उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रही है और भ्रामक खबरें फैलाने वालों को कानूनी नोटिस भेजे जा रहे हैं।
लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) नवदीप रिनवा ने गुरुवार को राज्य में चुनाव निकाय द्वारा प्राप्त 16.18 लाख फॉर्म 6 आवेदनों के विवरण के गायब होने के आरोपों का खंडन किया। एएनआई से बात करते हुए, रिनवा ने स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग विशेष गहन पुनरीक्षण ( एसआईआर ) या फॉर्म 9 में विशेष सारांश पुनरीक्षण की दावा एवं आपत्ति अवधि के दौरान फॉर्म 6 के माध्यम से नए मतदाता बनने के लिए आवेदन करने वाले आवेदकों के नाम प्रकाशित करने के लिए बाध्य है।
आयोग कानूनन नामों को प्रकाशित करने के लिए बाध्य नहीं
अन्य मामलों में, पूरे वर्ष प्राप्त फॉर्म 6 आवेदनों के लिए, आयोग कानूनन नामों को प्रकाशित करने के लिए बाध्य नहीं है। एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयोग ने 71.38 लाख आवेदकों का विवरण सूचीबद्ध किया है, जबकि उत्तर प्रदेश में फॉर्म 6 के 88 लाख आवेदन प्राप्त हुए थे। नवदीप रिनवा ने कहा कि चुनाव आयोग ने एसआईआर के दौरान पारदर्शिता बरती है और रिपोर्ट में जिन 16.18 लाख आवेदनों की चर्चा की गई है, वे मसौदा मतदाता सूची प्रकाशित होने से पहले ही प्राप्त हो गए थे। मीडिया रिपोर्ट का खंडन करते हुए यूपी सीईओ ने कहा, "सोशल मीडिया पर यह गलत धारणा फैलाई जा रही है कि उत्तर प्रदेश में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान बिना किसी पूर्व सूचना के 16.18 लाख फॉर्म 6 आवेदन रहस्यमय तरीके से सामने आ गए। हमने इस दावे का खंडन करने के लिए एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की है और सोशल मीडिया के माध्यम से भी इस मामले को स्पष्ट किया है, जिसमें बताया गया है कि यह कोई नई खोज नहीं है जिसे दूसरों द्वारा हमारे ध्यान में लाया जा रहा है।
6 जनवरी से पहले 16.18 लाख आवेदन प्राप्त
वास्तव में, हमने सबसे पहले 6 जनवरी को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जारी प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से यह जानकारी सार्वजनिक की थी। इसके बाद, 7 जनवरी से, हमने फॉर्म 6 आवेदनों की संख्या का विवरण देते हुए दैनिक बुलेटिन जारी किए; हमने 6 जनवरी से पहले प्राप्त 16.18 लाख आवेदनों और उसके बाद प्राप्त आवेदनों के बीच अंतर करते हुए दैनिक अपडेट प्रदान किए।" इसके अलावा, उन्होंने स्पष्ट किया कि फॉर्म 6 के आवेदन एसआईआर अवधि तक सीमित नहीं हैं और आयोग पूरे वर्ष फॉर्म 6 प्राप्त करता है। उन्होंने कहा, "पूर्व आवेदनों के संबंध में, हमने स्पष्ट किया कि कानून, विशेष रूप से लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और मतदाता पंजीकरण नियम, 1960, स्पष्ट रूप से यह निर्धारित करते हैं कि मसौदा मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद 'दावे और आपत्तियां' अवधि के दौरान प्राप्त ' फॉर्म 6 ' आवेदनों के लिए ही 'फॉर्म 9' सूचियां तैयार की जाती हैं और वेबसाइट पर प्रकाशित की जाती हैं।
सूचियां प्रकाशित करने का कोई प्रावधान नहीं
अधिनियम या नियमों में उस अवधि से पहले प्राप्त 16.8 लाख आवेदनों के लिए इस प्रकार सूचियां प्रकाशित करने का कोई प्रावधान नहीं है। दूसरे, हमने स्पष्ट किया कि फॉर्म 6 आवेदन विशेष सारांश पुनरीक्षण (एसआईआर) अवधि तक सीमित नहीं हैं; इन्हें पूरे वर्ष जमा किया जा सकता है। एसआईआर दावे और आपत्तियां अवधि के दौरान प्राप्त आवेदनों को 'दावे' के रूप में वर्गीकृत किया जाता है, जबकि उस अवधि से पहले या बाद में प्राप्त आवेदनों को केवल 'आवेदन' माना जाता है। परिणामस्वरूप, पहले प्राप्त 16.8 लाख आवेदनों के लिए, और न ही 10 अप्रैल के बाद प्राप्त आवेदनों के लिए फॉर्म 9 सूचियां तैयार या प्रकाशित की जाती हैं। इसके बजाय, इन्हें नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित किया जाता है, जो कि हम इसी प्रक्रिया का पालन कर रहे हैं।
ऐसे प्रश्न जानकारी के अभाव से उत्पन्न होते हैं
मीडिया रिपोर्टों में यह सवाल उठाया गया कि मसौदा मतदाता सूची प्रकाशित होने से पहले मतदाता प्रपत्र 6 कैसे भर सकता है, इस पर उन्होंने स्पष्टीकरण देते हुए कहा, “यह पूछकर भ्रम पैदा करने का प्रयास किया गया कि लोग प्रपत्र 6 कैसे भर सकते हैं या 6 जनवरी को मसौदा मतदाता सूची प्रकाशित होने से पहले यह कैसे जान सकते हैं कि उनका नाम सूची में नहीं है। ऐसे प्रश्न जानकारी के अभाव से उत्पन्न होते हैं। भारत निर्वाचन आयोग के 27 अक्टूबर, 2025 के निर्देशों में प्रक्रिया स्पष्ट की गई थी। बूथ स्तरीय अधिकारी (बीएलओ) जब घर-घर जाकर मतदान करते हैं, तो वे 27 अक्टूबर, 2025 तक मतदाता सूची में दर्ज मतदाताओं के लिए गणना प्रपत्र साथ रखते हैं। हालांकि, ऐसा संभव है कि किसी परिवार में तीन मतदाता सूचीबद्ध हों, लेकिन चौथा पात्र व्यक्ति सूची में न हो। हमें ऐसे व्यक्तियों को भी प्रपत्र 6 उपलब्ध कराना था। ये निर्देश थे, और इन्हें नियमों के अनुसार जारी किया गया था। इस प्रक्रिया का कड़ाई से पालन किया गया।”
