आयात शुल्क में बढ़ोतरी के बाद भारत में सोने के आयात में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है।
नई दिल्ली: आयात शुल्क में बढ़ोतरी के बाद भारत में सोने के आयात में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, पहले जहां हर महीने 70 से 100 टन सोने का आयात होता था, वहीं अब यह घटकर लगभग 25 से 30 टन प्रति माह रह गया है।
सरकार ने बताया फैसला असरदार
सरकारी सूत्रों का कहना है कि सोने पर आयात शुल्क बढ़ाने का फैसला प्रभावी साबित हो रहा है। सरकार ने कीमती धातुओं के आयात को नियंत्रित करने, विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करने और बढ़ते आयात बिल पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से सोने पर प्रभावी आयात शुल्क 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया था।
उच्च कीमतों और कमजोर मांग का असर
सूत्रों के मुताबिक, सोने के आयात में कमी के पीछे केवल शुल्क वृद्धि ही नहीं, बल्कि सोने की ऊंची कीमतें और आभूषणों की घटती मांग भी प्रमुख कारण हैं। बाजार में मांग कमजोर पड़ने से आयातकों ने भी खरीदारी कम कर दी है।
रीसाइक्लिंग में बढ़ोतरी भी बनी वजह
सरकारी सूत्रों ने बताया कि वैश्विक स्तर पर सोने की रीसाइक्लिंग में वृद्धि हुई है। पहले जिन आभूषणों को दोबारा उपयोग में नहीं लाया जाता था, अब उनकी भी रीसाइक्लिंग की जा रही है, जिससे नए सोने की मांग में कमी आई है।
व्यापार आंकड़ों में भी दिखा असर
केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय के व्यापार आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2026 में सोने का आयात लगभग 5.63 अरब अमेरिकी डॉलर था, जो मई 2026 में घटकर करीब 3.42 अरब अमेरिकी डॉलर रह गया। यह गिरावट शुल्क वृद्धि के बाद बाजार में आए बदलाव को दर्शाती है।
नामित एजेंसियों के आयात में भी कमी
सूत्रों के अनुसार, 1 अप्रैल से नामित एजेंसियों के प्राधिकरण का नवीनीकरण नहीं किए जाने के कारण उनके माध्यम से होने वाला सोने का आयात भी काफी कम हो गया है। इससे कुल आयात पर अतिरिक्त प्रभाव पड़ा है।
सोना मुद्रीकरण योजना पर सरकार सतर्क
सरकारी सूत्रों ने बताया कि सरकार फिलहाल सोना मुद्रीकरण योजना को बढ़ावा देने के पक्ष में नहीं है। पहले किए गए प्रयासों में लोगों ने अपने पास मौजूद सोने के स्रोत का खुलासा करने में हिचक दिखाई थी, जिसके चलते इस योजना को अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी।
औपचारिक आयात चैनलों को प्राथमिकता
सूत्रों का कहना है कि सरकार अब भी औपचारिक आयात चैनलों को सबसे सुरक्षित और प्रभावी मानती है। अधिकारियों के अनुसार, जब अवैध या अनौपचारिक मार्गों से विशेष आर्थिक लाभ नहीं मिलता, तो ऐसे रास्तों का उपयोग भी सीमित हो जाता है।
(एएनआई)
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