यूपी के 75 जिलों में शिक्षकों को मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति संवेदनशील बनाने के लिए 223 मास्टर ट्रेनर्स को प्रशिक्षित किया जा रहा है।
लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। बालिकाओं की शिक्षा मासिक धर्म के कारण प्रभावित न हो, इसके लिए योगी सरकार प्रदेश के सभी 75 जिलों में शिक्षकों को संवेदनशील बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। मासिक धर्म स्वास्थ्य एवं स्वच्छता पर शिक्षकों की समझ बढ़ाने के लिए 223 मास्टर ट्रेनर्स को प्रशिक्षित किया जा रहा है। राज्य स्तरीय प्रशिक्षण के बाद ये मास्टर ट्रेनर्स प्रदेश के सभी विद्यालयों के शिक्षकों को ऑनलाइन प्रशिक्षण देंगे, जिसमें स्वच्छता, सुरक्षित टॉयलेट, पानी, निस्तारण, गोपनीयता और बालिकाओं के सम्मानजनक व्यवहार जैसे पहलुओं पर जोर दिया जाएगा।
दो दिनों में 223 मास्टर ट्रेनर्स का होगा प्रशिक्षण
राज्य स्तर पर आयोजित दो दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यक्रम में प्रत्येक जनपद से तीन प्रतिभागियों को मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया जा रहा है। पहले दिन 13 अगस्त को 37 जनपदों के 111 प्रतिभागियों का उन्मुखीकरण पूरा हुआ, जबकि शेष जनपदों से आए 112 प्रतिभागियों का उन्मुखीकरण 14 अगस्त को होगा। इस प्रकार दो दिनों में कुल 223 प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
मासिक धर्म स्वास्थ्य को गरिमा और शिक्षा के अधिकार से जोड़ा गया
यह पहल डॉ. जया ठाकुर बनाम भारत सरकार एवं अन्य प्रकरण के संदर्भ में विद्यालयों में मासिक धर्म स्वास्थ्य से जुड़ी व्यवस्थाओं और संवेदनशील शैक्षिक वातावरण को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। प्रशिक्षण में यह समझ विकसित की जा रही है कि मासिक धर्म स्वास्थ्य को केवल सैनिटरी पैड की उपलब्धता तक सीमित न रखते हुए सुरक्षित टॉयलेट, पानी, साबुन, उचित निस्तारण, गोपनीयता, जागरूकता और सहयोगी वातावरण से जोड़कर देखा जाए। प्रशिक्षण सामग्री में भी मासिक धर्म स्वास्थ्य को बालिकाओं की गरिमा, शिक्षा और संवैधानिक अधिकारों से जोड़ते हुए व्यापक दृष्टिकोण पर जोर दिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश की भावना को विद्यालय स्तर तक पहुंचाने की तैयारी
प्रशिक्षण में 30 जनवरी 2026 के डॉ. जया ठाकुर बनाम भारत सरकार मामले में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा मासिक धर्म स्वास्थ्य से संबंधित बताए गए व्यापक पहलुओं की जानकारी दी जा रही है। प्रशिक्षण सामग्री के अनुसार मासिक धर्म स्वास्थ्य को गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार से जोड़ा गया है तथा सुरक्षित और सम्मानजनक मासिक धर्म प्रबंधन उपलब्ध कराने में राज्य और शैक्षणिक संस्थानों की जिम्मेदारी पर बल दिया गया है। साथ ही सरकारी एवं निजी तथा ग्रामीण एवं शहरी सभी विद्यालयों में आवश्यक व्यवस्थाओं और यह सुनिश्चित करने पर जोर है कि मासिक धर्म के कारण किसी छात्रा की शिक्षा प्रभावित न हो।
हर जनपद से तीन मास्टर ट्रेनर होंगे तैयार
