यूपी में फॉस्फोराइट, लौह अयस्क और चूना पत्थर के खनन पट्टों के आशय पत्र जारी, अन्वेषण परियोजनाओं से नए उद्योग और रोजगार की तैयारी। पढ़ें पूरी खबर।
लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। उत्तर प्रदेश के भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग की राज्य भूवैज्ञानिक कार्यकारिणी परिषद की बैठक में खनिज अन्वेषण परियोजनाओं की प्रगति और सत्र 2026-27 की कार्ययोजना की समीक्षा की गई। राज्य में फॉस्फोराइट, लौह अयस्क और लाइमस्टोन के पट्टों के आवंटन के साथ ही नए खनिज क्षेत्रों की खोज को तेज करने की रणनीति तय की गई है।
फॉस्फोराइट, लौह अयस्क के पट्टों को रफ्तार
भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग की सचिव एवं निदेशक माला श्रीवास्तव ने बताया कि उत्तर प्रदेश मुख्यतः इंडो-गैंजेटिक प्लेन में स्थित है, जबकि इसके दक्षिणी भाग में बुन्देलखण्ड एवं विन्ध्य क्षेत्र में पठारी व चट्टानी संरचनाएं पाई जाती हैं। पूर्व में यहां मुख्यतः खंडा, गिट्टी और बोल्डर आदि का ही खनन होता रहा है, लेकिन 2022 के बाद से विभिन्न अन्वेषण एजेंसियों के साझा प्रयासों से फॉस्फोराइट, लौह अयस्क और चूना पत्थर की खोज संभव हुई है। इसके फलस्वरूप 2022 से 2026 के बीच निजी निवेशकों को ई-नीलामी के माध्यम से खनन पट्टों के आशय पत्र जारी किए गए हैं। इनमें 02 फॉस्फोराइट ब्लॉक शामिल हैं, जिनका अन्वेषण कार्य पूरा होने पर कंपनियों को खनन पट्टे के लिए आशय पत्र निर्गत कर दिया गया है।

उच्चस्तरीय बैठक में समीक्षा
खनन निदेशालय में आयोजित राज्य भूवैज्ञानिक कार्यकारिणी परिषद की बैठक में अन्वेषण परियोजनाओं की वर्ष 2025-26 की प्रगति आख्या और 2026-27 की प्रस्तावित कार्ययोजना पेश की गई। इस बैठक में भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण, परमाणु खनिज अन्वेषण एवं अनुसंधान निदेशालय, मिनरल एक्सप्लोरेशन एण्ड कंसल्टेंसी लिमिटेड (एमईसीएल), भारतीय खनिज उद्योग महासंघ और लखनऊ विश्वविद्यालय, नियोजन विभाग उत्तर प्रदेश शासन और भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग के अधिकारीगण उपस्थित रहे।
तीन जिलों में 15 परियोजनाओं पर काम जारी
बैठक के अनुसार वर्ष 2026-27 में ललितपुर, झांसी व सोनभद्र में भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण द्वारा 15 परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं। इसके साथ ही झांसी, महोबा व ललितपुर में भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग की 4, झांसी में एमईसीएल की 2 और सोनभद्र में परमाणु ऊर्जा विभाग की 3 परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं। अन्वेषण कार्य पूर्ण होने पर नए मुख्य खनिजों के ब्लॉक खोजे जा सकेंगे।

खनिज उत्पादन से निवेश और रोजगार की उम्मीद
राज्य में ग्लूकोनाइट, दुर्लभ मृदा तत्व (REE) और स्वर्ण धातु के ब्लॉकों के लिए कम्पोजिट लाइसेंस के तहत आशय पत्र जारी किए जा चुके हैं, जिनकी प्रगति पर सतत निगरानी रखी जा रही है। वहीं, फॉस्फोराइट, लौह अयस्क और लाइमस्टोन का उपयोग उर्वरक, स्टील और सीमेंट उद्योग में होने से आने वाले समय में राज्य के राजस्व, औद्योगिक निवेश और रोजगार के नए अवसर बढ़ेंगे। पर्यावरण स्वच्छता प्रमाण पत्र और वन अनापत्तियां मिलते ही इन खनिजों का वास्तविक उत्पादन शुरू कर दिया जाएगा। राजकीय अन्वेषण एजेंसियों के अतिरिक्त जियो एक्सपोर और जियोवेल जैसी निजी कंपनियां भी राज्य में खनिज अन्वेषण के लिए आगे आ रही हैं।
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