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BYC ने न्यायिक देरी पर उठाए सवाल

बलूचिस्तान हाई कोर्ट में मामलों की सुनवाई में देरी पर BYC ने जताई चिंता

बलोच यकजेहती कमेटी ने बलूचिस्तान हाई कोर्ट में अपने नेताओं से जुड़ी जमानत और संवैधानिक याचिकाओं की सुनवाई बार-बार टलने पर चिंता जताते हुए जल्द सुनवाई की मांग की है।

बलूचिस्तान हाई कोर्ट में मामलों की सुनवाई में देरी पर byc ने जताई चिंता

BYC Raises Concern Over Repeated Delays in Hearings at Balochistan High Court |

बलूचिस्तान (पाकिस्तान)। 'द बलूचिस्तान पोस्ट' की रिपोर्ट के अनुसार, बलोच यकजेहती कमेटी (BYC) ने बलूचिस्तान हाई कोर्ट में अपने नेताओं से जुड़ी ज़मानत याचिकाओं और संवैधानिक याचिकाओं की सुनवाई में बार-बार और बिना किसी कारण हो रही देरी पर गंभीर चिंता जताई है।

ज़मानत याचिकाओं पर सुनवाई के लिए लगभग पांच बार तारीखें तय

'द बलूचिस्तान पोस्ट' के अनुसार, संगठन ने कहा कि उसके नेताओं से जुड़े कई मामले बार-बार कोर्ट की कॉज़ लिस्ट में शामिल किए गए, जिनमें चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली कोर्ट नंबर 1 भी शामिल है। हालांकि, BYC का आरोप है कि कई बार सुनवाई आगे नहीं बढ़ पाई और बेंच को हटा दिया गया, जिससे मामले अगली तारीखों के लिए टल गए। फरवरी में क्वेटा एंटी-टेररिज्म कोर्ट द्वारा ज़मानत याचिकाएं खारिज किए जाने के बाद BYC नेताओं द्वारा दायर ज़मानत याचिकाओं पर सुनवाई के लिए लगभग पांच बार तारीखें तय की गई थीं। BYC ने बताया कि कोर्ट बेंच के हटने के बाद हर बार तय सुनवाई को टाल दिया गया।

 बिना किसी ठोस कार्यवाही या अंतिम फैसले के लंबे समय से लंबित

BYC ने अपनी गतिविधियों और नेतृत्व से जुड़ी कई संवैधानिक याचिकाओं की ओर भी इशारा किया, जो संगठन के अनुसार, बिना किसी ठोस कार्यवाही या अंतिम फैसले के लंबे समय से लंबित हैं। संगठन ने कहा कि ज़मानत सुनवाई का बार-बार टलना विशेष रूप से चिंताजनक है क्योंकि कुछ मामलों में ऐसे लोग शामिल हैं जो हिरासत में हैं। उसने तर्क दिया कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े आवेदनों पर समय पर न्यायिक विचार की आवश्यकता होती है और बार-बार सुनवाई टलने से आरोपी व्यक्तियों के अधिकारों पर गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

लंबित ज़मानत याचिकाओं और संवैधानिक याचिकाओं पर जल्द से जल्द सुनवाई की मांग

BYC ने यह चिंता भी जताई कि लंबी देरी से याचिकाकर्ताओं के लिए अनिश्चितता बढ़ सकती है और न्यायिक प्रक्रिया में भरोसा कम हो सकता है, खासकर उन मामलों में जिनमें मौलिक अधिकार, हिरासत और संवैधानिक सुरक्षा शामिल हैं, जैसा कि 'द बलूचिस्तान पोस्ट' ने बताया है। संगठन ने बलूचिस्तान हाई कोर्ट से आग्रह किया कि वह लंबित ज़मानत याचिकाओं और संवैधानिक याचिकाओं पर जल्द से जल्द सुनवाई करे और कानून तथा संवैधानिक सुरक्षा उपायों के अनुसार उनका निपटारा करे। BYC ने कहा कि वह मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के मामलों को सुलझाने के लिए कानूनी और शांतिपूर्ण रास्ते अपनाना जारी रखेगा, जैसा कि 'द बलूचिस्तान पोस्ट' ने बताया है। (इनपुट: ANI)

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