झालावाड़ पुलिस के ‘नया सवेरा’ पुनर्वास अभियान के तहत आवास, रोजगार और शिक्षा से जोड़ने के प्रयासों के बीच कंजर समुदाय में दर्ज अपराधों में बड़ी कमी आने का दावा किया गया है।
Jhalawar Police’s ‘Naya Savera’ Campaign Helps Kanjar Community Move Away from Crime |
झालावाड़ (राजस्थान)। कंजर समुदाय को अपराध की राह से हटाकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए झालावाड़ पुलिस का ‘नया सवेरा’ पुनर्वास अभियान महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल कर रहा है। अभियान के तहत 360 लाभार्थियों को आवासीय पट्टे उपलब्ध कराए गए हैं। इनमें 283 पट्टे वितरित हो चुके हैं, जबकि 77 प्रक्रियाधीन हैं। इससे परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना सहित अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सकेगा।
अभियान की उपलब्धियों पर आधारित डॉक्यूमेंट्री भी प्रदर्शित
पुलिस महानिरीक्षक कोटा रेंज हरेन्द्र कुमार महावर के मुख्य आतिथ्य में आयोजित कार्यक्रम में जिला कलेक्टर अजय सिंह राठौड़, पुलिस अधीक्षक अमित कुमार और RTM अध्यक्ष रोहित अरोड़ा मौजूद रहे। इस दौरान अभियान की उपलब्धियों पर आधारित डॉक्यूमेंट्री भी प्रदर्शित की गई।

कंजर समुदाय से प्रतिवर्ष करीब 150 से 200 मामले सामने आते थे
पुलिस के अनुसार, कंजर समुदाय के डेरों से पहले चोरी, लूट, नकबजनी, डकैती, वाहन चोरी और अवैध शराब जैसे अपराधों के प्रतिवर्ष करीब 150 से 200 मामले सामने आते थे। पुलिस ने अपराध नियंत्रण के साथ शिक्षा, रोजगार, आवास और सामाजिक सुरक्षा पर ध्यान देते हुए पुनर्वास अभियान शुरू किया। डोर-टू-डोर सर्वे और लगातार समझाइश के बाद करीब 2 हजार लोगों ने अपराध छोड़कर मुख्यधारा से जुड़ने की शपथ ली।
अब तक 170 महिला-पुरुषों की भर्ती प्रक्रिया पूरी
1 मार्च 2026 को RTM भवानीमंडी के साथ एमओयू के बाद रोजगार शिविर लगाए गए। अब तक 170 महिला-पुरुषों की भर्ती प्रक्रिया पूरी कर उन्हें प्रशिक्षण दिया गया है, जबकि करीब 100 परिवारों को स्थायी रोजगार से जोड़ा गया है। डेरा बिरियाखेड़ी के मनोज कुमार का राजस्थान होमगार्ड में चयन भी अभियान की बड़ी उपलब्धि है। शिक्षा के क्षेत्र में चालू सत्र में करीब 165 बच्चों का नया नामांकन हुआ है, जबकि डेरों के करीब 900 बच्चे नियमित अध्ययनरत हैं।

मानव तस्करी पर कार्रवाई
अभियान के दौरान नाबालिग बालिकाओं की खरीद-फरोख्त का मामला सामने आने पर विभिन्न राज्यों की पुलिस के साथ कार्रवाई की गई। अंतरराज्यीय मानव तस्करी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और 14 नाबालिग बालिकाओं को रेस्क्यू कर पुनर्वासित किया गया।
अपराध 150-200 से घटकर 9
पुलिस के अनुसार पुनर्वास और रोजगार के प्रयासों का असर अपराध के आंकड़ों पर भी पड़ा है। 1 अप्रैल से 15 अगस्त 2026 तक केवल 9 प्रकरण दर्ज हुए। जबकि पूर्व वर्षों में यह संख्या 150 से 200 प्रतिवर्ष थी।
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