रक्षाबंधन पर नरसिंहपुर केंद्रीय जेल के बाहर बहनों की लंबी कतार लगी। बहनों ने बंदी भाइयों को राखी बांधी और मिठाई खिलाई। जेल प्रशासन ने सुरक्षा के बीच मुलाकात की व्यवस्था की।
नरसिंहपुर (मध्य प्रदेश)। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर नरसिंहपुर केंद्रीय जेल के बाहर शुक्रवार सुबह से ही बहनों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। बड़ी संख्या में महिलाएं अपने बंदी भाइयों की कलाई पर राखी बांधने और उनसे मिलने पहुंचीं। जेल प्रशासन ने सुरक्षा के बीच राखी, रोली और मिठाई की व्यवस्था की, जिससे जेल परिसर में भावुक और उत्साहपूर्ण माहौल नजर आया।

बंदी भाइयों से मिलने और रक्षा सूत्र बांधने के लिए लगी लंबी कतार
जानकारी अनुसार बताया गया है कि शुक्रवार को रक्षाबंधन के शुभ अवसर पर केंद्रीय जेल के बाहर महिलाओं की एवं उनके परिवार के सदस्यों की जेल में बंद कैदियों से मुलाकात करने एवं रक्षाबंधन के अवसर पर रक्षा सूत्र बांधने को लेकर जेल के बाहर सुबह से ही बहनो की लंबी कतार लगी रही ।

जेल प्रशासन ने की राखी, रोली और मिठाई की व्यवस्था, भावुक दिखीं बहनें
जहां पर जेल प्रशासन द्वारा पर्व को लेकर कड़ी सुरक्षा के बीच रक्षा सूत्र मिठाई रोली टीका की व्यवस्था कराई जहा पर जेल परिसर के बाहर भावुक और उत्साहपूर्ण माहौल देखने को मिला। बहनों के चेहरों पर लंबे समय बाद भाई से मिलने की खुशी साफ झलक रही थी। इस आयोजन के लिए जेल प्रशासन द्वारा पहले से ही पुख्ता व्यवस्थाएं की थीं। जेल प्रशासन ने बहनों के लिए क्रमवार मुलाकात की व्यवस्था सुनिश्चित की, ताकि सभी को अपने भाई से मिलने और राखी बांधने का पर्याप्त समय मिल सके।

बहनों ने भाइयों को बांधी राखी, बंदियों ने सही राह पर चलने का दिया वचन
कारागार में प्रवेश करने के बाद बहनों ने अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा, उन्हें मिठाई खिलाई और उनकी लंबी उम्र की कामना की। इस अवसर पर कई बंदियों ने अपनी बहनों से उपहार की जगह जीवन में सही मार्ग पर चलने का वचन दिया। भाई-बहन के मिलन का यह क्रम पूरे दिन अलग-अलग शिफ्टों में चलता रहा।

सुरक्षा के बीच हुआ आयोजन, कैदियों को मिला परिवार के साथ जुड़ाव का एहसास
जेल प्रशासन ने इस पूरे आयोजन को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाए रखने के लिए विशेष तैयारियां की थीं। सुरक्षा व्यवस्था, मुलाकात का समय निर्धारण और बहनों को सुरक्षित जेल से बाहर भेजने जैसे सभी पहलुओं पर बारीकी से ध्यान दिया गया। इस आयोजन से कैदियों को मानसिक सुकून मिला और परिवार से उनका जुड़ाव और मजबूत हुआ। लंबे समय से जेल में बंद कैदियों के लिए यह दिन एक नई उम्मीद लेकर आया, जिससे उन्हें यह एहसास हुआ कि उनका परिवार अभी भी उनके साथ है।
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