6 जनवरी को मसौदा मतदाता सूची प्रकाशित
“विशेष रूप से, 27 अक्टूबर, 2025 तक मतदाता सूची में जिनके नाम नहीं थे, साथ ही उन लोगों से भी जिन्होंने 6 जनवरी को मसौदा मतदाता सूची प्रकाशित होने पर पाया कि उनके नाम सूची में नहीं हैं, 16.18 लाख फॉर्म 6 आवेदन प्राप्त हुए। इन बाद में जमा किए गए आवेदनों को 'दावे' के रूप में माना गया और प्रकाशित अभिलेखों में तदनुसार दर्ज किया गया। संक्षेप में, की गई सभी कार्रवाई कानून, नियमों और भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों के पूर्ण अनुपालन में थी। हालांकि, चूंकि यह एक तकनीकी मामला है और आम जनता कानून और नियमों की बारीकियों से भलीभांति परिचित नहीं है, इसलिए कुछ व्यक्ति इस अज्ञानता का फायदा उठाकर जनता को गुमराह कर रहे हैं और अपने निजी लाभ के लिए इसका इस्तेमाल कर रहे हैं,” उन्होंने आगे कहा।
गलत जानकारी फैलाने वाले व्यक्तियों को कानूनी नोटिस जारी
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा 7 मार्च को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि मसौदा सूची के प्रकाशन से पहले ही फॉर्म 6 के लिए 16.18 लाख आवेदन प्राप्त हो चुके थे। रिनवा ने आगे कहा कि चुनाव आयोग इस तरह की जानकारी फैलाने वाले व्यक्तियों को कानूनी नोटिस जारी कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि राज्य में एसआईआर प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ आयोजित की गई, जिसमें सभी प्रमुख राजनीतिक दलों को शामिल किया गया था। हम इन व्यक्तियों को कानूनी नोटिस जारी कर रहे हैं, उन्हें उनके द्वारा किए जा रहे अपराधों से अवगत करा रहे हैं और उनसे अनावश्यक भ्रम और जन आक्रोश भड़काने के ऐसे प्रयासों से बाज आने की मांग कर रहे हैं।
यह प्रक्रिया कानून और जारी निर्देशों के अनुरूप संचालित
उत्तर प्रदेश में यह प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी तरीके से, कानून और जारी निर्देशों के अनुरूप संचालित की गई है। हमने इस प्रक्रिया में राजनीतिक दलों को लगातार शामिल किया है। 6 जनवरी को, जब हमने लाखों मतदाताओं के लिए फॉर्म प्राप्त करने की घोषणा की थी, तब से इस मामले में न तो कोई आपत्ति उठाई गई है और न ही किसी ने कोई आरोप लगाया है। हम वर्तमान में भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अनुरूप एक अभियान चला रहे हैं, जिसके तहत मतदाता सूची में अभी तक शामिल न होने वाले व्यक्ति किसी भी समय 'फॉर्म 6' जमा कर सकते हैं। निरंतर अद्यतन प्रक्रिया के तहत, यदि हमें 'फॉर्म 6' आवेदन और सहायक दस्तावेज प्राप्त होते हैं, तो सत्यापन के बाद पात्र पाए जाने वालों के नाम सूची में शामिल किए जाएंगे। इस बीच, मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि उन्होंने उत्तर प्रदेश में शिक्षक एवं स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की 11 सीटों पर होने वाले आगामी एमएलसी चुनावों के लिए एक समीक्षा बैठक की।
द्विवार्षिक चुनावों के लिए मतदान 23 अक्टूबर को
रिनवा ने कहा, "आज हमने शिक्षक एवं स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की 11 सीटों के लिए आगामी एमएलसी चुनावों के संबंध में संभागीय आयुक्तों और जिला निर्वाचन अधिकारियों के साथ एक समीक्षा बैठक की। हमने तैयारियों की समीक्षा की, जिसमें मतदाता सूचियों और मतदान केंद्रों को समय पर अंतिम रूप देना, मतदान टीमों का गठन और प्रशिक्षण, और सभी स्थानों पर पर्याप्त चुनाव सामग्री की उपलब्धता पर विशेष ध्यान दिया गया। उनका ध्यान 'रिटर्निंग ऑफिसर्स के लिए हैंडबुक' और 'मैनुअल' के प्रासंगिक अध्यायों की ओर दिलाया गया और उनसे इनका गहन अध्ययन करने की अपेक्षा की गई; हम निकट भविष्य में एक और समीक्षा करेंगे। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आगामी चुनाव शांतिपूर्ण, सुचारू और निष्पक्ष तरीके से संपन्न हों।" स्नातकों के पांच निर्वाचन क्षेत्रों और शिक्षकों के छह निर्वाचन क्षेत्रों के लिए द्विवार्षिक चुनावों के लिए मतदान 23 अक्टूबर को होगा और मतगणना 27 अक्टूबर को होगी।
(इनपुटः ANI)
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