कर्नाटक में SIR-2026 मतदाता सूची संशोधन को लेकर विरोध तेज। अभिनेता प्रकाश राज ने चुनाव आयोग की चयन प्रक्रिया, जवाबदेही और वोटर लिस्ट से नाम हटाने के तरीके पर सवाल उठाए। पढ़ें पूरी खबर।
बेंगलुरु (कर्नाटक)। कर्नाटक में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR)-2026 को लेकर विरोध तेज हो गया है। अभिनेता और सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश राज नागरिक समाज संगठनों के साथ बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में आयोजित 'इलेक्शन कमीशन चलो' विरोध मार्च में शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने SIR की प्रक्रिया में कथित खामियों पर सवाल उठाते हुए इसे लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं।
प्रकाश राज ने प्रदर्शन में लोगों से बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्टर साझा करते हुए इसे हर नागरिक की गरिमा से जोड़ते हुए लिखा, "हर नागरिक की गरिमा के लिए कृपया इस विरोध प्रदर्शन में आएं और शामिल हों।" प्रकाश राज ने
चुनाव आयोग की चयन प्रक्रिया पर उठाए सवाल
प्रकाश राज ने मीडिया से बातचीत में चुनाव आयोग के गठन की प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "SIR शुरू होने से पहले ही चुनाव आयोग के चयन की प्रक्रिया लोकतांत्रिक नहीं थी। इसमें सत्तारूढ़ दल के दो सदस्य और विपक्ष का केवल एक सदस्य है, तो इसमें लोकतंत्र कहां है?"
उन्होंने चुनाव आयोग को दी गई न्यायिक सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े किए। प्रकाश राज ने कहा, "इसके अलावा, सरकार ने संसद में चुनाव आयोग को न्यायिक प्रतिरक्षा देने का फैसला किया, जिससे यह सुनिश्चित हो गया कि किसी अधिकारी के खिलाफ उसके पूरे जीवन में कोई मामला दर्ज नहीं किया जा सकता। लोकतांत्रिक व्यवस्था में आम तौर पर न्यायिक प्रतिरक्षा सुप्रीम कोर्ट के जजों तक सीमित होती है। इसे पूरी संस्था तक क्यों बढ़ाया गया?"
प्रकाश राज के मुताबिक, ऐसी व्यवस्था से जवाबदेही का सवाल पैदा होता है। उन्होंने कहा, "इससे ऐसी स्थिति बनती है जहां उन्हें लगता है कि वे कुछ भी कर सकते हैं और उन्हें जवाबदेह नहीं ठहराया जाएगा।"
'वोटर कब तक अदालतों के चक्कर लगाएगा?'
SIR की प्रक्रिया की समयसीमा पर भी प्रकाश राज ने सवाल उठाया। उन्होंने कहा, "इस देश का एक मतदाता, एक नागरिक, आखिर कितने वर्षों तक अदालतों के चक्कर लगाता रहेगा? आप देश के हर मतदाता को इतनी परेशानी से क्यों गुजार रहे हैं?" उन्होंने खास तौर पर कर्नाटक का संदर्भ देते हुए कहा कि राज्य में अभी चुनाव में दो साल बाकी हैं। प्रकाश राज ने सवाल किया, "कर्नाटक में अभी दो साल बाकी हैं, यह कोई तत्काल स्थिति नहीं है। इसे केवल एक महीने में करने की क्या जरूरत थी?"
