Bihar News : नई दिल्ली। चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की नवगठित पार्टी 'जनसुराज' राज्य विधानसभा चुनावों में औंधे मुंह गिरी। उसने लगभग सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन उसे एक भी सीट नहीं ..
Bihar News : नई दिल्ली। चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की नवगठित पार्टी 'जनसुराज' राज्य विधानसभा चुनावों में औंधे मुंह गिरी। उसने लगभग सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन उसे एक भी सीट नहीं मिली। उसके अधिकतर उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई। प्रशांत किशोर ने पहले संकेत दिया था कि वे राघवपुर या करगहर से चुनाव लड़ेंगे, लेकिन बाद में उन्होंने इरादा बदलते हुए चुनाव न लड़ने का फैसला किया।
प्रशांत किशोर ने एएनआई से बातचीत में बताया कि मैं चुनाव मैदान में नहीं उतरा, जब उनसे दो अक्टूबर 2024 को पटना में जनसुराज पार्टी की स्थापना के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि पार्टी 2022 से ही सक्रिय है। उस समय प्रशांत किशोर ने घोषणा की थी कि अगर सत्ता में आए तो बिहार में शराब पर प्रतिबंध हटाकर उससे प्राप्त राजस्व से राज्य की शिक्षा प्रणाली में सुधार करूंगा।
पूरे चुनाव अभियान के दौरान प्रशांत किशोर ने बिहार में रोजगार, बुनियादी क्षेत्र और कानून व्यवस्था पर जोर दिया। इसके बावजूद उनकी पार्टी एक सीट भी नहीं जीत पाई। पार्टी की हाईप्रोफाइल शुरुआत, चुनावी वादों के बावजूद इस नई पार्टी का चुनावी प्रदर्शन बहुत खराब रहा।
तारापुर में उनकी पार्टी के उम्मीदवार संतोष कुमार सिर्फ 3898 वोट ही प्राप्त कर सकी। अलीनगर में जनसुराज के उम्मीदवार 2275 वोट पाकर निर्दलीयों से भी पीछे चौथे स्थान पर रहे।
कुछ उम्मीदवार ही बचा पाए जमानत
प्रशांत किशोर ने 238 सीटों पर कैंडिडेट उतारे थे। उसमें से 233 सीटों यानी 98 प्रतिशत सीटों पर जमानत जब्त हो गई। पार्टी को कुल वोट का एक प्रतिशत भी हासिल नहीं हुआ। उधर, मायावती की बसपा जिसे बिहार में बड़ी ताकत नहीं माना जाता, उसने भी इससे ज्यादा वोट लिया और उसका वोट शेयर 1.52 परसेंट रहा
अपने घर रोहतामें भी जमानत नहीं बचा पाए पीके
प्रशांत किशोर रोहतास जिले से आते हैं जहां विधानसभा की सात सीटें हैं। उनके अपने जिलों की सभी सीटों पर भी पार्टी अपनी जमानत नहीं बचा पाई है। उनकी अपनी विधानसभा करगहर में पार्टी को सिर्फ 7.42% वोट मिला है।
68 सीटों पर NOTA से भी कम वोट मिले
जन सुराज पार्टी को जहां पूरे राज्य में 3.44 प्रतिशत वोट मिले, वहीं वह जिन 238 सीटों पर चुनाव लड़ी उनमें से 68 सीटों पर NOTA से भी पीछे रह गई। इस प्रकार लगभग 28.6% सीटों पर ‘नोटा’ को जनसुराज से अधिक वोट मिले, जो किसी भी नई पार्टी के लिए गंभीर चुनौती है।
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