कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने गुरुवार को अमेरिकी वीजा प्रतिबंधों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा।
Pawan Khera Targets Modi Over US Visa Restrictions, Says Trump Is ‘Threatening’ Him |
नई दिल्ली [भारत]: कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने गुरुवार को अमेरिकी वीजा प्रतिबंधों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिकी सरकार के फैसलों से भारतीय पेशेवरों के लिए मुश्किलें बढ़ रही हैं, लेकिन प्रधानमंत्री अमेरिका के सामने कड़ा रुख अपनाने के बजाय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव में हैं।
H-1B वीजा फीस और PERM कार्यक्रम पर उठाए सवाल
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में पवन खेड़ा ने कहा कि H-1B वीजा की ऊंची फीस के कारण अमेरिकी कंपनियां भारतीय पेशेवरों को नौकरी पर रखने से पहले दो बार सोच रही हैं। वहीं, प्रमुख भारतीय आईटी कंपनियों के लिए स्थायी श्रम प्रमाणन (PERM) कार्यक्रम के तहत नए आवेदन दाखिल करने पर अस्थायी रोक से भारतीय कर्मचारियों को अमेरिका में स्थायी निवास दिलाने की प्रक्रिया और कठिन हो गई है। खेड़ा ने कहा, "H-1B वीजा की अत्यधिक फीस के कारण अमेरिकी कंपनियां भारतीय पेशेवरों को नौकरी पर रखने से पहले दो बार सोच रही हैं। अब, प्रमुख भारतीय आईटी कंपनियों के लिए PERM कार्यक्रम को निलंबित करके, ट्रंप प्रशासन ने अमेरिका में काम कर रही भारतीय कंपनियों के लिए भारतीय पेशेवरों को स्थायी निवास के लिए प्रायोजित करना और भी कठिन बना दिया है।"
राहुल गांधी की सलाह का किया जिक्र
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी को कई बार अमेरिका के साथ बातचीत में मजबूती से अपना पक्ष रखने की सलाह दी है। खेड़ा ने कहा, "श्री राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री को बार-बार सलाह दी है कि अमेरिका से बातचीत करते समय वे अपने रुख पर अडिग रहें और ऐसा व्यवहार करें जैसे उनका सीना वाकई 56 इंच का हो।" प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए उन्होंने आगे कहा, "लेकिन मोदी जी राहुल गांधी की बात सुनने के बजाय अपने दोस्त डोला और ट्रंप से दबना पसंद करेंगे।"
नैसकॉम ने कहा- आव्रजन और कुशल प्रतिभा की आवाजाही अलग मुद्दे
अमेरिकी सरकार द्वारा कई प्रमुख प्रौद्योगिकी कंपनियों को PERM कार्यक्रम के तहत नए आवेदन दाखिल करने से अस्थायी रूप से निलंबित किए जाने के बाद नेशनल एसोसिएशन ऑफ सॉफ्टवेयर एंड सर्विस कंपनीज (नैसकॉम) ने प्रतिक्रिया दी। नैसकॉम ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि आव्रजन और कुशल प्रतिभा की आवाजाही दो अलग-अलग मुद्दे हैं और इन्हें एक ही नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। बयान में कहा गया, "अमेरिकी श्रम विभाग ने आज अमेरिका में कार्यरत भारतीय प्रौद्योगिकी कंपनियों सहित कुछ आईटी कंपनियों को स्थायी श्रम प्रमाणन (पीईआरएम) कार्यक्रम के तहत नए आवेदन दाखिल करने से अस्थायी रूप से निलंबित करने की घोषणा की है। हालांकि यह निर्णय एक विशिष्ट आव्रजन मार्ग को प्रभावित करता है, नैसकॉम ने लगातार यह स्पष्ट किया है कि आव्रजन और कुशल प्रतिभा की गतिशीलता दो अलग-अलग मुद्दे हैं और इन्हें एक ही नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।"
भारतीय आईटी कंपनियों ने H-1B वीजा पर निर्भरता घटाई