'Absent' और 'Shifted' वोटरों के नाम हटाने पर आपत्ति
प्रकाश राज ने उन मतदाताओं के नाम हटाए जाने के तरीके पर भी सवाल उठाया, जिन्हें अनुपस्थित (Absent) या स्थायी रूप से स्थानांतरित (Permanently Shifted) के रूप में चिह्नित किया गया है। उनका तर्क है कि ऐसे मतदाताओं को पहले अपनी पात्रता साबित करने का उचित अवसर दिया जाना चाहिए। उन्हें सीधे दोबारा पंजीकरण के लिए Form 6 भरने को कहना उचित प्रक्रिया नहीं है।
SIR-2026 के बाद जारी हुआ कर्नाटक का ड्राफ्ट वोटर रोल
यह विरोध प्रदर्शन ऐसे समय में हो रहा है जब कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के कार्यालय ने SIR-2026 की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित कर दी है। SIR के तहत राज्य में 30 जून से 17 अगस्त 2026 तक घर-घर जाकर मतदाता सत्यापन किया गया। यह प्रक्रिया बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) के माध्यम से पूरी की गई।
CEO कार्यालय के मुताबिक, ड्राफ्ट मतदाता सूची में कुल 4,46,35,975 मतदाता शामिल हैं। इनमें 2,24,73,864 महिला मतदाता, 2,21,59,240 पुरुष मतदाता और 2,871 थर्ड-जेंडर मतदाता हैं। इसके अलावा सूची में 44,176 सर्विस वोटर और 18-19 वर्ष आयु वर्ग के 3,70,341 युवा मतदाता भी शामिल हैं।
1.07 करोड़ से ज्यादा प्रविष्टियां ASDDO श्रेणी में
मतदाता सूची के सत्यापन के दौरान कुल 1,07,96,339 प्रविष्टियों की पहचान ASDDO श्रेणियों के तहत की गई। ये कुल प्रविष्टियों का 19.48 प्रतिशत हैं। ASDDO में Absent, Shifted, Dead, Duplicate और Others यानी अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत, दोहराव वाली और अन्य प्रविष्टियां शामिल हैं।
वहीं, करीब 4.46 करोड़ मतदाताओं को सक्रिय मतदाता आधार में बरकरार रखा गया है। हालांकि, इसी समूह में 20.35 लाख मतदाताओं को विसंगतियों (Anomalies) के लिए चिह्नित किया गया है। इसके अलावा 23.45 लाख मतदाताओं को NoMapping श्रेणी में रखा गया है। यानी इन दोनों श्रेणियों को मिलाकर 43.8 लाख से अधिक मतदाता ऐसे हैं जिनकी पात्रता को लेकर आगे की प्रक्रिया की जाएगी।
43.8 लाख से ज्यादा मतदाताओं को नोटिस
CEO कार्यालय के अनुसार, Anomalies और NoMapping श्रेणियों में शामिल इन दोनों समूहों के मतदाताओं को नोटिस जारी किए जाएंगे। उन्हें अपनी पात्रता की पुष्टि के लिए जवाब देना होगा। इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पात्र मतदाताओं के नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल रहें। इसके साथ ही अंतिम सूची तैयार करने से पहले आपत्तियों और दावों पर विचार किया जाएगा। SIR-2026 के लिए 1 अक्टूबर 2026 को qualifying date निर्धारित की गई है।
23 सितंबर तक दावे और आपत्तियां
ड्राफ्ट मतदाता सूची के खिलाफ 24 अगस्त से 23 सितंबर 2026 तक दावे और आपत्तियां दाखिल की जा सकती हैं। इस अवधि के बाद प्रक्रिया पूरी करके 27 अक्टूबर 2026 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। CEO कार्यालय ने नागरिकों से अपील की है कि वे ड्राफ्ट मतदाता सूची में अपने नाम और अन्य विवरणों की जांच करें। यदि किसी तरह की गलती, नाम हटने या पात्रता से जुड़ी समस्या है तो निर्धारित अवधि के भीतर दावा या आपत्ति दाखिल करें।
कर्नाटक में SIR को लेकर चल रहा विरोध इसी प्रक्रिया के राजनीतिक और प्रशासनिक प्रभावों को लेकर बढ़ती चिंता को सामने ला रहा है। एक ओर निर्वाचन अधिकारी इसे मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाने की कवायद के रूप में आगे बढ़ा रहे हैं, वहीं प्रदर्शनकारी प्रक्रिया में पारदर्शिता, जवाबदेही और पात्र मतदाताओं के अधिकारों को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
(भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)
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