आरजी कर मेडिकल कॉलेज की घटना को लेकर लोगों में अब भी आक्रोश है। अभया की मां रत्ना देवनाथ पानीहाटी से भाजपा उम्मीदवार बनकर चुनाव जीत गई हैं।
कोलकाता। कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज अस्पताल की जूनियर डॉक्टर अभया (बदला हुआ नाम) के साथ बलात्कार और उसके बाद हत्या की घटना को उत्तर 24 परगना जिले के तहत पानीहाटी के लोग अभी तक नहीं भूल पाए हैं और वे भी चाहते हैं कि उसे न्याय मिले। यह कहना है अभया की मां रत्ना देवनाथ का। वे पानीहाटी विधानसभा सीट से जीत गई हैं। भाजपा ने उन्हें अपना उम्मीदवार बनाया था।
न्याय की लड़ाई ने दिलाई पहचान
राजनीति से हमेशा दूर रही रत्ना देवनाथ ने केवल अपनी पुत्री को न्याय दिलाने के लिए चुनाव मैदान में उतरने का फैसला किया। उन्होंने अमित शाह के प्रस्ताव को स्वीकार किया और राजनीति में कदम रखा। चुनाव में जीतने के बाद जहां आमतौर पर उम्मीदवारों के चेहरे पर खुशी दिखाई देती है, वहीं रत्ना देवनाथ के चेहरे पर वह भाव नहीं है। बातचीत के दौरान उनकी आंखें नम हो जाती हैं। वे खुद कहती हैं कि उन्हें समझ नहीं आता कि वे कैसे राजनीति से जुड़ गईं।
तीसरी सूची में मिला टिकट
भाजपा ने अपनी तीसरी सूची में रत्ना देवनाथ को पानीहाटी से उम्मीदवार बनाया था। उनके नाम की घोषणा से पहले टीएमसी ने तीर्थंकर घोष और सीपीएम ने तरुण तुर्की को उम्मीदवार घोषित कर दिया था। आरजी कर आंदोलन में अहम भूमिका निभाने वाले कलतान दासगुप्त भी चुनाव मैदान में थे। इसके बावजूद रत्ना देवनाथ को इस बात की चिंता नहीं थी कि उनके खिलाफ कौन उम्मीदवार है।
प्रचार के दौरान झेला विरोध
जब वे घर-घर जाकर समर्थन मांग रही थीं, तब उन्हें कई जगह विरोध का सामना करना पड़ा। टीएमसी और अन्य दलों के समर्थकों ने उन्हें रोका और दुर्व्यवहार भी किया। रत्ना देवनाथ ने किसी की आलोचना नहीं की। उन्होंने हर दरवाजे पर सिर्फ अपनी बेटी को न्याय दिलाने की अपील की। चुनाव जीतने के बाद उन्हें यह महसूस हुआ कि उनकी बेटी को लोग अभी भी नहीं भूले हैं। वे इस जीत को अपनी नहीं, बल्कि अपनी बेटी की जीत मानती हैं।
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