मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में बीना विधायक निर्मला सप्रे के खिलाफ दायर दलबदल मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है।
जबलपुर (एमपी)। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में बीना विधायक निर्मला सप्रे के खिलाफ दायर दलबदल मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने सवाल उठाया कि जब दलबदल के मामलों को निपटाने के लिए 90 दिनों की समय-सीमा तय है, तो 720 दिन बीत जाने के बाद भी यह मामला अब तक क्यों नहीं सुलझा है? मामले की सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस संजीव कुमार सचदेवा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार दलबदल से जुड़ी शिकायतों का निराकरण 90 दिनों के भीतर हो जाना चाहिए।
स्पीकर कर रहे हैं मामले की जांच
महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने कोर्ट को बताया कि वर्तमान में विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) इस मामले की सुनवाई कर रहे हैं और साक्ष्यों की जांच की प्रक्रिया जारी है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की ओर से पैरवी कर रहे वकील विभोर खंडेलवाल ने मांग की कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का पालन सुनिश्चित किया जाए और विधायक की सदस्यता के संबंध में तत्काल निर्णय लिया जाए।
क्या है मामला
निर्मला सप्रे ने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीता था, लेकिन बाद में वे भाजपा में शामिल हो गई थीं। उनके खिलाफ दलबदल कानून के तहत सदस्यता समाप्त करने की याचिका लगाई गई है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि इस तरह के संवैधानिक मामलों में देरी लोकतंत्र की प्रक्रिया के लिए सही नहीं है। विधानसभा सचिवालय को इस पर जल्द जवाब पेश करने और निराकरण करने के निर्देश दिए गए हैं।
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