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शासकीय अधिवक्ताओं ने मुख्यमंत्री का जताया आभार

UP में 50% से अधिक बढ़ी शासकीय अधिवक्ताओं की रिटेनरशिप और बहस फीस, अधिवक्ताओं ने फैसले को ऐतिहासिक बताया

उत्तर प्रदेश सरकार ने शासकीय अधिवक्ताओं की वर्षों से लंबित मांग पूरी करते हुए उनके मानदेय और बहस फीस में बढ़ोतरी कर दी है। अधिवक्ता समुदाय ने स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति हार्द

up में 50 से अधिक बढ़ी शासकीय अधिवक्ताओं की रिटेनरशिप और बहस फीस अधिवक्ताओं ने फैसले को ऐतिहासिक बताया

लखनऊ:  उत्तर प्रदेश सरकार ने शासकीय अधिवक्ताओं की वर्षों से लंबित मांग पूरी करते हुए उनके मानदेय और बहस फीस में बढ़ोतरी कर दी है।  प्रदेश के न्यायालयों में राज्य सरकार की ओर से पैरवी करने वाले शासकीय अधिवक्ताओं की रिटेनरशिप एवं बहस फीस में 50% से अधिक वृद्धि की गई है। सरकार के निर्णय का अधिवक्ता समुदाय ने स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति हार्दिक आभार जताया है। राज्य के महाधिवक्ता और उनकी पूरी  टीम ने सरकार के फैसले को ऐतिहासिक बताया है। 

रिटेनरशिप एवं बहस फीस में कितनी वृद्धि

शासकीय अधिवक्ताओं को अब 9,000 के बजाय 14,000 रुपये प्रतिमाह रिटेनर फीस मिलेगा। हर कार्यदिवस में बहस के लिए मिलने वाली फीस 1650 रुपये से बढ़ा कर 2500 रुपये की गई है। अपर जिला शासकीय अधिवक्ता की आबंधन फीस 7200 से बढ़कर 11 हजार रुपये की गई है। उनकी बहस फीस भी 1500 से बढ़ा कर 2300 रुपये कर दी गई है। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता की आबंधन फीस 6300 से बढ़ा कर दस हजार रुपये की गई है।

अधिवक्ता समुदाय की पूरी हुई लंबित अपेक्षा

अधिवक्ताओं ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने न्यायालयों में राज्य के हितों की प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करने की जरूरत को समझते हुए पहल की और अब उनके नेतृत्व में प्रदेश मंत्रिमंडल ने रिटेनरशिप एवं बहस फीस में ऐतिहासिक वृद्धि का फैसला लेकर अधिवक्ता समुदाय की लंबे समय से चली आ रही अपेक्षा को पूरा किया है। यह निर्णय केवल फीस वृद्धि का विषय नहीं है, बल्कि न्यायिक व्यवस्था को अधिक सक्षम, उत्तरदायी और परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे न्यायालयों में राज्य सरकार के मामलों की गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध पैरवी को और बल मिलेगा।

न्याय मित्रों से लेकर सुप्रीम कोर्ट में पैरवी करनेवाले अधिवक्ताओं को लाभ

अधिवक्ताओं ने कहा कि जनपद न्यायालयों में कार्यरत जिला शासकीय अधिवक्ता, अपर जिला शासकीय अधिवक्ता, सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता, उप जिला शासकीय अधिवक्ता, नामित अधिवक्ता, विशेष अधिवक्ता एवं न्याय मित्रों से लेकर उच्च न्यायालय इलाहाबाद, लखनऊ खंडपीठ तथा उच्चतम न्यायालय में राज्य का पक्ष रखने वाले महाधिवक्ता, अपर महाधिवक्ता, मुख्य स्थायी अधिवक्ता, स्थायी अधिवक्ता, शासकीय अधिवक्ता, ब्रीफ होल्डर, एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड तथा विभिन्न श्रेणी के पैनल अधिवक्ताओं तक इस फैसले का लाभ पहुंचेगा।

दशक के बाद फीस में किया गया संशोधन

बदलते न्यायिक परिदृश्य, मुकदमों की बढ़ती संख्या, जटिल विधिक विषयों और अधिवक्ताओं की बढ़ी जिम्मेदारियों को देखते हुए पारिश्रमिक संरचना के पुनरीक्षण की लंबे समय से जरूरत महसूस की जा रही थी। विशेष रूप से जिला न्यायालयों के अधिवक्ताओं की फीस में करीब 10 वर्ष और महाधिवक्ता स्तर पर करीब 14 वर्ष बाद संशोधन किया जाना प्रदेश सरकार की संवेदनशीलता और दूरदर्शिता का परिणाम है।

अधिवक्ताओं का बढ़ेगा मनोबल

अधिवक्ताओं ने कहा कि मुख्यमंत्री ने पुनरीक्षण की अवधारणा को स्वीकार करते हुए रिटेनरशिप एवं प्रति सुनवाई फीस में 50 प्रतिशत तक की वृद्धि का निर्णय लिया है। इससे अधिवक्ताओं का मनोबल बढ़ेगा। राज्य के महत्वपूर्ण मामलों की पैरवी और अधिक प्रभावी होगी तथा न्यायालयों में शासन का पक्ष पूरी मजबूती के साथ प्रस्तुत किया जा सकेगा। सभी संबंधित अधिवक्ताओं ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार ने अधिवक्ताओं के योगदान का सम्मान करते हुए न्यायिक प्रणाली को सशक्त बनाने का कार्य किया है। यह निर्णय राज्य हितों की रक्षा, सुशासन की मजबूती तथा न्याय के प्रभावी क्रियान्वयन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का परिचायक है।

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