जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के लिए गुलाम नबी आजाद ने पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने फारूक अब्दुल्ला के बयान से असहमति जताते हुए कहा कि क्षेत्र का विकास केंद्र सरकारों के कारण हुआ है।
श्रीनगर (जम्मू और कश्मीर)। डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आज़ाद पार्टी (DPAP) के प्रमुख गुलाम नबी आजाद ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला के उस बयान को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान ने कश्मीर मुद्दे को जिंदा रखा है और दिल्ली से कोई उम्मीद नहीं है। आजाद ने दो टूक कहा कि घाटी में दशकों के आतंकवाद और तबाही के लिए पाकिस्तान जिम्मेदार है, जबकि देश की हर सरकार ने जम्मू-कश्मीर के विकास में अहम योगदान दिया है।
फारूक साहब का बयान बिल्कुल गलत
श्रीनगर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए गुलाम नबी आजाद ने कहा कि वह फारूक अब्दुल्ला का सम्मान करते हैं, लेकिन उनका यह बयान पूरी तरह गलत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 1947 से ही जम्मू-कश्मीर में हिंसा, अस्थिरता और रक्तपात के पीछे सिर्फ पाकिस्तान का हाथ रहा है।
आजाद ने आरोप लगाया कि पड़ोसी देश ने बार-बार कश्मीर में आतंकवाद फैलाने और यहां की जमीन हड़पने की नापाक कोशिशें की हैं।
PoK के हालात और आतंकवाद का दर्द
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) का जिक्र करते हुए आजाद ने बड़ा दावा किया कि वहां के लोग अब पाकिस्तान के चंगुल से आजादी चाहते हैं। उन्होंने कहा कि आज PoK में हालात बेहद बदतर हैं और वहां के नागरिक भारत के साथ रहना चाहते हैं।
पाकिस्तान द्वारा कश्मीर को सुरक्षित रखने के दावों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि आतंकवाद की वजह से ही हजारों युवा मारे गए, अनगिनत महिलाएं विधवा हुईं और कश्मीरी पंडितों व मुस्लिम परिवारों को अपना घर छोड़कर विस्थापित होना पड़ा। इन सबके लिए सिर्फ पाकिस्तान जिम्मेदार है।
केंद्र सरकारों के विकास कार्यों का बचाव
गुलाम नबी आजाद ने देश की विभिन्न सरकारों की भूमिका का बचाव करते हुए कहा कि जवाहरलाल नेहरू से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक, हर हुकूमत ने जम्मू-कश्मीर के बुनियादी ढांचे को मजबूत किया है।
उन्होंने कहा, "सड़कों, सुरंगों, फोर-लेन हाईवे और रेलवे कनेक्टिविटी जैसी तमाम परियोजनाएं इस बात का गवाह हैं कि घाटी में जो भी विकास हुआ है, वह भारत सरकार की बदौलत हुआ है।"
राजनीतिक लड़ाई को देश के खिलाफ न समझें
आजाद ने कहा कि केंद्र सरकार या बीजेपी के साथ उनके राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि भारत या दिल्ली घाटी को तबाह करना चाहती है।
उन्होंने साफ किया कि वे इस राजनीतिक बयानबाजी में नहीं पड़ना चाहते हैं। बीजेपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस अपनी राजनीतिक लड़ाई खुद लड़ती रहें, उनके अपने विचार हैं जिन पर वह कायम हैं।
(भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)
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