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किऊल नदी का जुगाड़ू पुल बना खतरा

लखीसराय के जर्जर पुल पर जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर हैं ग्रामीण

किऊल नदी पर बना जुगाड़ू पुल जर्जर हालत में पहुंच गया है, जिससे रोजाना गुजरने वाले लोगों की सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल आवागमन रोकने की मांग की है।

लखीसराय के जर्जर पुल पर जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर हैं ग्रामीण

Kiul River Bridge Dilapidated Condition |

लखीसराय: किऊल नदी पर वर्षों से लोगों के आवागमन का सहारा बना जुगाड़ू पुल अब खुद लोगों की जान के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है। पुल की जर्जर स्थिति को देखकर स्थानीय लोगों में भय और आक्रोश दोनों है। पुल के कई हिस्से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, जबकि कहीं-कहीं लकड़ी और लोहे की अस्थायी संरचना कमजोर पड़ गई है। इसके बावजूद प्रतिदिन सैकड़ों लोग पैदल, साइकिल और दोपहिया वाहनों से इस पुल का इस्तेमाल करने को मजबूर हैं।

कभी भी हो सकती है दुर्घटना

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पुल की हालत लगातार खराब होती जा रही है। बरसात के मौसम में नदी का जलस्तर बढ़ने और तेज बहाव के कारण खतरा और अधिक बढ़ गया है। पुल पर जरा-सी चूक किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया तो कभी भी बड़ी दुर्घटना हो सकती है।

जनहित को देखते हुए जुगाड़ू पुल पर तत्काल आवागमन पर लगाई जाए रोक
  
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि जनहित को देखते हुए इस जुगाड़ू पुल पर तत्काल आवागमन पर रोक लगाई जाए। साथ ही पुल के दोनों ओर चेतावनी बोर्ड एवं बैरिकेडिंग की व्यवस्था की जाए, ताकि लोग अनजाने में अपनी जान जोखिम में न डालें। उनका कहना है कि सुरक्षा के मद्देनजर वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था होने तक लोगों को सुरक्षित रास्ते से आने-जाने के लिए प्रेरित किया जाए।

स्थानीय लोगों ने मांग उठाते हुए कहा...

स्थानीय लोगों ने यह भी मांग की है कि संबंधित विभाग पुल का तत्काल तकनीकी निरीक्षण कर इसकी वास्तविक स्थिति का आकलन करे और स्थायी पुल निर्माण की दिशा में शीघ्र कार्रवाई शुरू की जाए। उनका कहना है कि विकास के इस दौर में आज भी लोगों का अस्थायी और जर्जर पुल के सहारे आवागमन करना चिंताजनक है।

प्रशासन की समय पर की गई पहल रोक सकती है संभावित हादसे

क्षेत्रवासियों का मानना है कि प्रशासन की समय पर पहल कई परिवारों को संभावित हादसे से बचा सकती है। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस गंभीर समस्या को कितनी प्राथमिकता देता है और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कब प्रभावी कदम उठाता है।

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