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बरगी क्रूज हादसे में कैसा रेस्क्यू?

बरगी क्रूज हादसे में कैसा रेस्क्यू? वही शव मिल रहे जो फूल कर बाहर आए

जबलपुर। संस्कारधानी के बरगी डैम में गुरुवार को हुए क्रूज हादसे में मरने वालों की संख्या 11 हो गई है...

बरगी क्रूज हादसे में कैसा रेस्क्यू वही शव मिल रहे जो फूल कर बाहर आए

बरगी क्रूज हादसे में कैसा रेस्क्यू? वही शव मिल रहे जो फूल कर बाहर आए |

जबलपुर। संस्कारधानी के बरगी डैम में गुरुवार को हुए क्रूज हादसे में मरने वालों की संख्या 11 हो गई है। लापता 4 लोगों में से शनिवार शाम एनडीआरएफ ने दो बच्चों के शव बरामद किये। अभी भी 2 लोगों का पता नहीं चला है। जिला प्रशासन के मुताबिक, सर्च आपरेशन 48 घंटे से लगातार जारी है। राहत कार्य में एनडीआरएफ और सेना के जवान जुटे हुए हैं। शनिवार को मिले शवों में विराज सोनी (6) और श्रीतमिल (5) शामिल हैं।

पानी में लगातार रहने के कारण विराज का शव सतह पर आ गया। उसके बाद उसे निकाला जा सका। इस बीच पुलिस ने क्रूज पायलट महेश पटेल को हिरासत में लेकर पूछताछ कर दी है। 

मप्र पर्यटन के सलाहकार कमांडर राजेंद्र निगम हादसे की वजह अचानक आए मिनी बवंडर और तेज हवा को बताया। उन्होंने कहा, लहरों में क्रूज का संतुलन बिगड़ा और पलट गया। पर सबसे बड़े सवाल का जवाब अब भी नहीं मिला है। मौसम विभाग ने पहले ही येलो अलर्ट जारी किया था, इसके बाद भी क्रूज संचालन क्यों किया गया। यह स्पष्ट नहीं किया गया कि खराब मौसम के बीच रीयल लाइम मानिटरिंग या अलर्ट सिस्टम था या नहीं। 

पानी ने मासूम की सूरत तक बदल दी

छह साल का सिराज 48 घंटे तक पानी में रहा। शनिवार को उसका शव पानी के ऊपर आया तब उसे बरामद किया गया। हादसे के वक्त सोनी परिवार के 7 सदस्य क्रूज में सवार थे। इनमें से 5 लोगों को बचा लिया गया।  लेकिन मां नीतू सोनी (43) और बेटा विराज की हादसे में मौत हो गई। नीतू का शव शुक्रवार को मिला था। अब परिवार सदमे में है। 

5 साल के बेटे का शव मिला, पिता और चचेरा भाई लापता

वेस्टलैंड खमरिया के रहने वाले श्रीतमिल (5) का शव बरामद हो चुका है। उसके पिता कामराज और चचेरा भाई मयूरन लापता है। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ टीम लगातार डैम में सर्च आपरेशन चला रही है। 

फंसे लोगों की तलाश में क्रूज डिस्मेंटल

बचाव दल ने क्रूज में फंसे किसी भी व्यक्ति के होने की संभावना के मद्देनजर उसे पूरी तरह नष्ट कर दिया है। दूसरी तरफ, रविवार को भी सर्च आपरेशन जारी रखने का फैसला किया गया। शनिवार को तेज हवा के कारण तलाशी अभियान में कुछ रूकावट आई। 

इंजन दो थे पर एक से ही चलाया जा रहा था क्रूज

डैम में क्रूज कैप्टन और क्रू सदस्यों की लापरवारी व हठधर्मिता के कारण कई बेगुनाहों की जान चली गई। मौसम विभाग ने पहले ही येलो अलर्ट जारी किया था। साथ ही पर्यटकों के बार-बार मना करने पर भी कैप्टन ने क्रूज को दोबारा उफनती नदी में उतार दिया। इस बीच जानकार बता रहे हैं कि क्रूज में दो इंजन होने के बाद भी उसे एक ही इंजन पर चलाया जा रहा था। इसी से लहर को तेजी से चीर नहीं पाया और अथाह जल राशि में समा गया। इस बीच क्रूज को जेसीबी से नष्ट करने पर भी सवाल उठ रहे हैं।

लोग प्रश्न कर रहे हैं कि जल्दबादी में क्रूज क्यों नष्ट कर दिया गया। इस बीच जानकारों का कहना है कि दोनों इंजन की क्षमता 180 एचपी से 300 एचपी  तक थी। दोनों इंजन को एक साथ प्रयोग किया जाता तो परिणाम कुछ अलग होते। संभव है हादसे को टाला जा सकता था। उधर क्रूज के इंजीनियर बताते है कि क्रूज पूरी तरह फिट था उसे 2 साल पहले ही पूरी तरह मरम्मत किया गया था। 

फरिश्ता साबित हुआ रमजान

प्रत्क्षदर्शियों के अनुसार, क्रूज को डूबता देखकर पंपिंग स्टेशन पर कार्यरत सिक्किम उर्फ रहमान ने 25 फीट की ऊंचाई से छलांग लगा दी। वे रस्सी लेकर तैरते हुए एक वृद्ध दो बाहर निकाला। इसके बाद तीन अन्य लोगों को बचाया। और दो शव भी बाहर निकाले। रहमान के साथियों ने भी कुछ लोगों को बाहर निकाला। 

क्रूज 10 साल और चलता

इंजीनियरों ने बारीकी से जांच के बाद बताया कि क्रूज वर्ष 2006 में बना था औऱ पूरी तरह फिट था। इस क्रूज का सफलतापूर्वक अगले 10 साल तक और संचालन किया जा सकता था। अब इसे आनन-फानन में नष्ट करने पर सवाल उठ रहे हैं।  

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