नेपाल की अंतरिम सरकार और Gen-Z पीपुल्स मुवमेंट के बीच बुधवार को एक 10 सूत्रीय समझौता हुआ है।
काठमांडू। नेपाल की अंतरिम सरकार और Gen-Z पीपुल्स मुवमेंट के बीच बुधवार को एक 10 सूत्रीय समझौता हुआ है। मतभेदों के बीच प्रधानमंत्री कार्यालय पर हुए इस समझौते में Gen-Z मुवमेंट एलाइंस, काउंसिल ऑफ Gen-Z (सुडान गुरुंग के नेतृत्व वाला), Gen-Z फ्रंट (रक्षा बोम के नेतृत्व वाला) और अन्य छोटे ग्रूप शामिल हुए।
बैठक के समय मौजूद नहीं थे राष्ट्रपति
इस समझौते के औचित्य के विरोध पर Gen-Z ग्रुपों के बीच बैठक में मतभेद गहरा गया। इस बैठक के समय राष्ट्रपति मौजूद नहीं थे। विरोध कर रहे एक ग्रुप ने समझौते पर हस्ताक्षर के बाद उसकी प्रति फाड़ दी। इस समझौते में शहीदों के परिवारों को सम्मान देने, घायलों को राहत देने और भ्रष्टाचार विरोधी प्रयासों को कारगर बनाने का प्रस्ताव शामिल हैं।
मौजूदा संविधान में संशोधन की दिशा में कदम उठाएगी अंतरिम सरकार
इससे संबंधित एक अन्य खबर के अनुसार, नेपाल की अंतरिम सरकार मौजूदा संविधान में संशोधन की दिशा में कदम उठाएगी। इन संशोधनों का मकसद आबादी के आधार पर पूरी तरह इसके अनुरूप और समावेशी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना व प्रमुख सरकारी पदों पर चुने गए अधिकारियों के लिए कार्यकाल की सीमा तय करना है।
उच्चस्तरीय संविधान संशोधन सिफारिश के लिए होगा आयोग का गठन
10 सूत्रीय समझौते के अनुसार एक उच्चस्तरीय संविधान संशोधन सिफारिश के लिए आयोग का गठन किया जाएगा। उसमें संबंधित हितधारक, स्वतंत्र विशेषज्ञ और जेन-जी प्रतिनिधि शामिल होंगे। इस आयोग को प्रगतिशील संवैधानिक बदलावों के लिए सिफारिशों के साथ एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का काम भी सौंपा जाएगा, जो जेन-जी प्रदर्शनकारियों की आकांक्षाओं के अनुरूप होगी। उन्होंने पिछली केपी शर्मा ओली के नेतृत्व वाली सरकार को गिराया था। इसके बाद नेपाल में सुशीला कार्की के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार बनाई गई।
चुनावी प्रणाली और समावेशी प्रतिनिधित्व में सुधार की सिफारिशें
आयोग किसी खास समुदाय की आबादी के आधार पर पूरी तरह से अनुरूप और समावेशी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए चुनावी प्रणाली में जरूरी सुधारों की सिफारिश करेगा। फिलहाल, नेपाल का संविधान प्रतिनिधि सभा और प्रांतीय विधानसभाओं के सदस्यों को चुनने के लिए एक मिश्रित चुनावी प्रणाली (फर्स्ट पास्ट द पोस्ट ) और आनुपातिक प्रतिनिधित्व (पीआर) का प्रावधान करता है। 'फर्स्ट पास्ट द पोस्ट प्रणाली' के तहत, 60 प्रतिशत प्रतिनिधियों को चुना जाता है, जबकि बाकी 40 प्रतिशत को आनुपातिक प्रतिनिधित्व के माध्यम से चुना जाता है।
प्रमुख पदों के लिए अधिकतम दो कार्यकाल (10 वर्ष) की सीमा की सिफारिश
समझौते के अनुसार आयोग राज्य के प्रमुख, तीनों स्तरों (संघीय, प्रांतीय और स्थानीय) के प्रमुखों और कार्यकारी निकायों के सदस्यों के लिए अधिकतम दो कार्यकाल (कुल 10 वर्ष से अधिक नहीं) की कार्यकाल सीमा की सिफारिश भी करेगा। फिलहाल कार्यकाल की सीमा सिर्फ राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और स्थानीय सरकारों के प्रमुखों पर लागू होती है। संघीय या प्रांतीय सरकारों के प्रमुखों के लिए कोई कार्यकाल सीमा नहीं है।
बैठक में ये भी चर्चा हुई कि राजनीतिक नेता बार-बार सत्ता में आते रहे और कोई नतीजा नहीं दिया, जिसे 'म्यूजिकल चेयर्स' जैसा खेल बताया गया। इसी से नेपाली युवाओं में भारी असंतोष पैदा हुआ। यह गुस्सा इस साल सितंबर में हुए जेन-जी प्रदर्शनों में स्पष्ट रूप से दिखा।
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