ग्राम मदननगर की भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को लेकर लंबे समय से सुलग रहा ग्रामीणों का आक्रोश मंगलवार को प्रतापपुर थाना परिसर के सामने खुलकर सामने आ गया।
सूरजपुर (छत्तीसगढ़)। ग्राम मदननगर की भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को लेकर लंबे समय से सुलग रहा ग्रामीणों का आक्रोश मंगलवार को प्रतापपुर थाना परिसर के सामने खुलकर सामने आ गया। ग्राम सभा की सहमति और प्रस्ताव के बिना एसईसीएल के नाम पर जमीन नामांतरण किए जाने के आरोपों से नाराज सैकड़ों ग्रामीणों ने प्रतापपुर थाना का घेराव कर प्रशासन और एसईसीएल के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
बिना ग्राम सभा की अनुमति के जमीन अधिग्रहण का आरोप
महिलाओं, पुरुषों और युवाओं की भारी भीड़ ने थाना परिसर के बाहर धरना देते हुए दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर एफआईआर दर्ज करने की मांग की। ग्रामीणों का आरोप है कि मदननगर और आसपास के क्षेत्र की आदिवासी भूमि को ग्राम सभा की पूर्व स्वीकृति के बिना अधिग्रहित करने की प्रक्रिया चलाई गई है, जो संविधान की पांचवीं अनुसूची, पेसा कानून और भूमि अधिग्रहण संबंधी नियमों का खुला उल्लंघन है।
पैतृक जमीन से जुड़ी हैं सांस्कृतिक और धार्मिक आस्थाएं
ग्रामीणों का कहना है कि उनकी पैतृक भूमि केवल आजीविका का साधन नहीं बल्कि उनकी संस्कृति, परंपरा और धार्मिक आस्था का केंद्र भी है। इसी भूमि पर उनके सरना स्थल, देवस्थल और पूर्वजों की स्मृतियां जुड़ी हुई हैं। आंदोलन के दौरान ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रशासनिक अधिकारियों और राजस्व अमले द्वारा उनकी जानकारी और सहमति के बिना जमीन का नामांतरण एसईसीएल के नाम पर कर दिया गया।
सुनवाई न होने पर थाने के गेट पर बैठे ग्रामीण
इसके विरोध में ग्रामीणों ने पहले भी कई बार ज्ञापन और शिकायतें दी थीं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इसी कारण अब वे सीधे पुलिस से आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की मांग कर रहे हैं। थाना परिसर के बाहर स्थिति उस समय और तनावपूर्ण हो गई, जब बड़ी संख्या में ग्रामीणों के पहुंचने पर पुलिस ने एहतियातन थाना के मुख्य द्वार को बंद कर दिया। हालांकि पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े रहे और धरने पर बैठ गए। पूरे क्षेत्र में पुलिस बल की अतिरिक्त तैनाती कर दी गई ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो।

आदिवासी नेता सुरेश आयाम कर रहे आंदोलन का नेतृत्व
इस पूरे आंदोलन का नेतृत्व क्षेत्र के तेज-तर्रार युवा आदिवासी नेता एवं जिला सदस्य सुरेश आयाम कर रहे हैं। सुरेश आयाम ने आंदोलन स्थल पर कहा कि आदिवासियों की जमीन, जल और जंगल पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा या जबरन अधिग्रहण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि ग्राम सभा की अनुमति के बिना भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी तरह असंवैधानिक है और यदि प्रशासन ने समय रहते इस मामले में न्यायपूर्ण कार्रवाई नहीं की तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
दोषी अधिकारियों पर केस दर्ज करने की मांग
सुरेश आयाम ने कहा कि यह लड़ाई केवल जमीन की नहीं बल्कि आदिवासी अस्तित्व, संस्कृति और संवैधानिक अधिकारों की लड़ाई है। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की मांग है कि भूमि नामांतरण और अधिग्रहण प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों एवं संबंधित पक्षों के खिलाफ अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम सहित अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत कार्रवाई की जाए।
पुश्तैनी जमीन बचाने के लिए आगे आईं महिलाएं
आंदोलन में शामिल महिलाओं ने भी प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि उनकी पुश्तैनी जमीन पर जबरन कब्जा करने की कोशिश की जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।
ग्रामीणों ने दी बड़े जनआंदोलन की चेतावनी
फिलहाल प्रतापपुर में यह मामला राजनीतिक और सामाजिक रूप से चर्चा का विषय बना हुआ है। प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन आंदोलन की तीव्रता को देखते हुए आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक गर्मा सकता है। वहीं ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी शिकायत पर अपराध दर्ज नहीं किया गया और भूमि संबंधी विवाद का समाधान नहीं हुआ, तो वे बड़े जनआंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए बाध्य होंगे।
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