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एमपी में ग्रीष्मकालीन गिद्ध गणना

मध्य प्रदेश में 10,742 पहुंची गिद्धों की आबादी, जबलपुर में 92 से घटकर हुई 80

मध्य प्रदेश वन विभाग द्वारा 22, 23 एवं 24 मई 2026 को आयोजित की गई तीन दिवसीय प्रदेशव्यापी ग्रीष्मकालीन गिद्ध गणना के परिणाम जारी कर दिए गए हैं।

मध्य प्रदेश में 10742 पहुंची गिद्धों की आबादी जबलपुर में 92 से घटकर हुई 80

फाइल फोटो |

जबलपुर (मध्य प्रदेश)। मध्य प्रदेश वन विभाग द्वारा 22, 23 एवं 24 मई 2026 को आयोजित की गई तीन दिवसीय प्रदेशव्यापी ग्रीष्मकालीन गिद्ध गणना के परिणाम जारी कर दिए गए हैं। इस गणना की खास बात यह रही कि पूरे मध्यप्रदेश में तो गिद्धों की संख्या में बढ़ोतरी देखी गई है, लेकिन जबलपुर जिले में इनकी संख्या पहले के मुकाबले कम हो गई है।

मध्य प्रदेश की संख्या में हुई वृद्धि

इस वर्ष की गणना में पूरे मध्य प्रदेश में कुल 10,742 गिद्ध पाए गए हैं। यह संख्या पिछले वर्ष (2025) की ग्रीष्मकालीन गणना (9,509) के मुकाबले करीब 1,200 अधिक है। कुल पाए गए गिद्धों में 9,394 वयस्क (Adult) और 1,348 किशोर (Juvenile) गिद्ध दर्ज किए गए हैं।

जबलपुर वन मंडल की स्थिति

जबलपुर वन मंडल की बात करें, तो यहां मुख्य रूप से शाहपुरा एवं पाटन क्षेत्र में ही गिद्ध पाए जाते हैं। इस वर्ष यहां गिद्धों की संख्या 80 दर्ज की गई है। पिछले वर्ष की ग्रीष्मकालीन गिद्ध गणना में यहां 92 गिद्ध मिले थे, यानी इस वर्ष जबलपुर में 12 गिद्ध कम हुए हैं।

क्या कहते हैं जबलपुर के प्रभारी डीएफओ गर्वित गंगवार

अत्यधिक तापमान के चलते हो सकता है कि गिद्ध आसपास के किन्हीं ठंडे क्षेत्रों में पलायन कर गए हों। यह कहना उचित नहीं होगा कि जबलपुर में गिद्धों की संख्या कम हो गई है, क्योंकि ओवरऑल (पूरे प्रदेश में) उनकी संख्या में बेहतर इजाफा हुआ है।

डिजिटल माध्यम से हुई गणना

इस बार गिद्ध गणना की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि यह पूरी तरह 'गरुड़' ऑनलाइन मोबाइल ऐप के जरिए डिजिटल रूप से की गई। आंकड़ों की सटीकता बनाए रखने के लिए केवल विश्राम स्थलों या घोंसलों पर बैठे हुए गिद्धों को ही गिना गया।जबलपुर वन मंडल के शाहपुरा एवं पाटन में भले ही कुछ कमी आई हो लेकिन जबलपुर वन वृत्त और इसके नजदीकी संरक्षित क्षेत्रों (जैसे कान्हा टाइगर रिजर्व, पन्ना और बांधवगढ़ के बफर क्षेत्र) में गिद्धों की अच्छी सक्रियता देखी गई है। क्षेत्र में मुख्य रूप से इंडियन (लॉन्ग-बिल्ड), इजिशियन (सफेद) और व्हाइट-रम्प्ड प्रजातियों के गिद्ध बहुतायत में सुरक्षित पाए गए हैं।

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