नैसकॉम के अनुसार, H-1B वीजा कार्यक्रम ने अमेरिका में अल्पकालिक कौशल की कमी दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हालांकि, पिछले कई वर्षों में भारतीय प्रौद्योगिकी कंपनियों ने इस वीजा पर अपनी निर्भरता कम की है और अमेरिका में स्थानीय स्तर पर भर्ती बढ़ाकर अपना कार्यबल मजबूत किया है। बयान में कहा गया, "एच-1बी वीजा कार्यक्रम ने ऐतिहासिक रूप से अमेरिका में अल्पकालिक कौशल अंतर को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और इसका उपयोग अल्पकालिक प्रतिभा अंतर को दूर करने के लिए जारी रहेगा। हालांकि, पिछले कई वर्षों में, भारतीय प्रौद्योगिकी कंपनियों ने एच-1बी वीजा पर अपनी निर्भरता काफी कम कर दी है, जबकि स्थानीय स्तर पर भर्ती में लगातार विस्तार किया है और अमेरिका में एक मजबूत घरेलू कार्यबल का निर्माण किया है।" नैसकॉम ने यह भी कहा कि भारतीय आईटी कंपनियां अमेरिका की अधिकांश फॉर्च्यून 500 कंपनियों के साथ काम करती हैं। इससे अमेरिकी कंपनियों को नवाचार और कारोबार बढ़ाने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजित करने में मदद मिलती है। उद्योग संगठन के मुताबिक, H-1B वीजा से स्थायी निवास की प्रक्रिया में जाने वाले कर्मचारियों की संख्या अपेक्षाकृत सीमित है। भारतीय प्रौद्योगिकी कंपनियां 80 से अधिक देशों में काम कर रही हैं और स्थानीय कानूनों तथा नियामकीय आवश्यकताओं का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
माइक्रोसॉफ्ट ने अमेरिकी कार्यबल पर जताया भरोसा
PERM कार्यक्रम से निलंबित किए जाने के बाद माइक्रोसॉफ्ट ने ट्रंप प्रशासन की आव्रजन नीति पर प्रतिक्रिया दी। कंपनी ने कहा कि उसे अमेरिकी कार्यबल की ताकत और प्रतिभा पर भरोसा है। माइक्रोसॉफ्ट के अनुसार, नए कर्मचारियों के लिए उसके पास H-1B वीजा के जो आवेदन शेष हैं, वे ऐसे लोगों से संबंधित हैं, जो पहले से ही कानूनी रूप से अमेरिका में मौजूद हैं और जिन्होंने कंपनी में शामिल होने का विकल्प चुना है। कंपनी ने कहा, "वे हमारे देश में नए नहीं आए हैं।" माइक्रोसॉफ्ट ने यह भी कहा कि ये कर्मचारी उसके अमेरिकी कार्यबल का केवल एक प्रतिशत हैं।
कॉग्निजेंट, इंफोसिस और विप्रो समेत कई कंपनियां निलंबित
इससे पहले, अमेरिकी श्रम सचिव कीथ सोंडरलिंग ने घोषणा की थी कि सरकार दुनिया की कई बड़ी आईटी आउटसोर्सिंग कंपनियों को PERM कार्यक्रम से निलंबित कर रही है। इनमें कॉग्निजेंट, इंफोसिस, टाटा, विप्रो, एचसीएल और कैपजेमिनी शामिल हैं। अमेरिकी श्रम विभाग ने इस कार्रवाई के पीछे कई सक्रिय संघीय जांचों का हवाला दिया। इसके अलावा, प्रौद्योगिकी क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों माइक्रोसॉफ्ट और एडोब को भी कार्यक्रम से निलंबित किया गया। श्रम सचिव ने कहा कि विभाग इन कंपनियों से संबंधित नए आवेदन स्वीकार नहीं करेगा और न ही लंबित स्थायी श्रम प्रमाणन आवेदनों पर कार्रवाई करेगा। उन्होंने कहा, "हम इन कंपनियों से संबंधित कोई भी नया आवेदन स्वीकार नहीं करेंगे और न ही किसी लंबित स्थायी श्रम प्रमाणन आवेदन पर कार्रवाई करेंगे।"
अमेरिकी श्रमिकों की नौकरियां प्रभावित होने का दावा
सोंडरलिंग ने दावा किया कि संबंधित कंपनियों ने सामूहिक रूप से बड़ी संख्या में विदेशी कर्मचारियों की मांग की और हजारों H-1B वीजा अनुमोदन तथा स्थायी श्रम प्रमाण पत्र हासिल किए। उन्होंने कहा, "2009 से, अकेले इन कंपनियों ने लगभग 30 लाख विदेशी श्रमिकों की मांग की है। उन्हें 230,000 से अधिक एच-1बी वीजा अनुमोदन और 100,000 से अधिक स्थायी श्रम प्रमाण पत्र प्राप्त हुए हैं, यानी सैकड़ों-हजारों नौकरियां अमेरिकी श्रमिकों से छीन ली गईं।"
विदेशी छात्रों के लिए भी सख्ती के संकेत
यह घोषणा अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग द्वारा वैकल्पिक व्यावहारिक प्रशिक्षण (ओपीटी) कार्यक्रम में भाग लेने के इच्छुक एफ-1 वीजा धारक विदेशी छात्रों के लिए नए शुल्क प्रस्तावित किए जाने के बाद आई है। अमेरिकी प्रशासन ने इन कदमों को घरेलू श्रमिकों की सुरक्षा और आव्रजन व्यवस्था की अखंडता मजबूत करने का प्रयास बताया है।
(एएनआई)
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