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डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय

डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में मेधावी छात्रों को सम्मान

UP News : अदालत में कोई भी केस जीतने या लड़ने में वकीलों के लिए सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण न्याय मिलना होता है। अधिवक्ताओं को मुकदमे में पैरवी के दौरान हर कानूनी पहलू पर ध्यान देना चाहिए..

डॉ राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में मेधावी छात्रों को सम्मान

डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में मेधावी छात्रों को सम्मान |

UP News : अदालत में कोई भी केस जीतने या लड़ने में वकीलों के लिए सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण न्याय मिलना होता है। अधिवक्ताओं को मुकदमे में पैरवी के दौरान हर कानूनी पहलू पर ध्यान देना चाहिए, लेकिन आत्मविश्वास से बचना चाहिए। ये बात भारत के भावी मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के चौथे दीक्षांत समारोह में व्यक्त किये। विधि विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में मेधावी छात्रों को सम्मान दिया गया। सम्मान समारोह में 309 डिग्रियां और 21 पदक स्वर्ण, रजत, कांस्य व स्मृति पदक प्रदान किए गए। इनमें अलग अलग पाठ्यक्रमों की 24 पीएचडी डिग्रियां शामिल हैं। 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मौके पर उपाधि प्राप्त करने वाले युवाओं के लिए इसे गौरव का क्षण बताया। जस्टिस सूर्यकांत ने विधि छात्रों को संबोधित करते हूए अपने वकालत के समय का किस्सा सुनाते हुए कहा कि ओवर कॉन्फिडेंस में एक केस हार गया था। उसके बाद से नोट बुक रखने लगा। उन्होंने कहा कि केस जीतने से ज्यादा महत्वपूर्ण न्याय मिलना है।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने समारोह की अध्यक्षता करते हुए कहा कि पहले हमारे DJ के चैम्बर में AC नहीं था। आज ये लग्जरी नहीं, जरूरत का सामान है। जिससे जब बार को कभी गुस्सा आये तो AC के जरिए उनका गुस्सा शांत हो सके। जस्टिस सूर्यकांत ने नए विधि स्नातकों से कहा कि अपने काम के दौरान खुद से पूछे गए सवाल सबसे अधिक महत्वपूर्ण होते है। जैसे - आपकी तैयारी क्या ठीक थी ? क्या मैने बहस सही से की ? ये सवाल हमारी कमियों को दूर करते है।

उन्होंने विधि स्नातकों को अतिआत्मविश्वास से बचने की सलाह देते हुए कहा कि एक बार मैं खुद अतिआत्मविश्वास की वजह से एक केस हार गया था, उसके बाद से नोट बुक रखना शुरू की। समारोह में जस्टिस विक्रमनाथ ने छात्रों से कहा कि खूब मेहनत करिए, ईमानदारी से काम करिए और खुश रहिए ये तीन काम करेंगे तो जीवन में कामयाब रहेंगे। समारोह में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ और इलाहाबाद हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस अरुण कुमार भंसाली भी शामिल हुए।

इस मौके विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो अमरपाल सिंह, न्यायमूर्ति अरुण भंसाली, विधायक राजेश्वर सिंह, उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय समेत अन्य मौजूद रहे। दीक्षांत में बीए-एलएलबी ऑनर्स, एलएलएम वन ईयर, पीजीडीसीएल, पीजीडीआईपीआर जैसे पाठ्यक्रमों के मेधावियों को स्वर्ण, रजत और कांस्य सहित कुल 21 मेडल और 309 स्टूडेंट्स उपाधियां प्रदान की गयीं। स्वर्ण यति को प्रदीप कुमार अग्रवाल गोल्ड, मुस्कान शुक्ला को न्यायमूर्ति ओपी प्रधान मेमोरियल स्वर्ण, दर्शिका पांडेय को पद्मावती मोहनलाल स्वर्ण और वीरेंद्र भाटिया स्वर्ण, धीरज दिवाकर को एम्बिशन लॉ इंस्टीट्यूट गोल्ड, अभ्युदय प्रताप को केके लूथरा मेमोरियल एडवोकेसी गोल्ड मिला।

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