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मंत्री ने आश्वासन नहीं दिया,

मंत्री ने आश्वासन नहीं दिया, किसानों ने कलेक्टर की गाड़ी रोकी

MP News : निवाड़ी। यहां जमीन विवाद गहराया तो किसानों ने प्रभारी मंत्री की गाड़ी रोक दी।

मंत्री ने आश्वासन नहीं दिया किसानों ने कलेक्टर की गाड़ी रोकी

मंत्री ने आश्वासन नहीं दिया |

MP News : निवाड़ी। यहां जमीन विवाद गहराया तो किसानों ने प्रभारी मंत्री की गाड़ी रोक दी। ज्ञापन सौंपने के बाद किसान मंत्री के पैर में गिर पड़े। और जब कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला तो उत्तेजित हो गये। इसके बाद उन्होंने कलेक्टर की गाड़ी रोक ली। हालात बिगड़ गये तो सुरक्षाकर्मी ने किसानों को हाथ जोड़कर विनती करनी पड़ी। 

घटना शनिवार शाम की है। ओरछा तहसील के मौजा गुदरई के किसान अपनी जमीन के सीमांकन औऱ कब्जे के विवाद को लेकर कलेक्टर के कार्यालय में पहुंचे थे। उस समय प्रभारी मंत्री नारायण कुशवाहा गढ़कुंढार महोत्सव की समीक्षा के लिए कलेक्टर कार्यालय पहुंचे थे। इसी दौरान बड़ी संख्या में किसान -वहां पहुंच गये। किसानों ने प्रभारी मंत्री से समस्य़ा बताई औऱ मंत्री के पैरो में गिर पड़े। लेकिन मंत्री ने कोई स्पष्ट आश्वासन नहीं दिया तो किसान नाराज हो गये।

किसानों की नाराजगी इस कदर बढ़ गई कि पहले उन्होंने प्रभारी मंत्री की गाड़ी रोकने की कोशिश की। इसके बाद किसानों के झुंड ने कलेक्टर की गाड़ी रोक ली और नारे लगाने लगे। वे कलेक्टर मुर्दाबाद, प्रशासन हाय-हाय..के नारे लगाने लगे। भीड़ में महिलाएं और पुरुषों की मौजूदगी के कारण माहौल तनावपूर्ण हो गया।स्थिति बिगड़ी तो प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा। कलेक्टर की सुरक्षा में तैनात सुरक्षाकर्मी और अधिकारियों ने किसानों को समझाने का प्रयास किया। कुछ देर शोर-शराबा होता रहा।

करीब आधे घंटे बाद स्थिति पर काबू पाया जा सका। किसानों ने आरोप लगाया कि पूरे मामले में भूमाफिया सक्रिय हैं औऱ प्रशासन उनके संरक्षण में काम कर रहा है। ग्रामीणों ने कहा, अब तक 50 से अधिक आवेदन दे चुके हैं। पर सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि 2009 के आधार पर किसान की अपनी जमीन सीमांकन में फंसा हुआ है। किसानों का कहना है कि प्रशासन ने जो सीमांकन किया है वह गलत है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके हक की जमीन से उन्हें बेदखल किया जा रहा है। 

मालूम हो कि गुदरई गांव का भूमि विवाद सीमांकन में उलझ गया है। किसान 2009 में हुई सीमांकऩ के आधार पर जमीन पर अपना कब्जा चाहते हैं। कलेक्टर ने मामले के समाधान के लिए पांच सदस्यों की एक समिति बना कर सीमांकन करवाया था। इस नए सीमांकन से किसान पूरी तरह असंतुष्ठ हैं और उसे गलत बता रहे हैं। 

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