उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची में दोहरी प्रविष्टियों की समस्या रोकने के लिए मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने सीएससी संचालकों को विशेष प्रशिक्षण देने के निर्देश दिए हैं।
लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने विधान सभा निर्वाचन क्षेत्रों की निर्वाचक नामावली में फार्म-6 के ऑनलाइन आवेदन के दौरान बार-बार आवेदन करने से उत्पन्न होने वाली बहुप्रविष्टियों की समस्या के समाधान के लिए सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को जन सुविधा केंद्र (सीएससी) संचालकों को विशेष प्रशिक्षण प्रदान करने के निर्देश दिए हैं।
प्रशासनिक स्तर पर यह संज्ञान में आया था कि नागरिक स्वयं या सीएससी के माध्यम से आवेदन करते समय मोबाइल नंबर पर रेफरेंस नंबर न मिलने पर दोबारा आवेदन कर देते हैं, जिससे सिस्टम में बहुप्रविष्टियां हो जाती हैं।
फार्म-6 ऑनलाइन आवेदन और ई-साइन प्रक्रिया
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि फार्म भरते समय आवेदक या उसके संबंधी का वही मोबाइल नंबर देना चाहिए जो ईलेक्टर डेटा में ईपिक आईडी से लिंक हो। फार्म-6 का अंतिम सबमिशन ई-साइन के बाद ही होता है। इसके लिए आधार नंबर दर्ज करने के बाद आधार से लिंक मोबाइल नंबर पर वन-टाइम पासवर्ड प्राप्त होता है। ओटीपी दर्ज करते ही ई-साइन सफलतापूर्वक पूरा हो जाता है।
सफलतापूर्वक सबमिशन के बाद स्क्रीन पर पुष्टिकरण संदेश प्रदर्शित होता है, जिसमें भविष्य के संदर्भ के लिए रेफरेंस नंबर दिया होता है। आवेदक और आधार से लिंक मोबाइल नंबर अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन रेफरेंस नंबर फार्म में दर्ज किए गए नंबर पर ही भेजा जाता है।
सीएससी संचालकों के लिए निर्देश और सावधानियां
यदि फार्म सीएससी संचालक द्वारा भरा जा रहा है, तो यह उसका दायित्व है कि वह आवेदक का वास्तविक और सक्रिय मोबाइल नंबर ही दर्ज करे, न कि अपना या कोई काल्पनिक नंबर। नेटवर्क समस्या के कारण यदि नंबर पर रेफरेंस नंबर न मिले, तो स्क्रीन पर दिख रहे रेफरेंस नंबर का स्क्रीनशॉट लेकर आवेदक को साझा किया जाना चाहिए ताकि पुनरावृत्ति न हो।
मतदाता पहचान पत्र डाक विभाग द्वारा स्पीड पोस्ट से भेजा जाता है। निवास का पूरा पता और सही पिन कोड न होने पर पत्र वापस लौट जाता है, इसलिए फार्म-6 में सही पता और पिन कोड भरना अनिवार्य है।
मोबाइल नंबर दर्ज करने के प्रमुख लाभ
सक्रिय मोबाइल नंबर देने से आवेदन जमा होने की पुष्टि तुरंत मिलती है, और रेफरेंस नंबर से भविष्य में स्थिति ट्रैक की जा सकती है। दस्तावेजों में कमी होने पर समय पर सूचना मिलती है और नागरिक सेवा पोर्टल या ईसिनेट मोबाइल ऐप के जरिए कभी भी ई-इपिक डाउनलोड किया जा सकता है। साथ ही जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि बीएलओ और अन्य अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि किसी भी फार्म की दोहरी प्रविष्टि न हो और व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए।
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