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गांव में मातम के बीच बाघ का खौफ

बांधवगढ़ में महुआ बीनने गई महिला पर बाघ का हमला, जंगल में मिला शव

दोपहर तक घर वापस नहीं लौटने पर परिजनों की चिंता बढ़ गई। काफी देर तक इंतजार करने के बाद परिवार और ग्रामीण उनकी तलाश में जंगल पहुंचे।

बांधवगढ़ में महुआ बीनने गई महिला पर बाघ का हमला जंगल में मिला शव

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व (फाइल फोटो) |

बांधवगढ़ (मध्यप्रदेश ) । टाइगर रिजर्व के पनपथा कोर रेंज से एक दर्दनाक घटना सामने आई है। महुआ फल बीनने जंगल गई एक महिला की बाघ के हमले में मौत हो गई। घटना के बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल है, जबकि वन विभाग ने ग्रामीणों से अतिरिक्त सतर्कता बरतने की अपील की है। जानकारी के अनुसार ग्राम झलवार निवासी श्रीमती फूल बाई गोंड (55 वर्ष), पति छोटेलाल सिंह गोंड, 12 जून 2026 को बीट कुंदरी के आरक्षित वन कक्ष क्रमांक 460 स्थित बड़ी झिरिया के पास महुआ फल बीनने जंगल गई थीं। दोपहर तक घर वापस नहीं लौटने पर परिजनों की चिंता बढ़ गई। काफी देर तक इंतजार करने के बाद परिवार और ग्रामीण उनकी तलाश में जंगल पहुंचे।

महिला की मौके पर ही हो गई थी मौत

तलाश के दौरान बड़ी झिरिया क्षेत्र में महिला का शव मिलने से हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही वन विभाग और स्थानीय पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया कि महुआ फल बीनने के दौरान बाघ ने उन पर हमला कर दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद वन अमले ने आवश्यक कानूनी कार्रवाई पूरी करते हुए शव को पोस्टमार्टम के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अमरपुर भेजा। देर शाम होने के कारण शव को अस्पताल में सुरक्षित रखा गया। शनिवार 13 जून को चिकित्सकों की टीम द्वारा पोस्टमार्टम किए जाने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। इसके बाद ग्राम झलवार में अंतिम संस्कार किया गया, जहां पूरे गांव में शोक और मातम का माहौल देखने को मिला।

बाघ वाले इलाके में न जाने की ग्रामीणों को चेतावनी

इस घटना ने एक बार फिर जंगल से लगे गांवों में वन्यजीवों और ग्रामीणों के बीच बढ़ते संघर्ष की चिंता को सामने ला दिया है। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने बताया कि ग्रामीणों को लगातार बैठकों, मुनादी और जनजागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से समझाइश दी जा रही है कि बाघ विचरण क्षेत्रों में अकेले जंगल में प्रवेश न करें। विशेष रूप से महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को सावधानी बरतने तथा अत्यावश्यक स्थिति में ही समूह के साथ जंगल जाने की सलाह दी जा रही है। वन विभाग ने प्रभावित क्षेत्र में ट्रैप कैमरे लगाए हैं और हाथियों की मदद से लगातार सर्चिंग अभियान चलाया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्र की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। घटना के बाद झलवार और आसपास के गांवों में भय का माहौल है। ग्रामीणों ने वन विभाग से सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी बढ़ाने की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।

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