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टीचर एलिजिबिलिटी परीक्षा पर सरकार ने पक्ष रखा

शिक्षक पात्रता परीक्षा पर सरकार ने कोर्ट में रखे अपना पक्ष, CM को दिग्विजय ने लिखा पत्र

भोपाल। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने मध्य प्रदेश के शिक्षकों के समर्थन में मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखा है।

शिक्षक पात्रता परीक्षा पर सरकार ने कोर्ट में रखे अपना पक्ष cm को दिग्विजय ने लिखा पत्र

Education Controversy |

भोपाल। ​पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने मध्य प्रदेश के शिक्षकों के समर्थन में मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखा है। उन्होंने मांग की है कि शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता को लेकर राज्य सरकार खुद सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका (Review Petition) दायर करे। सिंह का कहना है कि सरकार को आगे आकर शिक्षकों का पक्ष मजबूती से रखना चाहिए ताकि उन पर मंडरा रहा आर्थिक और मानसिक दबाव कम हो सके।

शिक्षक पात्रता परीक्षा पर राजनीति तेज

​मध्य प्रदेश में शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता को लेकर मचे घमासान के बीच अब राजनीति भी तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने इस मुद्दे पर शिक्षकों का खुला समर्थन किया है। उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव को एक औपचारिक पत्र लिखा है।

यह है पूरा मामला

​मध्य प्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग ने हाल ही में एक आदेश जारी किया है, जिसके तहत प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कार्यरत करीब दो लाख से अधिक शिक्षकों के लिए TET परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया गया है। यह परीक्षा जुलाई-अगस्त 2026 में आयोजित होने की संभावना है। आदेश के अनुसार, जो शिक्षक इस परीक्षा को पास नहीं कर पाएंगे, उनकी सेवा समाप्ति या उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जा सकती है।

​क्यूरेटिव या रिव्यू पिटीशन दायर करे

​दिग्विजय सिंह ने कहा कि शिक्षक पहले से ही मानसिक तनाव में हैं। उन्होंने मांग की कि शिक्षकों को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट जाने के बजाय राज्य सरकार को खुद सुप्रीम कोर्ट में 'रिव्यू पिटीशन' या 'क्यूरेटिव पिटीशन' दायर करनी चाहिए।

​...तो वित्तीय भार से मिलेगी मुक्ति

यदि शिक्षक संगठन खुद कोर्ट जाते हैं, तो उन पर भारी आर्थिक बोझ पड़ेगा। सरकार के हस्तक्षेप से शिक्षकों को इस वित्तीय भार से मुक्ति मिलेगी। सिंह ने तर्क दिया कि मध्य प्रदेश में पिछले 25 वर्षों से व्यापमं के माध्यम से मेरिट आधारित भर्तियां हुई हैं। शिक्षक पहले ही बी.एड. जैसी आवश्यक शैक्षणिक योग्यताएं रखते हैं, ऐसे में अब उन पर परीक्षा थोपना अनुचित है।

​दूसरे राज्यों में पहले से ही राहत

उन्होंने उल्लेख किया कि यह फैसला मूल रूप से महाराष्ट्र से संबंधित था, जहां मध्य प्रदेश पक्षकार भी नहीं था। उत्तर प्रदेश और जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों ने अपने शिक्षकों के लिए पहले ही राहत हासिल की है। इस आदेश के बाद से विशेष रूप से 40-50 वर्ष की आयु के शिक्षकों में गहरी चिंता है। दिग्विजय सिंह ने पत्र में स्पष्ट किया कि यदि सरकार समय रहते कदम नहीं उठाती है, तो हजारों शिक्षकों की आजीविका संकट में पड़ सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार को शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए ढाल बनना चाहिए, न कि उन्हें कानूनी लड़ाइयों के लिए अकेला छोड़ देना चाहिए।

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