माओवादी नेता आजाद उर्फ दाना केशव राव को मंगलवार को 15 साल से अधिक समय तक विचाराधीन कैदी के रूप में जेल में रहने के बाद रिहा कर दिया गया।
गजपति (ओडिशा)। माओवादी नेता आजाद उर्फ दाना केशव राव को मंगलवार को 15 साल से अधिक समय तक विचाराधीन कैदी के रूप में जेल में रहने के बाद रिहा कर दिया गया। ओडिशा और आंध्र प्रदेश में उनके खिलाफ दर्ज सभी 49 मामलों में उन्हें बरी कर दिया गया है। आजाद ने 15 साल, दो महीने और कुछ दिन हिरासत में बिताए थे, जिसके बाद एक विशेष अदालत ने उन्हें मामलों में निर्दोष पाया और बरी कर दिया।
2011 में किया था आत्मसमर्पण
आजाद के वकील स्वरूप कुमार पाल ने एएनआई को बताया कि आजाद ने 29 मई, 2011 को आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम पुलिस स्टेशन के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था। हालांकि, बाद में उन्हें ओडिशा पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। आंध्र प्रदेश और ओडिशा में उनके खिलाफ कुल 49 मामले लंबित थे। पाल ने कहा कि आंध्र पुलिस द्वारा 29 मई, 2011 को उन्हें कथित रूप से ओडिशा पुलिस को सौंपने के संबंध में भी एक मामला अदालत में चल रहा है। इस बीच, 15 साल, दो महीने और कुछ दिन जेल में बिताने के बाद उन्हें बरी कर दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद तेज हुई सुनवाई
ये मामले लंबे समय तक लंबित रहे, इस दौरान आजाद विचाराधीन कैदी के रूप में जेल में ही रहे। 21 जुलाई, 2025 को आजाद ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर लंबित मामलों के निपटारे के लिए निर्देश देने की मांग की। उनकी याचिका पर ध्यान देते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने ओडिशा और आंध्र प्रदेश सरकारों को विशेष अदालतों के माध्यम से एक वर्ष के भीतर उनके खिलाफ सभी मामलों का निपटारा करने का निर्देश दिया।
विशेष अदालत में 49 मामलों की सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद गजपति जिले के परलाखेमुंडी में एक विशेष अदालत का गठन किया गया। ओडिशा के गजपति, कंधमाल और रायगढ़ जिलों में दर्ज कुल 36 मामलों के साथ-साथ आंध्र प्रदेश के 12 मामलों को शीघ्र निपटारे के लिए सुनवाई के लिए लिया गया। पाल ने कहा कि इस दौरान आजाद ने तीन बार भूख हड़ताल भी की—एक बार 14 दिनों के लिए, एक बार 17 दिनों के लिए और एक बार 21 दिनों के लिए। उनके अनुसार, अभियोजन पक्ष ने तीन बार मामलों का शीघ्र निपटारा करने का आश्वासन दिया था, लेकिन मामले बंद नहीं हुए।
लक्ष्मणानंद सरस्वती हत्याकांड में भी बरी
आज़ाद माओवादी हिंसा से जुड़े कई मामलों से जुड़े थे, जिनमें लक्ष्मणानंद सरस्वती की हत्या का मामला भी शामिल था। हालांकि, पर्याप्त सबूतों के अभाव में उन्हें बरी कर दिया गया। वकील के अनुसार, आंध्र प्रदेश में 12 मामले, ओडिशा में 36 मामले और रायगढ़ा में POCSO अधिनियम के तहत एक मामला था। कुल 49 मामलों में आजाद को बरी किया गया है। आखिरी मामला 2008 की लक्ष्मणानंद सरस्वती से जुड़ी घटना से संबंधित था, जिसमें कथित तौर पर उनकी और चार अन्य लोगों की हत्या की गई थी और आजाद का नाम भी मामले में शामिल था।
15 साल जेल में बिताने पर जवाबदेही की मांग
उनके वकील ने कहा कि आजाद ने बिना मुकदमे के 15 साल से अधिक समय तक जेल में रहकर अपने जीवन के बहुमूल्य वर्ष खो दिए हैं और इस मामले की आगे जांच की जाएगी। वकील ने कहा कि आजाद को जेल से रिहा कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि आजाद ने अपनी युवावस्था में विचाराधीन कैदी के रूप में 15 साल और दो महीने जेल में बिताए और जिन लोगों की वजह से उन्हें इतने लंबे समय तक जेल में रहना पड़ा, उनकी जवाबदेही तय करने के लिए अदालत का रुख किया जाएगा।
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