चित्रकूट में झाड़ियों के बीच कपड़े में लिपटा लावारिस नवजात मिला। चींटियों और कीड़ों से घिरे मासूम को पुलिस ने समय रहते बचाया।
चित्रकूट {मध्य प्रदेश}। इंसानियत को शर्मसार करने वाली और दिल को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। चित्रकूट के अक्षय वाटिका के पास बीती मध्य रात्रि घने अंधेरे में झाड़ियों के बीच कपड़े में लिपटा एक लावारिस नवजात शिशु तड़पता और रोता हुआ मिला। मासूम को कंटीली झाड़ियों के बीच छोड़ दिया गया था। चींटियों और कीड़े-मकोड़ों के बीच दबे होने के कारण उसकी हालत बेहद गंभीर हो गई थी।
चींटियों के बीच तड़प रहा था मासूम
बताया गया कि नवजात को झाड़ियों में इस तरह छोड़ा गया था कि उसकी जान पर गंभीर संकट मंडरा रहा था। ठंड और कीड़े-मकोड़ों के बीच बच्चा लगातार रो रहा था। घटना की सूचना मिलते ही डायल 112 की टीम तत्काल हरकत में आई और मौके के लिए रवाना हुई।
पुलिसकर्मियों ने बचाई मासूम की जान
एएसआई योगेंद्र मिश्रा, आरक्षक अजय देवरे और पायलट वीरेंद्र पाल बिना किसी देरी के घटनास्थल पर पहुंचे। पुलिसकर्मियों ने सावधानी से झाड़ियों को हटाया और कांपते-रोते नवजात को अपनी गोद में उठा लिया। पुलिस टीम ने बच्चे को सुरक्षित निकालकर तत्काल अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की।
अस्पताल में मिला तुरंत उपचार
मासूम को लेकर पुलिस टीम मझगवां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) पहुंची। वहां बीएमओ डॉ. रूपेश सोनी ने बच्चे का प्राथमिक उपचार किया। उपचार के बाद उसकी हालत में सुधार बताया गया और बच्चा सुरक्षित है। बेहतर देखरेख और कानूनी औपचारिकताओं के लिए नवजात को 108 एंबुलेंस से सतना जिला अस्पताल भेजा गया है।
पुलिस की तत्परता की हो रही सराहना
कड़ाके की रात में जहां किसी ने इस मासूम को झाड़ियों में छोड़कर उसकी जान खतरे में डाल दी, वहीं डायल 112 की टीम की त्वरित कार्रवाई ने उसकी जिंदगी बचा ली। घटना के बाद पुलिसकर्मियों की संवेदनशीलता और तत्परता की क्षेत्र में सराहना हो रही है। लोगों का कहना है कि समय पर पुलिस टीम के पहुंचने से मासूम को नई जिंदगी मिली।
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