एनसीएलटी ने सुभाष चंद्रा के दिवाला मामले में सीबीआई को नोटिस जारी किया है और उनकी संपत्तियों के हस्तांतरण पर लगी रोक अंतिम फैसले तक जारी रहेगी।
नयी दिल्ली: राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) ने बुधवार को एस्सेल समूह के चेयरमैन सुभाष चंद्रा के व्यक्तिगत दिवाला मामले में सीबीआई को नोटिस जारी करने के साथ ही कहा कि उनकी संपत्तियों के हस्तांतरण पर लगाई गई अंतरिम रोक मामले के अंतिम निपटारे तक जारी रहेगी।
सीबीआई को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश
चंद्रा के व्यक्तिगत दिवाला मामले की सुनवाई कर रही एनसीएलटी की पांच-सदस्यीय पीठ को जानकारी दी गई कि एक कर्जदाता ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के पास शिकायत दर्ज कराई है और एजेंसी उसकी जांच कर रही है जो अभी शुरुआती चरण में है। अध्यक्ष ए एस ग्रेवाल की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि सीबीआई की इस जांच का मौजूदा मामले पर असर पड़ सकता है लिहाजा जांच एजेंसी को नोटिस जारी करना उचित है। पीठ ने सीबीआई को चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने को कहा।
संपत्तियों के हस्तांतरण पर रोक जारी रहेगी
इसके साथ ही पीठ ने स्पष्ट किया कि एक सितंबर, 2026 को जारी अंतरिम निर्देश मामले के अंतिम निपटारे तक जारी रहेंगे। इन निर्देशों के तहत चंद्रा को अपनी संपत्तियां हस्तांतरित करने से रोक दिया गया है। चंद्रा के वकील ने सीबीआई को नोटिस जारी किए जाने का विरोध करते हुए कहा कि वह मौजूदा कार्यवाही में आवश्यक पक्षकार नहीं है। उन्होंने एनसीएलटी द्वारा पांच सदस्यीय पीठ बनाए जाने पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि न्यायाधिकरण कोई अपीलीय अदालत नहीं है। पीठ ने कर्जदाताओं समेत मामले में शामिल पक्षों को अगली सुनवाई से पहले सुविधाजनक दस्तावेज-संकलन दाखिल करने को कहा।
1,322 करोड़ रुपये से अधिक के नुकसान का आरोप
सीबीआई ने चंद्रा के खिलाफ कथित तौर पर अपनी संपत्ति को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (एलआईसीएचएफएल) से ऋण लेने और बाद में उसमें चूक करने के मामले में प्राथमिकी दर्ज की है। इससे कंपनी को 1,322 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान होने का आरोप है।
6.5 करोड़ रुपये की पुनर्भुगतान योजना का विरोध
एलआईसीएचएफएल समेत कुछ कर्जदाताओं ने चंद्रा की व्यक्तिगत दिवाला कार्यवाही में 6.5 करोड़ रुपये की पुनर्भुगतान योजना का एनसीएलटी में विरोध किया था। इस योजना के तहत चंद्रा की व्यक्तिगत संपत्ति से करीब 22,006 करोड़ रुपये के दावों के मुकाबले करीब 6.5 करोड़ रुपये की वसूली प्रस्तावित है। इससे पहले बुधवार को चंद्रा ने एनसीएलटी की पांच सदस्यीय पीठ के आदेश को राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) में चुनौती दी। उन्होंने पांच-सदस्यीय पीठ के गठन पर भी सवाल उठाया है।
दो सदस्यीय पीठ ने दिया था विभाजित फैसला
इस मामले में एनसीएलटी की दो-सदस्यीय पीठ ने पहले विभाजित फैसला दिया था। इसके बाद कंपनी कानून की धारा 419(5) के तहत मतभेद के बिंदुओं पर निर्णय के लिए मामला तीसरे सदस्य नीलेश शर्मा के पास भेजा गया था। शर्मा ने प्रमुख मुद्दों पर भारद्वाज से सहमति जताते हुए चंद्रा की पुनर्भुगतान योजना को बरकरार रखा था। हालांकि बाद में एनसीएलटी की पांच-सदस्यीय पीठ ने शर्मा के आदेश पर रोक लगा दी और आगे की कार्यवाही लंबित रहने तक चंद्रा को अपनी संपत्तियां हस्तांतरित करने से भी रोक दिया था।
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