के हेतमापुर में सरयू (घाघरा) नदी की तेज कटान से करीब 1100 साल पुराने बाबा नारायण दास मंदिर पर खतरा मंडरा रहा है। नदी का जलस्तर खतरे के लाल निशान से ऊपर बहने के साथ ही कटान लगातार जारी है। मंदिर को नदी की धारा से सुरक्षित बचाने के लिए प्रशासन और बाढ़ खंड की टीम ने मौके पर सुरक्षात्मक कार्य शुरू कर दिया है।

मंदिर की नींव को कटान से बचाने की कोशिश

बाढ़ खंड अधिकारी शशिकांत सिंह की मौजूदगी में कटान प्रभावित स्थान पर लोहे के जाल के अंदर बोरियां लगाई जा रही हैं। इन बोरियों में पत्थर और ईंटों को प्लास्टिक के पैकेट में पैक कर भरा जा रहा है, ताकि मंदिर के नीचे नदी की कटान को रोका जा सके। टीम का प्रयास है कि नदी की धारा को मंदिर की नींव से दूर रखा जाए और तेजी से हो रही कटान पर तत्काल प्रभावी रोक लगाई जा सके।

समाधि और मस्जिद भी नदी में समा चुकी

स्थानीय लोगों के अनुसार घाघरा नदी की कटान से इससे पहले करीब 300 साल पुरानी समाधि नदी में समा चुकी है। वहीं लगभग 150 साल पुरानी मस्जिद भी कटान की चपेट में आकर नदी में समा गई। इसके अलावा करीब दो दर्जन से अधिक ग्रामीणों के मकान भी घाघरा नदी की तेज कटान के चलते धराशायी होकर नदी में समा चुके हैं। लगातार हो रही कटान से ग्रामीणों में भी चिंता का माहौल बना हुआ है।

अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर लिया जायजा

कटान की गंभीर स्थिति को देखते हुए जिलाधिकारी ईशान प्रताप सिंह, अपर जिलाधिकारी निरंकार सिंह, बाढ़ खंड अधिकारी शशिकांत सिंह, एसडीएम आकांक्षा गुप्ता और तहसीलदार विपुल सिंह सहित कई अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। अधिकारियों ने कटान प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण कर बचाव कार्यों की स्थिति देखी।

एमएलसी ने भी किया निरीक्षण

वहीं विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) अंगद सिंह भी मौके पर पहुंचे और मंदिर तथा आसपास के कटान प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को मंदिर की सुरक्षा के लिए सुरक्षात्मक कार्य तेजी से कराने के निर्देश दिए। प्रशासन की प्राथमिकता फिलहाल ऐतिहासिक मंदिर को घाघरा नदी की कटान से सुरक्षित बचाना है।

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