पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्षी दल के नेता Sobhandeb Chattopadhyay को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। विधानसभा सचिवालय उन्हें विरोधी दल के नेता का दर्जा नहीं दे रहा है।
कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्षी दल के नेता Sobhandeb Chattopadhyay को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। विधानसभा सचिवालय उन्हें विरोधी दल के नेता का दर्जा नहीं दे रहा है। उसकी दलील है कि शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विपक्षी दल का नेता बनाए जाने को लेकर नियमों का पालन नहीं किया गया और नियमानुसार इसकी सूचना भी नहीं दी गई है। अपने अधिकार को पाने के लिए शोभनदेव चट्टोपाध्याय को आरटीआई का सहारा लेना पड़ा है।
नेता प्रतिपक्ष के कक्ष में जड़ा गया ताला
विधानसभा सचिवालय की ओर से विपक्षी दल के नेता के कक्ष में ताला जड़ दिया गया है। इसके चलते विपक्षी दल के नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय को लॉबी में बैठना पड़ा। इस घटना को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है।
80 विधायकों के हस्ताक्षर का दावा
शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने कहा कि उनकी पार्टी के पदाधिकारी और राष्ट्रीय महासचिव Abhishek Banerjee की ओर से विधानसभा सचिवालय को 80 विधायकों के हस्ताक्षर के साथ सूचित कर दिया गया है कि विपक्षी दल के नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय हैं। इसके बावजूद विधानसभा सचिवालय नियमों के विरुद्ध काम कर रहा है।
सुविधाएं नहीं मिलने का आरोप
उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल के नेता को कक्ष और दूसरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं। इस मामले में उन्होंने आरटीआई के तहत यह जानना चाहा है कि वर्ष 2011, 2016 और 2021 में विधानसभा में विपक्ष के नेता के चयन के दौरान किन नियमों का पालन किया गया था।
सचिवालय ने बताई अपनी दलील
सूत्रों के अनुसार विधानसभा सचिवालय का कहना है कि विरोधी दल के विधायकों की बैठक में नेता का चुनाव होना चाहिए। उस बैठक में मौजूद विधायकों के हस्ताक्षर के साथ विरोधी दल के नेता के चयन की जानकारी सचिवालय को दी जानी चाहिए। सचिवालय का दावा है कि इस प्रक्रिया को अपनाने की स्पष्ट सूचना अब तक नहीं दी गई है।
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