मध्यप्रदेश विधानसभा के 69 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित विशेष सत्र में सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली।
special session organised for completion of 69 years of MP Legislative Assembly |
भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा के 69 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित विशेष सत्र में सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। सत्र के दौरान प्रदेश के 17 पूर्व मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल और उनके योगदान पर चर्चा की गई, लेकिन इसी क्रम में मौजूदा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को लेकर की गई टिप्पणी ने सदन का माहौल गरमा दिया।
वक्ताओं ने कहा कि समय-समय पर प्रदेश को अलग-अलग नेतृत्व मिला और हर मुख्यमंत्री ने अपनी सोच के अनुसार योजनाएं लागू कीं। इसी दौरान एक टिप्पणी में कहा गया कि “जब हमारे कप्तान सूट-बूट में नजर आते हैं, तब हम गरीब वैसे ही बैठे रह जाते हैं।”
विपक्ष ने जताई आपत्ति, विकास पर चर्चा की मांग
विपक्षी विधायकों ने कहा कि मुख्यमंत्री के पहनावे या व्यक्तिगत छवि पर टिप्पणी करना उचित नहीं है। उनका तर्क था कि विधानसभा जैसे मंच पर चर्चा प्रदेश के विकास, नीतियों और जनकल्याण के मुद्दों पर होनी चाहिए। विपक्ष ने इसे राजनीतिक कटाक्ष बताते हुए विरोध दर्ज कराया।
पूर्व मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल पर भी हुई चर्चा
विशेष सत्र में विभिन्न दौर के मुख्यमंत्रियों की नीतियों और योजनाओं का उल्लेख किया गया। शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल की सामाजिक योजनाओं को देशभर में पहचान दिलाने वाला बताया गया। कमलनाथ सरकार के समय औद्योगिक निवेश और प्रशासनिक सुधारों पर चर्चा हुई। उमा भारती और दिग्विजय सिंह के कार्यकाल की प्रमुख परियोजनाओं और निर्णयों को भी याद किया गया। इन सभी सरकारों की नीतियों का प्रभाव आज भी प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था में दिखाई देता है।
अध्यक्ष के हस्तक्षेप से संभली स्थिति
हंगामे के बीच विधानसभा अध्यक्ष ने हस्तक्षेप कर सदस्यों से संयम बरतने की अपील की। इसके बाद कार्यवाही दोबारा सुचारु रूप से आगे बढ़ी और विधानसभा की भूमिका, लोकतांत्रिक परंपराओं तथा भविष्य की चुनौतियों पर चर्चा जारी रही। विशेष सत्र एक ओर जहां विधानसभा की ऐतिहासिक यात्रा को याद करने का अवसर बना, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक बयानबाज़ी के कारण यह चर्चा का केंद्र भी रहा।
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