जबलपुर शहर की एयर कनेक्टीविटी बढ़ाने के एक मामले में हाइकोर्ट ने सुनवाई की। कोर्ट ने शहर के वायु यात्रायात दुरुस्त करने के एक मामले में केंद्र, राज्य और विमान कंपनियों के प्रति कड़ी नाराजगी जताई है।
जबलपुर में बढ़ाई जाए वायु यातायात की सुविधा हाईकोर्ट
भोपाल और इंदौर में हैं अधिक सुविधाएं
पूछा, विमान संचालित नहीं तो क्यों खर्च कर रहे लोकधन
जबलपुर। जबलपुर शहर की एयर कनेक्टीविटी बढ़ाने के एक मामले में हाइकोर्ट ने सुनवाई की। कोर्ट ने शहर के वायु यात्रायात दुरुस्त करने के एक मामले में केंद्र, राज्य और विमान कंपनियों के प्रति कड़ी नाराजगी जताई है। इधर, सरकार ने कहा कि विमान कंपनियों पर उसका नियंत्रण नहीं है। इसपर कोर्ट ने कहा कि क्यों न हम न्यायिक आदेश पारित कर भोपाल और इंदौर से चलने वाले विमान को जबलपुर से भी जोड़ दें। जबलपुर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और और न्यायाधीश विनय सराफ ने कहा कि भोपाल की मुख्य न्यायिक पीठ जबलपुर को बनाया गया था। इसके बावजूद जबलपुर जैसे शहर के साथ दूसरे दर्जे का व्यवहार किया जा रहा है। कोर्ट ने उप सालिसिटर जनरल को निर्देश भी दिया। जिसमें कहा गया कि केंद्र,राज्य, विमान कंपनियों और याचिकाकर्ता के साथ बैठक कर ठोस सुझाव कोर्ट में प्रस्तुत करें। इस मामले की अगली सुनवाई 6 नवंबर को होना है।
मालूम हो कि नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच और विवि का छात्र पार्थ श्रीवास्तव ने एक जनहित याचिका दायर की थी। याचिका में जबलपुर से वायु यातायात को और बढ़ाने की मांग की गई थी। साथ ही दूसरे शहर की तुलना में जबलपुर से कम वायु यातायात की सुविधा को चुनौती दी गई। याचिका में यह भी कहा गया कि जबलपुर से केवल नौ उड़ाने संचालित हो रही है। वहीं भोपाल से प्रतिदिन 40 से भी अधिक वायुयान संचालित होते हैं। दूसरी तरफ इंदौर में करीब 80 और ग्वालियर से 25 विमान का संचालन होता है। पहले भी जबलपुर से मुंबई, कोलकाता, जोधपुर,पुणे आदि शहरों के लिए वायु यातायात की सुविधा थी।
वहीं, नबंबर से जबलपुर और दिल्ली के लिए विमान सेवा शुरु हुई है। यह विमान दोपहर दो बजे प्रस्थान करेगी। इसपर कोर्ट ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि विमानन कंपनियां सिर्फ पर्यटन को ध्यान में रखकर विमान का संचालन कर रही है। लेकिन प्रोफेशनल दृष्टि से विमान संचालित नहीं की जा रही है। समय को ऐसे निर्धारित करें कि लोग सुबह जाएं और शाम को वापस आ सकें।
वकील ने कहा कि जबलपुर एयरपोर्ट को उन्नत बनाने पर 500 करोड़ खर्च हुए हैं। पहले रात में विमान संचालित करने की सुविधा नहीं होने के कारण एयरपोर्ट का विकास नहीं हो सका। टर्मिनल छोटा था, इससे भी विमान की आवाजाही सीमित थी।विकास कार्य में पहले फेज में विमान तल की लंबाई बढ़ाई गई और वड़े विमान के लिए इसे अनुकूल बनाया गया। विकास के काम में तेजी लाई गई, लेकिन इस काम के बावजूद बहुत ही कम विमान यहां से संचालित होते हैं। दूसरी तरफ सरकार ने कहा, विमान कंपनियों पर उसका नियंत्रण नहीं है। इसपर कोर्ट ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि जब विमान को संचालित ही नहीं करना था तो इसपर लोकधन क्यों खर्च हुआ । एयरपोर्ट को किसी अन्य काम में दे दें।