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बिहार में बड़े अपराधों में कमी

बिहार में बड़े अपराधों में कमी, हत्या 10.1 प्रतिशत और लूट 31.32 प्रतिशत घटी, नक्सल प्रभावित जिले शून्य

बिहार गृह विभाग के अनुसार राज्य में हत्या, लूट और दंगों के मामलों में कमी आई है। नक्सल प्रभावित जिले शून्य हुए हैं और आर्थिक व साइबर अपराधों पर कार्रवाई तेज हुई है।

बिहार में बड़े अपराधों में कमी हत्या 101 प्रतिशत और लूट 3132 प्रतिशत घटी नक्सल प्रभावित जिले शून्य

Major Crimes Decline in Bihar, Naxal-Affected Districts Fall to Zero |

पटना (बिहार)। बिहार गृह विभाग ने शुक्रवार को कानून-व्यवस्था को मजबूत करने और लोगों के लिए सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करने के सरकार के प्रयासों का ब्योरा देते हुए बताया कि राज्य में बड़े अपराधों में कमी आई है, नक्सल-प्रभावित जिले खत्म हो गए हैं और आर्थिक व साइबर अपराधों के खिलाफ कार्रवाई तेज हुई है।

हत्या, लूट और दंगों के मामलों में आई बड़ी गिरावट

विभाग ने यह जानकारी गृह विभाग के सचिव प्रणव कुमार और पुलिस महानिदेशक विनय कुमार की प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी। विभाग के अनुसार, पिछले साल की तुलना में बिहार में हत्या के मामलों में 10.1 प्रतिशत, लूट के मामलों में 31.32 प्रतिशत और दंगों से जुड़े मामलों में 18.97 प्रतिशत की कमी आई है।

सांप्रदायिक तनाव पर जीरो-टॉलरेंस नीति, त्वरित कार्रवाई का दावा

गृह विभाग ने कहा कि समय पर खुफिया जानकारी जुटाने और पुलिस की त्वरित कार्रवाई से सांप्रदायिक तनाव की घटनाओं को कम करने में भी मदद मिली है। विभाग ने कहा कि सरकार सांप्रदायिकता के प्रति 'जीरो-टॉलरेंस' (सख्त) नीति अपनाती है और ऐसी घटनाओं की जानकारी मिलने पर तुरंत कार्रवाई करती है।

सांप्रदायिक मामलों में 263 मुकदमों को अभियोजन की मंजूरी

वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान, सांप्रदायिक घटनाओं से जुड़े 263 मामलों में मुकदमा चलाने की मंजूरी दी गई और संबंधित जिलों को चार्जशीट दाखिल करने का निर्देश दिया गया। विभाग ने यह भी बताया कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 175(3) के तहत दर्ज मामलों में से 96.17 प्रतिशत मामलों में अदालती निर्देशों के अनुसार पुलिस थानों में FIR दर्ज की गई हैं।

बिहार में नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या अब शून्य

बिहार स्पेशल टास्क फोर्स ने नक्सली गतिविधियों और संगठित अपराध के खिलाफ अभियान जारी रखा है। गृह विभाग ने बताया कि राज्य में नक्सल-प्रभावित जिलों की संख्या 2013 में 22 थी, जो अब घटकर शून्य हो गई है। नक्सली गतिविधियों में कमी के बाद, केंद्र सरकार ने औरंगाबाद, गया, जमुई और लखीसराय को 'लिगेसी' और 'थ्रस्ट' जिलों के रूप में चिह्नित किया है।

अपराध नियंत्रण और आधुनिक पुलिसिंग पर गृह विभाग का फोकस

गृह विभाग ने कहा कि ये आँकड़े अपराध नियंत्रण, आधुनिक पुलिसिंग, खुफिया जानकारी जुटाने, संगठित और आर्थिक अपराधों के खिलाफ कार्रवाई और साइबर अपराध के बढ़ते खतरे से निपटने पर विभाग के फोकस को दर्शाते हैं। (Source: ANI)

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