राज्य स्तरीय उन्मुखीकरण कार्यक्रम में प्रत्येक जनपद से तीन प्रतिभागियों को मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया जा रहा है। पहले दिन 37 जनपदों के 111 प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण में हिस्सा लिया, जबकि शेष 112 प्रतिभागियों का उन्मुखीकरण 14 अगस्त को होगा।
मास्टर ट्रेनर पहुंचाएंगे प्रशिक्षण को विद्यालयों तक
राज्य स्तर पर प्रशिक्षित तीनों मास्टर ट्रेनर अपने-अपने जनपदों में सभी महिला एवं पुरुष शिक्षकों को ऑनलाइन प्रशिक्षण देंगे। इसमें मासिक धर्म स्वास्थ्य, बालिकाओं की गरिमा व गोपनीयता, संवेदनशील व्यवहार और आवश्यक सुविधाओं से जुड़ी जानकारी दी जाएगी। इसका उद्देश्य प्रत्येक विद्यालय और शिक्षक तक प्रशिक्षण पहुंचाकर बालिकाओं के लिए सहयोगी एवं भेदभाव-मुक्त वातावरण तैयार करना है।
‘पैड से आगे’ व्यापक व्यवस्था पर जोर
प्रशिक्षण में स्पष्ट किया जा रहा है कि मासिक धर्म स्वच्छता का अर्थ केवल सैनिटरी पैड उपलब्ध कराना नहीं है। विद्यालयों में क्रियाशील बालिका शौचालय, पानी और साबुन की उपलब्धता, सुरक्षित निस्तारण व्यवस्था, गोपनीयता तथा आपात स्थिति में आवश्यक सहायता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। प्रशिक्षण सामग्री में भी टॉयलेट, पानी, साबुन और सुरक्षित निस्तारण को मासिक धर्म स्वास्थ्य की आवश्यक आधारभूत व्यवस्था के रूप में रेखांकित किया गया है।
जागरूकता से बदलेगा विद्यालयी वातावरण
प्रशिक्षण का एक महत्वपूर्ण पक्ष मासिक धर्म से जुड़े मिथकों, झिझक और भेदभाव को दूर करना है। शिक्षकों को यह समझाया जा रहा है कि संवेदनशील और वैज्ञानिक जानकारी से बालिकाओं में आत्मविश्वास बढ़ाया जा सकता है तथा मासिक धर्म के कारण होने वाली अनावश्यक अनुपस्थिति को कम करने में विद्यालय महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। प्रशिक्षण सामग्री में मासिक धर्म स्वच्छता को स्वास्थ्य, गरिमा, समानता, गोपनीयता और शिक्षा से जोड़कर देखने पर जोर दिया गया है।
विद्यालय स्तर पर जवाबदेही और व्यवस्थागत सुधार पर जोर
योगी सरकार की इस पहल का फोकस प्रशिक्षण के साथ-साथ विद्यालयी व्यवस्था को संवेदनशील और उत्तरदायी बनाने पर है। शिक्षकों के माध्यम से बालिकाओं को आवश्यक सहयोग, सुरक्षित वातावरण और सही जानकारी उपलब्ध कराने की व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया में मास्टर ट्रेनर महत्वपूर्ण कड़ी होंगे, जो राज्य स्तर की पहल को जनपद और फिर विद्यालय स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुंचाएंगे।
हर विद्यालय तक प्रशिक्षण पहुंचाने पर सरकार का जोर
बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने कहा, "बालिकाओं की शिक्षा और गरिमा से जुड़ा कोई भी विषय संवेदनशीलता के साथ विद्यालय तक पहुंचना चाहिए। हमारा प्रयास है कि प्रत्येक शिक्षक को आवश्यक जानकारी और प्रशिक्षण मिले, ताकि विद्यालयों में बेटियों के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक और सहयोगी वातावरण तैयार हो। प्रत्येक मास्टर ट्रेनर के माध्यम से यह प्रशिक्षण प्रदेश के सभी विद्यालयों तक पहुंचाया जाएगा।"
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