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प्रकृति की 'सफाईकर्मी' मादा लकड़बग्घा तोड़ रही...

प्रकृति की 'सफाईकर्मी' मादा लकड़बग्घा तोड़ रही है दशकों पुरानी मिथक

भोपाल। अक्सर खूंखार और डरावना माने जाने वाले लकड़बग्घे के प्रति समाज के नजरिए को बदलने का काम...

प्रकृति की सफाईकर्मी मादा लकड़बग्घा तोड़ रही है दशकों पुरानी मिथक

प्रकृति की 'सफाईकर्मी' मादा लकड़बग्घा तोड़ रही है दशकों पुरानी मिथक |

भोपाल। अक्सर खूंखार और डरावना माने जाने वाले लकड़बग्घे के प्रति समाज के नजरिए को बदलने का काम कर रही है भोपाल के वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में रहने वाली मादा लकड़बग्घा 'सुंदरी'। सुंदरी आज न केवल पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है, बल्कि वह लकड़बग्घों से जुड़े सदियों पुराने मिथकों को भी तोड़ रही है।

​मादा हायना की चर्चा

वन विहार में रहने वाली मादा हायना 'सुंदरी' अपनी दिलचस्प गतिविधियों के कारण चर्चा में है। लकड़बग्घे केवल शिकारी नहीं, बल्कि प्रकृति के 'सफाईकर्मी' हैं, जो पर्यावरण को स्वच्छ रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। सुंदरी की कहानी लोगों को यह समझने में मदद कर रही है कि ये जानवर उतने खतरनाक नहीं हैं जितना उन्हें लोककथाओं में पेश किया जाता है।

प्रकृति का 'सफाईकर्मी'

​लकड़बग्घों को अक्सर 'स्कैवेंजर्स' (मरे हुए जानवरों को खाने वाले) के रूप में जाना जाता है। वे जंगल में सड़ते हुए अवशेषों को खाकर बीमारियों को फैलने से रोकते हैं। इस प्रकार, वे पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) के संतुलन को बनाए रखने में एक अहम भूमिका निभाते हैं।

वन विहार की 'सुंदरी'

​सुंदरी के जीवन से जुड़ी कई बातें भले ही अभी अज्ञात हों, लेकिन वन विहार के प्रबंधन का कहना है कि उसकी उपस्थिति ने पर्यटकों के मन से डर को कम किया है। लोग अब उसे केवल एक हिंसक जानवर के रूप में नहीं, बल्कि प्रकृति के एक महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देख रहे हैं। वह (सुंदरी) पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है। उसका जीवन यह साबित करता है कि प्रकृति में हर जीव का अपना एक विशिष्ट और महत्वपूर्ण स्थान है।

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