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मुद्रास्फीति का दबाव , डोल रहा निवेशकों का भरोसा

अफगान-बलूचिस्तान व्यापारिक मार्ग बंद होने से संकट गहराया

अफगानिस्तान और बलूचिस्तान के बीच व्यापारिक आवाजाही के मार्गों के बंद होने से आर्थिक संकट गहरा गया़ है। व्यापार ठप होने से सिर्फ पंजाब प्रांत को 80 अरब रुपये का नुकसान हो रहा है।

अफगान-बलूचिस्तान व्यापारिक मार्ग बंद होने से संकट गहराया

अफगान-बलूचिस्तान व्यापारिक मार्ग बंद होने से संकट गहराया

व्यापार ठप होने से पंजाब को हर माह 80 अरब रुपये का नुकसान

मुद्रास्फीति के बढ़ते दबाव से डोल रहा निवेशकों का विश्वास

क्वेटा। अफगानिस्तान और बलूचिस्तान के बीच व्यापारिक आवाजाही के मार्गों के बंद होने से आर्थिक संकट गहरा गया़ है। व्यापार ठप होने से सिर्फ पंजाब प्रांत को 80 अरब रुपये का नुकसान हो रहा है। व्यावसायिक हस्तियों ने चेताया है कि सीमापार की वाणिज्यिक गतिविधियों में स्थायित्व लाने में पाकिस्तान की विफलता मुद्रास्फीति के दबाव को बढ़ा रही है। मुद्रास्फीति के बढ़ते दबाव से निवेशकों का विश्वास डोल रहा है। 
'बलूचिस्तान पोस्ट' के अनुसार, अक्टूबर में दोनों तरफ के बीच तनाव बढ़ने से लाहौर चेंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्री को
व्यापार के रास्तों के बंद करने पड़े। इससे द्विपक्षीय व्यापार लड़खड़ा गया।  
अगानिस्तान के बाजार पर आश्रित उद्योगों, खासकर सीमेंट, कृषि के काम आने वाले रसायन और खाद्य निर्यात क्षेत्र को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। चेंबर के प्रतिनिधियों का कहना है कि व्यापार के रास्तों को बंद करने से आर्थिक सहयोग को राजनीतिक और सुरक्षा विवादों  से अलग करने में सरकार की विफलता उजागर होती है। इस तरह की पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को बार बार नुकसान पहुंचता है। सीमा के दोनों तरफ के हजारों व्यापारी घिरे पड़े हैं। अनुमानत; तीन हजार व्यापारी लम्बे समय तक  इस बंदी के कारण नुकसान उठा रहे हैं, इनमें अधिसंख्य व्यापारी पाकिस्तान के हैं। अफगानिस्तान से आयातित फल, सूखे मेवे और जल्द खराब होने वाले सामान सीमा के व्यापारिक ठिकानों पर ट्रकों में लदे खराब हो गए। इससे बड़े पैमाने पर वित्तीय नुकसान पहुंचा है। 
दूसरी तरफ, पाकिस्तान सब्जियां, दवाइयां और निर्माण के सामन अफगानिस्तान को निर्यात नहीं कर पा रहा। इससे पाकिस्तान के निर्यात सेक्टर को काफी नुकसान पहुं रहा है।
व्यापार के विशेषज्ञों का कहना है कि इस अवरोध के कारण ट्रांस्पोर्ट और लाजिस्टिक सपोर्ट उद्योगों और ड्राइवर- माल लोड करने वालों और अन्य छोटे आपरेटरों को अपना अस्तित्व बचाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

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