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MP में छात्र चुनाव बहाली की राह साफ

नौ साल बाद लौटेंगे छात्र संघ चुनाव, NSUI ने प्रत्यक्ष मतदान की उठाई मांग

मध्य प्रदेश में छात्र संघ चुनाव को लेकर हाईकोर्ट के निर्देश के बाद सियासत तेज हो गई है। NSUI ने चुनावों में प्रत्यक्ष मतदान की मांग की है।

नौ साल बाद लौटेंगे छात्र संघ चुनाव nsui ने प्रत्यक्ष मतदान की उठाई मांग

MP Student Union Election (ANI) |

भोपाल: राष्ट्रीय छात्र संघ (NSUI) ने मंगलवार को मध्य प्रदेश में छात्र संघ चुनाव प्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली से कराने की मांग की, क्योंकि उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को सितंबर में चुनाव कराने का निर्देश दिया है। भोपाल में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष आशुतोष चौकसे ने कहा कि संगठन लगभग नौ वर्षों से लंबित छात्र संघ चुनावों की बहाली के लिए लगातार संघर्ष कर रहा है। 

NSUI की याचिका पर हाईकोर्ट का बड़ा आदेश

उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय ने 2024 में एनएसयूआई के प्रदेश सचिव अदनान अंसारी द्वारा दायर जनहित याचिका (पीआईएल) की सुनवाई करते हुए ये निर्देश जारी किए। चौकसे ने कहा, लगभग नौ साल बाद उच्च न्यायालय ने एनएसयूआई के एक साथी द्वारा दायर जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए सरकार को मध्य प्रदेश में छात्र संघ चुनाव सितंबर के पहले सप्ताह में कराने का निर्देश दिया है। एनएसयूआई कई वर्षों से विरोध प्रदर्शनों, जन अभियानों और अंततः अदालत के माध्यम से प्रत्यक्ष छात्र संघ चुनावों की मांग कर रहा है। अब सरकार को इसे लागू करना होगा।

भाजपा सरकार पर चुनाव टालने का आरोप

एनएसयूआई नेता ने आरोप लगाया कि 2017 में हुए छात्र संघ चुनाव महज औपचारिकता थे। उनमें वास्तविक लोकतांत्रिक प्रक्रिया का कोई प्रतिबिंब नहीं था। उन्होंने कहा, छात्र संघ चुनाव लाखों छात्रों को कॉलेज परिसरों में लोकतंत्र और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के बारे में सिखाते हैं। मध्य प्रदेश के कई नेता, जिनमें मुख्यमंत्री मोहन यादव, पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और कई अन्य शामिल हैं, छात्र राजनीति से उभरे हैं। हमें समझ नहीं आता कि भाजपा सरकार सीधे छात्र संघ चुनाव क्यों नहीं कराना चाहती।

मांग पूरी न होने पर आंदोलन की चेतावनी

चौकसे ने राज्य सरकार से सीधे मतदान प्रणाली के माध्यम से चुनाव कराने का आग्रह किया और चेतावनी दी कि अगर उनकी मांग नहीं मानी गई तो एनएसयूआई राज्यव्यापी आंदोलन शुरू करेगी। एनएसयूआई के राज्य सचिव अदनान अंसारी ने कहा कि छात्र संघ चुनावों को लेकर कानूनी लड़ाई चल रही थी। उन्होंने उच्च न्यायालय के फैसले को राज्य भर के छात्रों की जीत बताया। अंसारी ने कहा, जनहित याचिका पर उच्च न्यायालय का फैसला न केवल एनएसयूआई की जीत है, बल्कि मध्य प्रदेश के लाखों छात्रों की जीत है। 

छात्र संघ चुनाव बहाली की मांग तेज

राज्य के छात्र 2017 से अपने लोकतांत्रिक अधिकारों से वंचित थे। मध्य प्रदेश में छात्र संघ के अंतिम चुनाव 2017 में हुए थे और तब से हर साल छात्रों से छात्र संघ शुल्क वसूला जाता रहा है, लेकिन उन्हें उनके अधिकारों से वंचित रखा गया है। उन्होंने आगे कहा कि उन्होंने देरी के संबंध में पहले उच्च शिक्षा विभाग और विश्वविद्यालयों से जानकारी मांगी थी, लेकिन कोई जवाब न मिलने पर उन्होंने 2024 में जनहित याचिका के माध्यम से उच्च न्यायालय का रुख किया।

छात्र प्रतिनिधित्व की मांग पर मिला न्यायिक आदेश

अंसारी ने कहा, मैंने अदालत को बताया कि हर साल छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है, क्योंकि उनसे छात्र संघ शुल्क तो लिया जा रहा है, लेकिन उन्हें उनका उचित प्रतिनिधित्व नहीं दिया जा रहा है। अदालत ने राज्य सरकार से जवाब मांगा, जिसने शैक्षणिक कैलेंडर में चुनाव का प्रावधान तो किया, लेकिन चुनाव नहीं करवाए। सरकार द्वारा अंततः 2026-27 का शैक्षणिक कैलेंडर अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए जाने के बाद उच्च न्यायालय ने उसे कैलेंडर के अनुसार, सितंबर में छात्र संघ चुनाव कराने और छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों को बहाल करने का निर्देश दिया।

उच्च शिक्षा मंत्री ने दिए निर्देशों पर प्रतिक्रिया

इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि सरकार उच्च न्यायालय के निर्देशों की जांच कर रही है और जल्द ही निर्णय लेगी। परमार ने कहा, अदालत ने कुछ निर्देश जारी किए हैं। हमारा विभाग उनकी जांच कर रहा है। हमने मुख्यमंत्री से इस मामले पर चर्चा की है और जल्द ही निर्णय लिया जाएगा। हम अदालत के निर्देशों का पूरी तरह से पालन करेंगे। 3 अगस्त को उच्च न्यायालय ने मध्य प्रदेश सरकार को राज्य भर के सभी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में छात्र निकाय चुनाव कराने का निर्देश दिया था। 

(इनपुट: ANI)

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