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आखिर कौन है महाराष्ट्र का असली मराठा मानुष... जिसने हिला डाली सरकार की.....

महाराष्ट्र में मराठा समाज के लिए आऱक्षण की मांग को लेकर अनशन पर बैठे मनोज जरांगे ने 6 दिन बाद अपना अनशन खत्म कर दिया है..वहीं अनशन खत्म करने से पहले दक्षिण मुंबई के आजाद मैदान  में प्रदेश सरकार की तरफ

आखिर कौन है महाराष्ट्र का असली मराठा मानुष जिसने हिला डाली सरकार की

राधाकृष्ण विरखे मनोज जरांगे का अनशन तुड़वाते हुए |

नकुल जैन, नोएडा


महाराष्ट्र में मराठा समाज के लिए आऱक्षण की मांग को लेकर अनशन पर बैठे मनोज जरांगे ने 6 दिन बाद अपना अनशन खत्म कर दिया है..वहीं अनशन खत्म करने से पहले दक्षिण मुंबई के आजाद मैदान  में प्रदेश सरकार की तरफ से कैबिनेट मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल को भेजा गया..जिन्होंने जरांगे की आठ में से 6 मांग को मानते हुए उनका अनशन खत्म करवाया..बता दें कि मनोज जरांगे इससे पहले भी कई बार मराठा समाज की आवाज उठा चुके हैं..वह 2023 में भी समाज की आवाज बनकर भूख हड़ताल पर बैठे थे..और इन्हें यहीं से पूरे प्रदेश में पहचान मिली थी....आईए अब जानते हैं कि मनोज जरांगे से जुड़े कुछ किस्से...

कौन है मनोज जरांगे ?
मनोज जरांगे का जन्म महाराष्ट्र के बीड़ जिले के मटोरी गांव में एक किसान परिवार में हुआ था...इन्होंने अपनी शिक्षा गांव से ही प्राप्त की..जिसके बाद यह जालना जिले के शाहगढ़ में आकर नौकरी करने लग गए.. जरांगे का समाज सेवा की तरफ रुझान नौकरी के दौरान ही हुआ..जिसके बाद यह कई बार लोगों की समस्याओं को उठाते हुए नजर आए...

कैसे मिली पहचान ?
  मनोज जरांगे यूं तो काफी सालों से समाज सेवा में लगे हुए हैं..लेकिन उन्हें पहचान साल 2023 में जालना जिले के सराटी गांव में चले भूख हड़ताल के आंदोलन से मिली..बता दें कि मराठा समाज के आरक्षण को लेकर इनकी क्रांति का आगाज इसी जगह से हुआ था..जहां पर शांतिपूर्वक तरीके से चल रहे इनके आंदोलन को पुलिस की तरफ से बर्बरता के साथ खदेड़ा गया था..वहीं इसको लेकर उस समय पुलिस प्रशासन और प्रदेश सरकार की जमकर आलोचना हुई थी..साथ ही जरांगे की पहचान प्रदेश ही नहीं ब्लकि पूरे देश में बन गई थी..

क्यों बैठ थे अनशन पर ?
मनोज जरांगे कई सालों से मराठा समाज की आवाज उठाते रहे हैं..साथ ही प्रदेश में मराठों के लिए आरक्षण की मांग भी काफी समय से कर रहे हैं,,जिसके चलते ही जरांगे मुंबई के आजाद मैदान में आरक्षण की मांग को लेकर अनिश्चित कालीन अनशन पर बैठे थे..बता दें कि उनकी तरफ से मांग की जा रही थी मराठवाड़ा और पश्चिम महाराष्ठ्र के मराठी लोगों को कुनबी समाज में शामिल किया जाए..और उन्हें उनके आधार पर ही आरक्षण दिया जाए..

सरकार ने मानी मांगे 
महाराष्ट्र सरकार से अपनी मांगो को मनाने के लिए भूख हड़ताल पर बैठ मनोज जरांगे को सफलता मिल गई है..वह 6 दिनों से लगातार बिना कुछ खाए आंदोलन कर रहे थे.. वहीं उनके आंदोलन के दौरान प्रदेश सरकार के खिलाफ मराठा समाज भी रोष प्रकट रहा था..साथ ही मराठा समाज की तरफ से  प्रदेश में जगह-जगह प्रदर्शन किया जा रहा था. वहीं  प्रदर्शन लगातार तूल पकड़ रहा था..जिसको लेकर प्रदेश सरकार ने भांपते हुए उनकी मांगो को मानने का फैसला लिया..और अपने प्रतिनिधी के रुप में कैबिनेट मंत्री राधाकृष्ण विरखे पाटिल को भेजकर उनकी मांगों को स्वीकार कर लिया..

इन मांगो को लेकर सरकार और जरांगे की सहमति बनी
मनोज जरांगे की हड़ताल खुलवाने पहुंचे राधाकृष्ण विरखे को अनशन खुलवाने के लिए काफी पसीना बहाना पड़ा..दरअसल विरखे ने जो आठ मांगे उनके सामने रखी थी..उसको लेकर प्रदेश सरकार के अंदर काफी कश्मश चल रही थी..हालांकि काफी मशक्कत के करने और राजनीतिक दांव पेंच लगाने के बाद विरखे ने उन्हें आखिर मना ही लिया..वहीं आपको बता दें कि जरांगे की आठ में से 6 मांगो पर प्रदेश सरकार ने मोहर लगा दी है..लेकिन  मराठा समाज के आरक्षण को पूरा करने में कागजी कार्रवाई का हवाला देते हुए थोड़ा समय लगने की बात भी कही है...प्रदेश सरकार ने मराठा समाज को कुनबी समाज के आधार पर आरक्षण देने के साथ साथ..आंदोलन में मारे गए लोगों के परिवार को आर्थिक सहायता और सरकारी नौकरी देने की मांग पर भी स्वीकृति दे दी है..साथ ही आदोंलन में भाग लेने वाले लोगों पर केस वापिस लेने पर भी सहमति जताई है..वहीं आरक्षण को लेकर हैदराबाद गजट के साथ सतारा और औंध गजट लागू करने का आश्वासन भी दिया है..