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यूपी पंचायत चुनाव पर हाईकोर्ट सख्त

यूपी में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर हाईकोर्ट सख्त, पूछा—समय पर क्यों नहीं हो रहे चुनाव

प्रयागराज: त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में देरी पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकार व चुनाव आयोग से संवैधानिक समय में चुनाव कराने को कहा।

यूपी में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर हाईकोर्ट सख्त पूछा—समय पर क्यों नहीं हो रहे चुनाव

Uttar Pradesh Politics |

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में हो रही देरी को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग से पूछा है कि वह संवैधानिक समयसीमा के भीतर चुनाव प्रक्रिया पूरी कर पाएंगे या नहीं?

पीठ ने उठाए संवैधानिक सवाल

जस्टिस राजन राय और जस्टिस अवधेश चौधरी की पीठ ने यह सवाल अधिवक्ता इम्तियाज हुसैन की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए किया है।

याचिका में समयबद्ध कार्यक्रम की मांग

हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में मौजूदा पिछड़ा वर्ग आयोग के अधिकारों को चुनौती दी गई थी। साथ ही पंचायत चुनाव की पूरी प्रक्रिया के लिए समयबद्ध कार्यक्रम तय कर रिकॉर्ड पर रखने की मांग की गई।

तैयारियों पर कोर्ट की सख्ती

उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव तय कार्यक्रम के अनुसार इसी साल होने हैं, लेकिन अब तक राज्य सरकार की कोई ठोस तैयारी नजर नहीं आ रही है। इस पर कोर्ट ने निर्वाचन आयोग से स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।

समयसीमा पर कोर्ट की चिंता

कोर्ट ने पूछा कि चुनाव समय सीमा के भीतर क्यों नहीं कराए जा रहे हैं और क्या संवैधानिक समयसीमा के भीतर पूरी प्रक्रिया पूरी हो पाएगी?

ओबीसी आयोग गठन बना बड़ा मुद्दा

सरकार ने हलफनामे में बताया कि स्थानीय निकाय चुनाव से पहले एक समर्पित पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आयोग का गठन किया जाएगा। इसी रिपोर्ट के आधार पर पंचायत सीटों पर आरक्षण तय होगा।

याचिकाकर्ता ने अधिकारों पर उठाए सवाल

याचिकाकर्ता का कहना है कि वर्तमान आयोग को आरक्षण निर्धारण का कानूनी अधिकार नहीं है और चुनाव में देरी संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन है।

अनुच्छेद 243E का हवाला

याचिका में कहा गया कि संविधान के अनुच्छेद 243E के अनुसार पंचायत का कार्यकाल पहली बैठक से अधिकतम 5 साल तक ही हो सकता है, इससे ज्यादा नहीं।

सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का दिया हवाला

सरकार ने कहा कि नया आयोग गठित कर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप कार्रवाई की जाएगी, हालांकि अभी तक आयोग की कोई रिपोर्ट सामने नहीं आई है।

चुनाव अधिसूचना पर सरकार की जिम्मेदारी

निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया कि पंचायत चुनाव की अधिसूचना जारी करना राज्य सरकार का दायित्व है, जो आयोग के परामर्श से होती है।

सरकार के भीतर ही अलग-अलग बयान

पंचायत चुनाव 2026 को लेकर सरकार के भीतर ही विरोधाभासी बयान सामने आ रहे हैं, जिससे सियासी हलचल तेज हो गई है।

केशव मौर्य ने जताई देरी की आशंका

उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि फिलहाल पंचायत चुनाव समय पर होना मुश्किल लग रहा है, क्योंकि सरकारी मशीनरी कई बड़े कामों में व्यस्त है।

SIR और जनगणना का हवाला

मौर्य के अनुसार SIR, जाति जनगणना और मकान गणना जैसे कार्य पूरे होने के बाद ही चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ पाएगी।

ओपी राजभर का अलग रुख

वहीं पंचायती राज मंत्री ओपी राजभर ने दावा किया कि पंचायत चुनाव तय समय पर ही कराए जाएंगे और सरकार पूरी तरह तैयार है।

विपक्ष पर भ्रम फैलाने का आरोप

राजभर का कहना है कि विपक्ष इस मुद्दे पर भ्रम फैला रहा है, जबकि चुनाव प्रक्रिया निर्धारित समय के अनुसार ही आगे बढ़ेगी।

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