ढाका में आयोजित 'धोरा तारु काव्य-प्रकृति की कहानी' ने टैगोर के प्रकृति प्रेम और भारत-बांग्लादेश की साझा सांस्कृतिक विरासत को नृत्य-नाट्य के जरिए जीवंत किया।
Prime News Network
2026-09-12 13:41:24