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मध्य प्रदेश वन और पर्यटन ऊंचाई छूने को तैयार

मध्य प्रदेश वन और पर्यटन ऊंचाई छूने को तैयार, मुख्यमंत्री निवास पर अहम बैठक

भोपाल। मध्य प्रदेश के वन और पर्यटन क्षेत्र एक बार फिर नई ऊंचाइयों को छूने की तैयारी में हैं। उज्जैन और जबलपुर में...

मध्य प्रदेश वन और पर्यटन ऊंचाई छूने को तैयार मुख्यमंत्री निवास पर अहम बैठक

मध्य प्रदेश वन और पर्यटन ऊंचाई छूने को तैयार, मुख्यमंत्री निवास पर अहम बैठक |

भोपाल। मध्य प्रदेश के वन और पर्यटन क्षेत्र एक बार फिर नई ऊंचाइयों को छूने की तैयारी में हैं। उज्जैन और जबलपुर में वाइल्डलाइफ सेंटर और रेस्क्यू सेंटर विकसित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में राजधानी भोपाल स्थित मुख्यमंत्री निवास पर उज्जैन वाइल्डलाइफ सेंटर के निर्माण को लेकर एक कंसल्टेंट फर्म के साथ महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अधिकारियों को सख्त निर्देश भी दिए।

उज्जैन में 500 हेक्टेयर का प्रोजेक्ट

बैठक में बताया गया कि उज्जैन में लगभग 500 हेक्टेयर क्षेत्र में एक हाई-टेक वाइल्डलाइफ सेंटर-कम-इंडियन ज़ू-कम-रेस्क्यू सेंटर विकसित किया जाएगा। यह परियोजना अपने आप में अनोखी होगी, क्योंकि एक ही परिसर में देशी और विदेशी वन्यजीवों को देखने का अवसर मिलेगा।

डे-नाइट सफारी

इस प्रस्तावित केंद्र का सबसे बड़ा आकर्षण डे-नाइट सफारी होगा। इससे पर्यटक दिन और रात—दोनों समय—वन्य जीवों को उनके प्राकृतिक आवास जैसे वातावरण में देख सकेंगे।

इको-टूरिज्म पार्क भी

इसके साथ ही पहले से विकसित 50 हेक्टेयर का इको-टूरिज्म पार्क भी इस परियोजना में शामिल किया जाएगा। इससे पूरे क्षेत्र को एक फॉरेस्ट टूरिज्म कॉरिडोर के रूप में विकसित करना संभव होगा।

2026 में शुरू होगा फेज-1 का निर्माण कार्य

बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि परियोजना के फेज-1 का निर्माण कार्य वर्ष 2026 में शुरू किया जाए। परियोजना पूरी होने के बाद उज्जैन केवल धार्मिक पर्यटन का केंद्र नहीं रहेगा, बल्कि वन और वन्यजीव पर्यटन का भी एक बड़ा हब बनकर उभरेगा।

पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

विशेषज्ञों के अनुसार, इस वाइल्डलाइफ सेंटर के शुरू होने से पर्यटन को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही वन्यजीव संरक्षण, रेस्क्यू और पुनर्वास को भी मजबूती मिलेगी तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। परियोजना पूरी होने के बाद उज्जैन को मध्य प्रदेश में एक प्रमुख फॉरेस्ट टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में नई और विशिष्ट पहचान मिलेगी।

उज्जैन बनेगा देश का वाइल्डलाइफ सेंटर

उज्जैन में प्रस्तावित यह केंद्र राज्य की सबसे महत्वाकांक्षी फॉरेस्ट-टूरिज्म परियोजनाओं में से एक होगा। लगभग 500 हेक्टेयर में बनने वाला यह केंद्र केवल एक चिड़ियाघर नहीं होगा, बल्कि वाइल्डलाइफ सेंटर – इंडियन ज़ू – रेस्क्यू व रिहैबिलिटेशन सेंटर भी होगा। यहां घायल, बीमार या तस्करी से बचाए गए वन्यजीवों के इलाज, संरक्षण और पुनर्वास की सुविधाएं होंगी। साथ ही पर्यटकों को नियंत्रित लेकिन प्राकृतिक वातावरण में वन्यजीव देखने का अनुभव मिलेगा।

यहां यह खास

डे-नाइट सफारी का अनुभव, एक ही परिसर में देशी और विदेशी वन्यजीव, पहले से विकसित 50 हेक्टेयर इको-टूरिज्म पार्क का समावेश, आधुनिक डिजाइन, प्राकृतिक आवास आधारित एनक्लोजर, वन्यजीवों के रेस्क्यू, उपचार और पुनर्वास की समर्पित सुविधा, वन शिक्षा, अनुसंधान और प्रकृति जागरूकता को बढ़ावा दिया जाएगा और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और पर्यटन आधारित अवसर होंगे। 

जबलपुर सेंटर इसलिए महत्वपूर्ण

उज्जैन के साथ-साथ जबलपुर में भी एक वाइल्डलाइफ सेंटर और रेस्क्यू सेंटर विकसित किया जा रहा है। जबलपुर केंद्र महाकौशल और विंध्य क्षेत्रों के लिए रेस्क्यू हब का काम करेगा और जंगल से सटे इलाकों में घायल मिले वन्यजीवों को तत्काल उपचार प्रदान करेगा। इससे मानव–वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में कमी आने में मदद मिलेगी।

फॉरेस्ट व वन्यजीव संरक्षण

कुल मिलाकर, उज्जैन और जबलपुर दोनों केंद्र मिलकर मध्य प्रदेश को फॉरेस्ट टूरिज्म और वन्यजीव संरक्षण के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक मॉडल बना सकते हैं। कहा जा सकता है कि महाकाल की नगरी उज्जैन अब केवल आस्था ही नहीं, बल्कि जंगल, सफारी और संरक्षण का भी नया गंतव्य बनने की ओर बढ़ रही है।

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