महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय ने पांच वर्षों में 12 से बढ़कर 53 रोजगारपरक पाठ्यक्रमों तक विस्तार किया है। शिक्षा, चिकित्सा और शोध के क्षेत्र में विश्वविद्यालय ने अलग पहचान बनाई है।
गोरखपुर (उत्तर प्रदेश)। महज पांच वर्षों के सफर में महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय गोरखपुर (एमजीयूजी) ने शिक्षा, चिकित्सा, शोध और रोजगारपरक पाठ्यक्रमों के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। वर्ष 2021 में 12 पाठ्यक्रमों से शुरू हुई विश्वविद्यालय की शैक्षिक यात्रा अब 53 विशिष्ट एवं रोजगारपरक पाठ्यक्रमों तक पहुंच चुकी है। एमबीबीएस और बीएएमएस से लेकर नर्सिंग, पैरामेडिकल, कृषि, फार्मेसी, प्रबंधन और शोध तक के पाठ्यक्रमों के साथ विश्वविद्यालय पूर्वी उत्तर प्रदेश में उच्च एवं रोजगारपरक शिक्षा का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है। स्थापना की पांचवीं वर्षगांठ के मौके पर शुक्रवार को आयोजित समारोह में विश्वविद्यालय की इस उपलब्धिपूर्ण यात्रा और भविष्य की योजनाओं पर भी चर्चा होगी।
पांच साल में शिक्षा के प्रमुख केंद्र के रूप में उभरा एमजीयूजी
28 अगस्त 2021 को तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा लोकार्पित महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय पांच वर्षों में शिक्षा के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित हुआ है। विश्वविद्यालय भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण के साथ राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप रोजगारपरक पाठ्यक्रमों पर जोर दे रहा है। कुलाधिपति योगी आदित्यनाथ की मंशा वर्ष 2032 तक गोरखपुर को 'नॉलेज सिटी' के रूप में विकसित करने की है। गौरतलब है कि 2018 में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के शताब्दी वर्ष 2032 तक गोरखपुर को नॉलेज सिटी बनाने का आह्वान किया था।
रोजगारपरक शिक्षा और नवाचार पर जोर, 53 पाठ्यक्रमों से संवर रहा भविष्य
एमजीयूजी के कुलसचिव डॉ. प्रदीप कुमार राव के अनुसार, विश्वविद्यालय की नींव महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज और महंत अवेद्यनाथ जी महाराज के शिक्षा के जरिए स्वावलंबन और सामाजिक विकास के विचारों पर आधारित है। कुलाधिपति योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में विश्वविद्यालय भारतीय ज्ञान परंपरा के साथ रोजगारपरक शिक्षा को बढ़ावा दे रहा है। यहां एमबीबीएस, बीएएमएस, नर्सिंग, पैरामेडिकल, कृषि, फार्मेसी, प्रबंधन, बीसीए-एमसीए समेत डिप्लोमा, स्नातक, परास्नातक और पीएचडी स्तर के चार दर्जन से अधिक पाठ्यक्रम संचालित हैं। आने वाले समय में नवाचार आधारित नए पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे। एमजीयूजी देश का पहला विश्वविद्यालय है, जहां छात्र संसद का चुनाव स्वनिर्मित सॉफ्टवेयर के जरिए ऑनलाइन कराया जा रहा है।
बीएएमएस और एमबीबीएस के विद्यार्थियों को मिली विशेष उपलब्धि
एमजीयूजी के बीएएमएस और एमबीबीएस के विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय स्तर पर विशेष उपलब्धि हासिल कर पूरे प्रदेश का मान बढ़ाया है। बीएएमएस के विद्यार्थियों को प्रति वर्ष औसतन पांच विशिष्ट अनुसंधान के लिए चयनित किया जा रहा है, तो एमबीबीएस के दो विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर के शोध अनुसंधान के लिए चयनित किया गया है। निजी विश्वविद्यालय के रूप में ऐसी उपलब्धि हासिल करने वाला एमजीयूजी राज्य का पहला विश्वविद्यालय है।
शोध, नवाचार व स्टार्टअप को बढ़ावा देने वाले एमओयू
शिक्षा और चिकित्सा में शोध, नवाचार व स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए एमजीयूजी ने देश-विदेश के कई प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ एमओयू किए हैं। इनमें अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (ईरी), लुम्बिनी बौद्ध विश्वविद्यालय नेपाल, एम्स गोरखपुर, केजीएमयू लखनऊ, आरएमआरसी गोरखपुर, गोरखपुर विश्वविद्यालय, राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान, भारतीय बीज विज्ञान संस्थान और लॉजिस्टिक सेक्टर स्किल काउंसिल समेत कई संस्थान शामिल हैं।
अत्याधुनिक और आयुर्वेद, दोनों पद्धतियों से उत्कृष्ट चिकित्सा का केंद्र
एमजीयूजी शिक्षा के साथ ही परिसर में संचालित अस्पतालों के जरिये काफी किफायती दर पर मॉडर्न मेडिसिन और आयुर्वेद, दोनों की उत्कृष्ट चिकित्सा का केंद्र भी बन गया है। इसके मेडिकल कॉलेज से संबद्ध अस्पताल में जटिल कैंसर तक की सर्जरी का सफलतापूर्वक इलाज हो रहा है। यहां पूर्वी उत्तर प्रदेश के अलावा देश के अन्य राज्यों से भी मरीज इलाज कराने आ रहे हैं। इसी तरह आयुर्वेद अस्पताल में भी उच्च स्तरीय इलाज की सुविधा है। आयुर्वेद अस्पताल के विश्व स्तरीय 11 कॉटेज वाले पंचकर्म केंद्र ने कम समय में ही विश्वसनीय उपचार की ख्याति अर्जित की है। यहां कई दुर्लभ बीमारियों का सफल इलाज हो चुका है।
पांच साल में हुआ दो राष्ट्रपति का आगमन
एमजीयूजी निजी क्षेत्र का संभवतः प्रदेश का पहला विश्वविद्यालय है, जहां पांच साल के दौरान दो बार राष्ट्रपति का आगमन हुआ। 28 अगस्त, 2021 को तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद इसका लोकार्पण करने आए थे। जबकि एक जुलाई 2025 को वर्तमान राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु यहां अकादमिक भवन, ऑडिटोरियम और पंचकर्म चिकित्सा केंद्र का लोकार्पण करने आईं थीं।
पांचवां स्थापना दिवस समारोह शुक्रवार को
महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय गोरखपुर में आगामी 28 अगस्त (शुक्रवार) को पांचवां स्थापना समारोह मनाया जाएगा। दोपहर बाद 3 बजे से होने वाले समारोह में मुख्यमंत्री एवं इस विश्वविद्यालय के कुलाधिपति योगी आदित्यनाथ अपने आशीर्वचन से विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करेंगे।
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