महादेव बेटिंग ऐप के को-प्रमोटर रवि उप्पल को दुबई में गिरफ्तार किया गया है। यह गिरफ्तारी सौरभ चंद्राकर के ओमान से प्रत्यर्पण के कुछ दिनों बाद हुई है।
नई दिल्ली: महादेव बेटिंग ऐप के को-प्रमोटर रवि उप्पल को दुबई में गिरफ्तार किया गया है। यह गिरफ्तारी सौरभ चंद्राकर के ओमान से प्रत्यर्पण के कुछ दिनों बाद हुई है। भारतीय अधिकारियों ने अब रवि उप्पल को भारत लाने के लिए प्रत्यर्पण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। चंद्राकर, जो कथित तौर पर इस मामले में भी आरोपी है, को ओमान में गिरफ्तार किया गया था। प्रत्यर्पण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसे भारत वापस लाया गया। उसके खिलाफ इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस जारी होने के बाद रॉयल ओमान पुलिस ने उसे हिरासत में लिया था। इसके बाद ओमान में विशेष रूप से भेजी गई CBI की एक टीम उसे भारत लेकर आई।
12 नवंबर तक पुलिस हिरासत में भेजा गया चंद्राकर
इससे पहले बुधवार को चंद्राकर को 12 नवंबर तक 8 दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया था। साथ ही आरोपी को जांच के लिए दिल्ली ले जाने की भी अनुमति दी गई थी। छत्तीसगढ़ के रायपुर की एक विशेष अदालत ने चंद्राकर की पुलिस हिरासत मंजूर की थी। इससे पहले दिन में, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) चंद्राकर को अदालत में पेश करने से पहले मेडिकल जांच के लिए अपने कार्यालय से बाहर ले गई थी। मंगलवार को CBI दिल्ली की एक अदालत से 2 दिनों की ट्रांजिट रिमांड हासिल करने के बाद चंद्राकर को नई दिल्ली से रायपुर लेकर पहुंची थी।
दो मामलों में वांछित है सौरभ चंद्राकर
CBI के मुताबिक, चंद्राकर 2 मामलों में वांछित है, जिनमें पहले ही चार्जशीट दाखिल की जा चुकी हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी उसके खिलाफ एक अलग मामले में अभियोजन शिकायत दाखिल की है। महादेव ऑनलाइन बुक मामलों की CBI जांच छत्तीसगढ़ सरकार के अनुरोध पर शुरू की गई थी। एजेंसी ने इस प्लेटफॉर्म को देश के सबसे बड़े अवैध ऑनलाइन बेटिंग सिंडिकेट में से एक बताया है, जो भारत के बाहर से संचालित होता था। CBI के मुताबिक, इस सिंडिकेट ने कथित तौर पर पूरे भारत में फ्रेंचाइजी पैनल और शाखाओं के नेटवर्क के जरिए क्रिकेट, फुटबॉल, कार्ड गेम और अन्य आयोजनों पर सट्टेबाजी की सुविधा दी। इसके जरिए यूजर्स को जोड़ा जाता था और उनसे दांव की रकम जमा कराई जाती थी।
म्यूल बैंक खातों और हवाला के जरिए विदेश भेजी गई रकम
CBI की जांच के मुताबिक, कथित अवैध सट्टेबाजी से होने वाली कमाई को कई म्यूल बैंक खातों के जरिए भेजा गया। इसके बाद कई लेनदेन के माध्यम से रकम की परतें बनाई गईं और हवाला चैनलों के जरिए विदेश ट्रांसफर किया गया। जांच एजेंसी का आरोप है कि इस कमाई का एक हिस्सा सरकारी कर्मचारियों को कथित तौर पर प्रोटेक्शन मनी देने के लिए इस्तेमाल किया गया, ताकि बेटिंग सिंडिकेट बिना किसी रुकावट के अपना काम जारी रख सके।
(ANI)
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