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सिंगरौली में विकास की खुली पोल

20 दिन भी नहीं टिक सकी लाखों की सड़क; विकास की खुली पोल

चितरंगी जनपद पंचायत क्षेत्र में लाखों रुपये की लागत से बनाई सड़क महज 20 दिन बाद ही पूरी तरह से उखड़ने लगी है।

20 दिन भी नहीं टिक सकी लाखों की सड़क विकास की खुली पोल

Road Worth Lakhs Develops Damage Within 20 Days |

सिंगरौली,(मध्यप्रदेश)। जिले के चितरंगी जनपद पंचायत क्षेत्र से विकास कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली तस्वीरें सामने आई हैं। ग्राम पंचायत ओड़नी के रेहड़ा आदिवासी बस्ती में लाखों रुपये की लागत से बनाई गई पीसीसी सड़क निर्माण के महज 20 दिन बाद ही पूरी तरह से उखड़ने लगी है। सड़क की बदहाली देखकर ग्रामीण इसे सरकारी राशि का खुला दुरुपयोग और भ्रष्टाचार का जीता-जागता उदाहरण बता रहे हैं।

गुणवत्ता पर उठे सवाल

आदिवासी बहुल बस्ती में आवागमन को सुगम बनाने के उद्देश्य से बनाई गई इस सड़क का हाल यह है कि निर्माण कार्य के तीन सप्ताह भी नहीं बीते और सड़क की परतें उखड़ने लगी हैं। तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है, कि कंक्रीट और सीमेंट का मिश्रण किस कदर कमजोर है कि मामूली दबाव से ही सड़क टूट रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत से इसमें बेहद घटिया सामग्री का उपयोग किया गया है।

ग्रामीणों में भारी आक्रोश

ग्रामीणों का कहना है, कि उन्होंने बेहतर आवागमन के सपने देखे थे, लेकिन सड़क की गुणवत्ता ने उन उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। ग्रामीणों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, कि निर्माण के दौरान ही उन्होंने काम की गति और सामग्री को लेकर शंका जताई थी, लेकिन उस समय किसी ने उनकी बात नहीं सुनी। आज स्थिति यह है, कि आने-जाने के लिए यह सड़क पहले से भी ज्यादा खतरनाक और दुर्गम हो गई है।

अधिकारियों की चुप्पी पर उठ रहे सवाल

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है, कि आखिर लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी गुणवत्ता की मॉनिटरिंग क्यों नहीं की गई? सड़क का निर्माण जनपद पंचायत के माध्यम से कराया गया है, ऐसे में इंजीनियरों और विभागीय अधिकारियों की जिम्मेदारी और जवाबदेही सीधे तौर पर तय होती है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जब चितरंगी जनपद पंचायत के सीईओ से फोन पर पक्ष जानने का प्रयास किया गया, तो उनसे संपर्क नहीं हो सका।

प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार

भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी यह सड़क अब जिला प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। क्या प्रशासन इस मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करेगा, या फिर आदिवासी हितों से जुड़े इस भ्रष्टाचार की फाइल को भी हमेशा की तरह ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा? फिलहाल, ओड़नी गांव के लोग मामले में उच्च स्तरीय जांच और दोषियों के विरुद्ध सख्त दंडात्मक कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

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