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गरीबों के इलाज का सपना टूटा

गरीबों के इलाज का सपना अधूरा! आरोग्य मंदिर बने शोपीस, मरीज लौट रहे मायूस

बुरहानपुर शहर में गरीबों को घर के नजदीक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्वीकृत किए गए मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक एवं आयुष्मान आरोग्य मंदिर अब खुद इलाज के इंतजार में नजर आ रहे हैं।

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मध्यप्रदेश: बुरहानपुर शहर में गरीबों को घर के नजदीक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्वीकृत किए गए मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक एवं आयुष्मान आरोग्य मंदिर अब खुद इलाज के इंतजार में नजर आ रहे हैं। शहर में स्वीकृत 10 आरोग्य मंदिरों में से कई भवन बनकर तैयार हैं, लेकिन डॉक्टर और स्टाफ के अभाव में ताले लटके हुए हैं। वहीं जिलेभर में 96 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की स्थिति भी चिंताजनक बताई जा रही है। आखिर करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए इन केंद्रों का लाभ जनता को क्यों नहीं मिल रहा? देखिए हमारी विशेष रिपोर्ट।

10 केंद्रों में कई अब भी बंद

बुरहानपुर शहर के काली फाटक, नेहरू नगर, महाजनापेठ, गुलाबगंज, सीलमपुरा, मालीवाड़ा, मोमिनपुरा, बेरी बाजार, आलमगंज और प्रगति नगर क्षेत्र में मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक एवं आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्वीकृत किए गए थे। इनमें से आठ भवनों का निर्माण पूरा हो चुका है, एक भवन निर्माणाधीन है जबकि एक केंद्र के लिए अब तक भूमि उपलब्ध नहीं हो सकी है।

ताले देखकर लौट रहे मरीज

जब हमारी टीम प्रगति नगर स्थित आरोग्य मंदिर पहुंची तो मुख्य गेट पर ताला लटका मिला। वहीं मालीवाड़ा क्षेत्र में भी भवन दो वर्ष पूर्व तैयार हो चुका है, लेकिन यहां नियमित रूप से न डॉक्टर पहुंचते हैं और न ही स्टाफ। क्षेत्रवासी इलाज के लिए आते हैं, लेकिन बंद दरवाजे देखकर वापस लौटने को मजबूर हो जाते हैं।

रखरखाव के अभाव में बिगड़ रही हालत

स्थिति यह है कि कई केंद्रों के दरवाजे और अन्य संसाधन भी रखरखाव के अभाव में क्षतिग्रस्त होने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद व्यवस्थाओं में कोई सुधार नहीं हुआ। स्थानीय जनप्रतिनिधियों का कहना है कि अधिकारियों द्वारा बार-बार जल्द संचालन शुरू करने का आश्वासन दिया जाता है, लेकिन वर्षों बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।

कांग्रेस ने उठाए सवाल

इस मुद्दे पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अजय रघुवंशी ने सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि भवन निर्माण पर तो ध्यान दिया गया, लेकिन डॉक्टर और स्टाफ की नियुक्ति नहीं की गई। उन्होंने सुझाव दिया कि जिले में संचालित आयुर्वेद एवं यूनानी चिकित्सा महाविद्यालयों के चिकित्सकों की सेवाएं लेकर इन केंद्रों को संचालित किया जा सकता है।

सीएमएचओ ने दिया स्पष्टीकरण

उधर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेंद्र वर्मा ने बताया कि शहर में स्वीकृत 10 आरोग्य मंदिरों में से एक निर्माणाधीन है तथा एक के लिए भूमि उपलब्ध नहीं हो पाई है। उन्होंने भ्रष्टाचार के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि प्रत्येक केंद्र लगभग 25 लाख रुपये की लागत से स्थापित किया गया है और विभाग स्तर पर आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।

96 केंद्रों की स्थिति चिंताजनक

बुरहानपुर जिले में कुल 96 मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक एवं आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्वीकृत हैं। सरकार का उद्देश्य प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को लोगों के घर तक पहुंचाना था, लेकिन कई स्थानों पर केंद्र नियमित रूप से संचालित नहीं हो रहे हैं। ऐसे में ग्रामीण और शहरी गरीबों को समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल

स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी का असर जिले में समय-समय पर सामने आने वाली घटनाओं में भी देखने को मिला है। हाल ही में मांडवा क्षेत्र में जंगल के बीच एक महिला के प्रसव की घटना ने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। अब बड़ा सवाल यह है कि जब भवन बनकर तैयार हैं तो फिर डॉक्टर और स्टाफ की नियुक्ति कब होगी? और जनता को उन सुविधाओं का लाभ कब मिलेगा जिनके लिए करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं।

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