कलकत्ता उच्च न्यायालय ने नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को नंदीग्राम और खेजुरी में दर्ज छह मामलों में अंतरिम जमानत दे दी है।
कोलकाता | कलकत्ता उच्च न्यायालय ने नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को नंदीग्राम और खेजुरी में दर्ज छह मामलों में अंतरिम जमानत दे दी है। अदालत की ओर से दी गई राहत के बाद प्रधान को चुनाव प्रचार में हिस्सा लेने का रास्ता साफ हुआ है। रिपोर्टों के मुताबिक, अंतरिम जमानत कुछ शर्तों के साथ दी गई है।
19 साल पुराने मामलों को लेकर अदालत में दलील
प्रधान के वकील ने इन मामलों में जमानत के लिए हाई कोर्ट का रुख किया था। बचाव पक्ष की ओर से दलील दी गई कि इनमें से एक मामला करीब 19 साल पुराना है और 2007 के नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन से जुड़ा है। वहीं, राज्य सरकार की ओर से जमानत याचिका का विरोध किया गया। रिपोर्टों के अनुसार, इन पुराने मामलों में हत्या और हत्या के प्रयास समेत अन्य गंभीर आरोपों का उल्लेख किया गया है।
वकील ने कार्रवाई पर उठाए सवाल
प्रधान के अधिवक्ता अशफाक अहमद ने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ पुराने मामलों में कार्रवाई का उद्देश्य उन्हें नंदीग्राम उपचुनाव में प्रचार से रोकना था। उन्होंने यह भी दावा किया कि आंदोलन से जुड़े अन्य लोगों के खिलाफ भी मामले दर्ज थे और कार्रवाई के समय को लेकर सवाल उठते हैं। ये राजनीतिक आरोप कांग्रेस की ओर से लगाए गए हैं; इन आरोपों को अदालत द्वारा सिद्ध तथ्य के रूप में नहीं माना जा सकता।
कांग्रेस ने फैसले को बताया राहत
पश्चिम बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने अंतरिम जमानत के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे पार्टी के लिए राहत बताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस उम्मीदवार के खिलाफ हुई कार्रवाई को लेकर पार्टी ने कानूनी लड़ाई लड़ी है। उन्होंने यह भी दावा किया कि मिलन प्रधान को चुनाव लड़ने से रोकने की कोशिश की गई। यह कांग्रेस की ओर से किया गया राजनीतिक आरोप है।
पत्नी ने भी किया था प्रचार
मिलन प्रधान के जेल में रहने के दौरान उनकी पत्नी अर्पिता प्रधान ने कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ नंदीग्राम में उनके समर्थन में प्रचार किया था। उन्होंने मतदाताओं से अपने पति के पक्ष में समर्थन की अपील की थी। अर्पिता प्रधान ने दावा किया था कि मिलन प्रधान कॉलेज के दिनों से कांग्रेस से जुड़े रहे हैं और नंदीग्राम के भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन में सक्रिय थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि उन्हें चुनाव लड़ने से रोकने के लिए पुराने मामलों में कार्रवाई की गई।
नंदीग्राम उपचुनाव से पहले फैसला
मिलन प्रधान की अंतरिम जमानत का फैसला नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव से पहले आया है। हाई कोर्ट में उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत के सामने उनके चुनाव लड़ने और प्रचार करने से जुड़े कानूनी पहलू भी आए थे। अदालत ने अब छह मामलों में उन्हें अंतरिम राहत दी है। आगे उन्हें अदालत की ओर से तय शर्तों का पालन करना होगा।
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