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शिवपुरी में 'पिछोर बचाओ' का किया गया आह्वान

शिवपुरी में लोधी समाज के नाम पर आयोजित कार्यक्रम को लेकर खड़े हुए सवाल

पिछोर में भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था के मुद्दों पर 8 सितंबर को जनाक्रोश रैली प्रस्तावित है। रैली से पहले गांव में नेताओं और युवाओं के बीच विवाद से भाजपा की कथित गुटबाजी और आयोजन को लेकर सवाल उठे।

शिवपुरी में लोधी समाज के नाम पर आयोजित कार्यक्रम को लेकर खड़े हुए सवाल

शिवपुरी में 'पिछोर बचाओ' का किया गया आह्वान |

शिवपुरी: पिछोर विधानसभा की सियासत में इन दिनों एक नया मोड़ देखने को मिल रहा है। भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी, अवैध शराब, लूटपाट और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों को लेकर 8 सितंबर को पिछोर बस स्टैंड पर जनाक्रोश रैली का ऐलान किया गया है। खास बात यह है कि रैली का नेतृत्व भाजपा से जुड़े जिला पंचायत उपाध्यक्ष अमित पडरया और जिला पंचायत सदस्य मनीराम लोधी कर रहे हैं।

'पिछोर बचाओ' का किया आह्वान

रैली को लेकर जारी किए गए पम्पलेट में 'पिछोर बचाओ' का आह्वान किया गया है। इसमें शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, रैली शुरू होने से पहले ही इसके आयोजन को लेकर विवाद सामने आ गया है। गुरुवार को जब अमित पडरया और मनीराम लोधी गांव-गांव पहुंचकर रैली का निमंत्रण दे रहे थे, तभी मनगुली गांव के बाहर कुछ युवाओं ने उनके काफिले को रोक लिया। 

युवाओं ने 'समस्त लोधी समाज' लिखे जाने पर जताई आपत्ति

युवाओं ने पेंपलेट में 'समस्त लोधी समाज' लिखे जाने पर आपत्ति जताई। वीडियो में एक युवक दोनों नेताओं से सवाल करता दिखाई दे रहा है कि जब पूरे समाज के नाम से कार्यक्रम किया जा रहा है तो इसके लिए सभी की सहमति क्यों नहीं ली गई। युवक ने नेताओं से यह भी सवाल किया कि 'समस्त लोधी समाज' लिखने वाले आप कौन हैं?

"30 साल से कहां थे"

इसी दौरान युवक ने मनीराम लोधी से सवाल करते हुए पूछा कि "30 साल से कहां थे?" युवक का यह सवाल पिछोर की लंबे समय तक चली पूर्व राजनीतिक व्यवस्था की ओर इशारा करता नजर आया। मौके पर नेताओं और युवाओं के बीच तीखी बहस भी हुई। इसके बाद नेता गांव के बाहर से ही वापस लौट गए। इस घटनाक्रम ने रैली से पहले ही भाजपा के अंदर चल रही कथित गुटबाजी और राजनीतिक खींचतान को चर्चा में ला दिया है। साथ ही लोधी समाज के नाम पर आयोजित कार्यक्रम को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

गांव में गुटबाजी के चलते बाहर से लौटे प्रदर्शनकारी

जिला पंचायत उपाध्यक्ष अमित पडरया ने मामले में कहा कि गांवों में सामान्य रूप से दो गुट होते हैं। एक गुट के लोगों को लगा कि उनके आने से गांव में वैमनस्यता फैल सकती है, इसलिए वे बाहर से ही लौट आए। जब उनसे पूछा गया कि वे भाजपा की सरकार और भाजपा विधायक के क्षेत्र में अपनी ही सरकार की व्यवस्था के खिलाफ रैली कैसे कर रहे हैं, तो उन्होंने कहा कि वे अभी मीटिंग में हैं और बाद में बात करेंगे। 

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